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साढ़े तीन माह बाद भी नहीं मिली भाई को नौकरी
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Tue, 02 Feb 2016 11:50 PM IST
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अक्टूबर महीने में शहर के देवीनगर में अपने ताऊ के घर में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई एक दलित युवक की मौत के बाद किए गए सरकारी दावे उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं। अब तक न तो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और न ही मृत युवक के भाई को नौकरी दी गई है। गौतम ने प्रशासन से जल्द नौकरी देने की मांग की है।
सोनीपत रोड स्थित उपमंडलीय परिसर में मंगलवार को एसडीएम के समक्ष नौकरी की मांग करने पहुंचे गौतम और मां संजीत ने बताया कि गोविंदा की मौत हुए साढ़े तीन महीने का समय हो गया है। गोविंदा की मौत के बाद अधिकारियों ने उसके भाई गौतम को नौकरी देने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि गौतम को नौकरी देना तो दूर की बात अभी तक उसके बेटे के आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार तक नहीं किया है। जो भी पुलिस की टीम आती है। वह जांच करके चली जाती है। चंडीगढ़ क्राइम ब्रांच की टीम उनके बयान लेकर जा चुकी है। उनके अनुसार वह इस जांच को तीन महीने बाद आयोग के सामने पेश करेगी। संजीत ने कहा कि जांच के बाद वह आयोग के सामने पेश होंगे, लेकिन अभी वह बड़े बेटे गौतम की नौकरी के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं। मंगलवार को एसडीएम से नौकरी की गुहार लगाने आए थे, लेकिन उनके कार्यालय में न होने से कोई जवाब नहीं मिला है।
यह था मामला
22 अक्टूबर की सुबह देवीनगर के एक मकान में गोविंदा (14) नाबालिग दलित युवक का शव संदिग्ध हालात में मिला था। आरोप था कि एएसआई सुभाष और एएसआई अशोक ने गोविंदा को पहले तो झूठे कबूतर चोरी के मामले में फंसाया और बाद में थाने में बुलाकर उसकी हत्या कर शव को उसी के ताऊ के घर में डालकर फरार हो गए। पुलिस ने एएसआई सुभाष व एएसआई अशोक के खिलाफ हत्या का मामला भी दर्ज किया था, लेकिन परिजनों ने शव का दाह संस्कार करने से मना कर दिया था। मांग थी कि दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर उनके खिलाफ एटरोसिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। घटना के एक दिन बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह परिजनों से मिलने पहुंचे थे। सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इतना ही नहीं स्पेशल एफएसएल टीम का भी गठन किया गया था। बाद में आयोग के सामने एसआईटी पुख्ता जवाब नहीं दे पाई। जिससे आयोग ने यह मामला चंडीगढ़ क्राइम ब्रांच को सौंप दिया। फिलहाल क्राइम ब्रांच ही मामले की जांच कर रही है।
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एसडीएम बोले, मेरे पास आएं, नप में नौकरी दे दी जाएगी
एसडीएम धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि मृतक गोविंदा के भाई को प्रशासन ने नौकरी देने का वायदा किया है। गौतम को नौकरी जरूर दी जाएगी, लेकिन अभी तक नौकरी के लिए उनके समक्ष नहीं आए हैं। जैसे ही मेरे कार्यालय में गौतम आएगा, उसे नगर परिषद में सफाई कर्मचारी की नौकरी दे दी जाएगी।
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सोनीपत रोड स्थित उपमंडलीय परिसर में मंगलवार को एसडीएम के समक्ष नौकरी की मांग करने पहुंचे गौतम और मां संजीत ने बताया कि गोविंदा की मौत हुए साढ़े तीन महीने का समय हो गया है। गोविंदा की मौत के बाद अधिकारियों ने उसके भाई गौतम को नौकरी देने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि गौतम को नौकरी देना तो दूर की बात अभी तक उसके बेटे के आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार तक नहीं किया है। जो भी पुलिस की टीम आती है। वह जांच करके चली जाती है। चंडीगढ़ क्राइम ब्रांच की टीम उनके बयान लेकर जा चुकी है। उनके अनुसार वह इस जांच को तीन महीने बाद आयोग के सामने पेश करेगी। संजीत ने कहा कि जांच के बाद वह आयोग के सामने पेश होंगे, लेकिन अभी वह बड़े बेटे गौतम की नौकरी के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं। मंगलवार को एसडीएम से नौकरी की गुहार लगाने आए थे, लेकिन उनके कार्यालय में न होने से कोई जवाब नहीं मिला है।
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यह था मामला
22 अक्टूबर की सुबह देवीनगर के एक मकान में गोविंदा (14) नाबालिग दलित युवक का शव संदिग्ध हालात में मिला था। आरोप था कि एएसआई सुभाष और एएसआई अशोक ने गोविंदा को पहले तो झूठे कबूतर चोरी के मामले में फंसाया और बाद में थाने में बुलाकर उसकी हत्या कर शव को उसी के ताऊ के घर में डालकर फरार हो गए। पुलिस ने एएसआई सुभाष व एएसआई अशोक के खिलाफ हत्या का मामला भी दर्ज किया था, लेकिन परिजनों ने शव का दाह संस्कार करने से मना कर दिया था। मांग थी कि दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर उनके खिलाफ एटरोसिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। घटना के एक दिन बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह परिजनों से मिलने पहुंचे थे। सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इतना ही नहीं स्पेशल एफएसएल टीम का भी गठन किया गया था। बाद में आयोग के सामने एसआईटी पुख्ता जवाब नहीं दे पाई। जिससे आयोग ने यह मामला चंडीगढ़ क्राइम ब्रांच को सौंप दिया। फिलहाल क्राइम ब्रांच ही मामले की जांच कर रही है।
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एसडीएम बोले, मेरे पास आएं, नप में नौकरी दे दी जाएगी
एसडीएम धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि मृतक गोविंदा के भाई को प्रशासन ने नौकरी देने का वायदा किया है। गौतम को नौकरी जरूर दी जाएगी, लेकिन अभी तक नौकरी के लिए उनके समक्ष नहीं आए हैं। जैसे ही मेरे कार्यालय में गौतम आएगा, उसे नगर परिषद में सफाई कर्मचारी की नौकरी दे दी जाएगी।