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Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   Devotees took a holy dip in the Yamuna River and Satkumbha Dham on Ganga Dussehra.

Sonipat News: गंगा दशहरा पर यमुना नदी और सतकुंभा धाम में श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

Mon, 25 May 2026 08:12 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Mon, 25 May 2026 08:12 PM IST
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Devotees took a holy dip in the Yamuna River and Satkumbha Dham on Ganga Dussehra.
फोटो : सोनीपत के मिमारपुर घाट ​स्थित यमुना नदी में सूर्य देव को जल अर्पण करती महिला। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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सोनीपत/गन्नौर। गंगा दशहरे के अवसर पर श्रद्धालुओं ने यमुना नदी और सतकुंभा धाम में स्नान किया। सोमवार को पूरा दिन यमुना नदी पर श्रद्धालुओं की लाइनें लगी रहीं। उनकी सेवा में यमुना नदी के रास्ते पर पड़ने वाले गांवों के लोगों ने छबील और भंडारे लगाए।
गंगा दशहरे पर श्रद्धालु दूर-दराज से यमुना नदी पर पहुंचे। पूरी श्रद्धा के साथ तपती गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच श्रद्धालुओं ने यमुना में स्नान कर पूजा-अर्चना की। यह सिलसिला पूरा दिन चलता रहा। वहीं, एक दिन पहले यात्रियों के स्नान के लिए छह रोडवेज बस हरिद्वार भेजी गई थी। श्रद्धालु कुरुक्षेत्र स्थित ब्रह्म सरोवर में स्नान करने के लिए भी गए। मान्यता है कि इस दिन ही धरती पर मां गंगा अवतरित हुई थीं। तभी से इस दिन को गंगा दशहरा के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है। इस उपलक्ष्य में शहर के विभिन्न मंदिरों में जहां पूजा-अर्चना हुई तो वहीं लोगों ने मीठे पानी की छबील भी लगाई।
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सिद्धपीठ सतकुंभा धाम के पीठाधीश्वर श्रीमहंत राजेश स्वरूप महाराज ने कहा कि गंगा दशहरा आस्था और पुण्य का पर्व है। उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार इस दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। किसी भी पवित्र तीर्थ या सरोवर में स्नान करने से गंगा स्नान के समान पुण्य प्राप्त होता है।
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68 तीर्थ में शामिल सतकुंभा तीर्थ सप्त ऋषियों ने स्थापित माना जाता है। भंडारे की सेवा मार्केट कमेटी गन्नौर के चेयरमैन निशांत छौक्कर और सेठपाल प्रधान ने संभाली। वहीं, छबील की व्यवस्था ब्रह्मपाल छौक्कर ने करवाई। धाम की व्यवस्थाओं में बाबा सत्यवान स्वरूप, सूरज शास्त्री और अन्य श्रद्धालुओं ने सहयोग दिया।

गंगा दशहरा पर दान देने का है विशेष महत्व

गंगा दशहरा पर दस वस्तुओं के दान का विशेष महत्व माना जाता है। प्राचीन मान्यता के मुताबिक ज्येष्ठ महीने की दसवीं को मां गंगा का धरती पर जन्म हुआ था। इसी वजह से इस दिन गंगा स्नान व दान देने का विशेष महत्व है। बताया जाता है कि राजा दलीप के पुत्र भागीरथ को अपने पूर्वजों की अस्थियां प्रवाहित करने के लिए पवित्र जल की जरूरत थी। इसके लिए राजा भागीरथ ने ब्रह्मा की तपस्या की थी। ब्रह्मा से भागीरथ ने गंगा की मांग की। गंगा भगवान शिव की जटाओं में थी।

फोटो : सोनीपत के मिमारपुर घाट स्थित यमुना नदी में सूर्य देव को जल अर्पण करती महिला। संवाद

फोटो : सोनीपत के मिमारपुर घाट स्थित यमुना नदी में सूर्य देव को जल अर्पण करती महिला। संवाद

फोटो : सोनीपत के मिमारपुर घाट स्थित यमुना नदी में सूर्य देव को जल अर्पण करती महिला। संवाद

फोटो : सोनीपत के मिमारपुर घाट स्थित यमुना नदी में सूर्य देव को जल अर्पण करती महिला। संवाद

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