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आस्था की डुबकी लगाने आईं दो बहनें यमुना में डूबीं, मौत
sonipat
Updated Mon, 27 Jun 2016 12:43 AM IST
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यमुना किनारे जमा भ्ाीड़।
- फोटो : amar ujala
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यमुना के मीमारपुर घाट पर रविवार की सुबह रोहतक के गांव जसिया से अपने परिजनों के साथ यमुना स्नान के लिए आई दो सगी बहनों की पैर फिसलकर डूबने से मौत हो गई। ग्रामीणों ने सूचना पुलिस को दी। ग्रामीणों ने पुलिस के सहयोग से दोनों बहनों के काफी प्रयास के बाद बाहर निकाला, लेकिन तक उनकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने मामला दर्जकर शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद परिजनों को सौंप दिए।
रोहतक के जसिया गांव से कार में सवार होकर मंजीत अपनी पत्नी सुशीला, अपने बेटे राहुल और अपनी छोटी बेटी 14 वर्षीय कुसुम, 20 वर्षीय प्रभा और अपने जीजा ईश्वर तथा भांजे गोलू के साथ यमुना में आस्था की डुबकी लगाने के आए थे। यमुना घाट पर पहुंचने के बाद जैसे ही कुसुम और प्रभा यमुना में स्नान के लिए गई तो वह कीचड़ और गहरा गड्ढा होने के कारण दोनों बहनें एकदम दिखाई देनी बंद हो गईं।
उनके दिखाई न देने के बाद परिजन जब रोने लगे तो खेतों में काम करने वाले लोग उनके पास आए और जानकारी लेने के बाद पुलिस को सूचित किया। सूचना के बाद मीमारपुर चौकी से ईएसआई अशोक व उनकी टीम मौके पर पहुंची और गांव से गोताखोर को मदद से पहले कुसुम के शव को बाहर निकाला। करीब 40 मिनट बाद काफी प्रयास करने पर प्रभा को बाहर निकाला। दोनों बहनों की मौके पर मौत हो चुकी थी। पुलिस ने दोनों के शवों को पोस्टमार्टम करवाने के बाद परिजनों को सौंप दिया।
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जांच अधिकारी ईएसई अशोक ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि दो बहनें यमुना में स्नान करने आई थी और दोनों डूब गईं। गोताखोरों की मदद से दोनों को बाहर निकाला और मामला दर्ज कर पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए।
दलदल होने के कारण नीचे धंस गई : गोताखोर
गांव के ही गोताखोर महेश ने बताया कि दोनों बहने पैर फिसलने के कारण गहरे पानी में चली गईं और नीचे दलदल होने के कारण वे बाहर नहीं निकल पाईं। अगर दलदल नहीं होती तो वे बाहर निकल सकती थी।
आषाढ़ की कृष्ण पंचमी को यमुना स्नान के लिए परिजनों के साथ आई दोनों सगी बहनों की यमुना में डूबने से मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने बताया कि दोनो सगी बहन रोहतक में पढ़ती थीं। कुसुम सातवीं कक्षा में पढ़ती थी और प्रभा बीए की पढ़ाई कर रही थी।
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रोहतक के जसिया गांव से कार में सवार होकर मंजीत अपनी पत्नी सुशीला, अपने बेटे राहुल और अपनी छोटी बेटी 14 वर्षीय कुसुम, 20 वर्षीय प्रभा और अपने जीजा ईश्वर तथा भांजे गोलू के साथ यमुना में आस्था की डुबकी लगाने के आए थे। यमुना घाट पर पहुंचने के बाद जैसे ही कुसुम और प्रभा यमुना में स्नान के लिए गई तो वह कीचड़ और गहरा गड्ढा होने के कारण दोनों बहनें एकदम दिखाई देनी बंद हो गईं।
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उनके दिखाई न देने के बाद परिजन जब रोने लगे तो खेतों में काम करने वाले लोग उनके पास आए और जानकारी लेने के बाद पुलिस को सूचित किया। सूचना के बाद मीमारपुर चौकी से ईएसआई अशोक व उनकी टीम मौके पर पहुंची और गांव से गोताखोर को मदद से पहले कुसुम के शव को बाहर निकाला। करीब 40 मिनट बाद काफी प्रयास करने पर प्रभा को बाहर निकाला। दोनों बहनों की मौके पर मौत हो चुकी थी। पुलिस ने दोनों के शवों को पोस्टमार्टम करवाने के बाद परिजनों को सौंप दिया।
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जांच अधिकारी ईएसई अशोक ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि दो बहनें यमुना में स्नान करने आई थी और दोनों डूब गईं। गोताखोरों की मदद से दोनों को बाहर निकाला और मामला दर्ज कर पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए।
दलदल होने के कारण नीचे धंस गई : गोताखोर
गांव के ही गोताखोर महेश ने बताया कि दोनों बहने पैर फिसलने के कारण गहरे पानी में चली गईं और नीचे दलदल होने के कारण वे बाहर नहीं निकल पाईं। अगर दलदल नहीं होती तो वे बाहर निकल सकती थी।
आषाढ़ की कृष्ण पंचमी को यमुना स्नान के लिए परिजनों के साथ आई दोनों सगी बहनों की यमुना में डूबने से मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने बताया कि दोनो सगी बहन रोहतक में पढ़ती थीं। कुसुम सातवीं कक्षा में पढ़ती थी और प्रभा बीए की पढ़ाई कर रही थी।