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कार पेड़ से टकराई, मां-मामा समेत दो बच्चों की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Tue, 29 Dec 2015 12:25 AM IST
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रोहतक-गोहाना-पानीपत नेशनल हाईवे 719-ए पर सोमवार सुबह भैंसवाल गांव के पास मोड़ पर आल्टो कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। हादसे में पैतृक गांव जौली से झज्जर जिले के गांव मारौत जा रहे एक परिवार के चार सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। एक बच्ची गंभीर रूप से घायल है,जिसे पीजीआई रोहतक में भर्ती कराया गया है।
पुलिस के मुताबिक जौली गांव निवासी अनिल (34) सेना में कार्यरत है। फिलहाल उसकी ड्यूटी चंडीगढ़ में है, जहां परिवार सहित रहता था। दो दिन पहले स्कूलों में शीतकालीन अवकाश हो गए। ऐसे में वह रविवार को ही पत्नी अंजू (30), बेटी पंकज (11), बेटे हर्ष (09) और हैप्पी (01) के साथ पैतृक गांव जौली आया था। रात को मंजू का भाई झज्जर जिले के गांव मारौत निवासी राम कार लेकर आ गया, ताकि सोमवार सुबह बहन और उसके तीनों बच्चों को घर ले जा सके। सुबह पांचों लोग कार से झज्जर के लिए रवाना हुए। गोहाना से पांच किलोमीटर दूर भैंसवाल मोड़ पर अचानक कार का संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। टक्कर में अंजू, राम, हर्ष और हैप्पी की मौके पर मौत हो गई, जबकि पंकज को राहगीरों ने किसी तरह निकाल कर पीजीआई रोहतक में भर्ती कराया।
अपनों को खोजती रहीं अनिल की आंखें
एक साथ चार मौत होने से परिवार में मातम का माहौल है। अनिल की आंखें कभी मासूम हैप्पी और हर्ष को तो कभी अंजू को ढूंढ रही हैं। अगले ही पल उसे पीजीआई में दाखिल बेटी पंकज का ख्याल आता है। अपने साले राम के परिजनों को भी बीच-बीच में ढांढस बंधाता है। शाम को सभी शव जौली लाए गए, जहां गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
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सपने ही रह गए फौजी की आंखों में
रविवार को ही अंजू पति अनिल के साथ गांव जौली आई थी। अनिल घर पर ही रह गया, जबकि राम अपनी बहन और तीनों बच्चों को कार से ननिहाल लेकर जा रहा था। उसे क्या पता था कि रास्ते में इतना बड़ा हादसा हो जाएगा। परिजनों ने बताया कि घायल 11 वर्षीय पंकज चंडीगढ़ में ही छठी कक्षा में पढ़ती है और हर्ष पांचवीं कक्षा में पढ़ता था। जबकि हैप्पी की उम्र महज एक साल रही।
जौली में हर किसी की आंख में दर्द, जुबां पर नहीं आ रहे लफ्ज
एक ही परिवार के तीन व एक रिश्तेदार की मौत होने से गांव जौली व परिवार में मातम का माहौल बना है। पूरा गांव गमगीन बना हुआ है। पूरा गांव परिवार को ढ़ांढ़स बंधाने में लगा हुआ है। अपनी बहू व पोतो की मौत के बाद दादी का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं पिता अनिल व चाचा राजेश कुछ भी नहीं बोल पा रहे हैं।
इंतजार बेटी का था आई मौत की खबर
झज्जर/बेरी। गांव मारौत में वृद्ध संतरा को अपनी बेटी व दोहते-दोहती का इंतजार था। लेकिन उनके आने की बजाय उनकी मौत की सूचना आयी। इसके बाद तो वृद्धा के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसके रूदन से गांव में मातम का माहौल छा गया। वद्धा संतरा का रो रोकर बुराहाल था और वह यह कहते हुए बार बार बेसुध हो जाती ...दोनों बेटे तो पहले ही छोड़ गए थे, अब बेटी भी नहीं रही। हादसे के बाद मारौत का यह परिवार पूरी तरह से बिखर गया है। ग्रामीण भी बेटी, दो बच्चों व चचेरे भाई की मौत से स्तब्ध हैं। गांव में जली चिता से अनके घरों के चूल्हे बुझ गए।
रोहतक-पानीपत नेशनल हाइवे 719-ए स्थित गांव भैंसवान खुर्द मोड़ के पास सोमवार सुबह आल्टो कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई। हादसे में चार लोगों ने जन गंवा दी। कार चालक युवक राहुल उर्फ राम (22) गांव मारौत का था। दूसरी मृतका अंजूबाला उसकी चचेरी बहन और दो बालक हर्ष व हैप्पी उसके भांजे। ये सभी गाड़ी में सवार होकर मारौत आ रहे थे। गांव पहुंचा तो राम का शव और बेटी व नातियों की मौत की खबर। अपनों की मौत से दो घरों में जहां कोहराम मच गया, वहीं गांव में मातम पसर गया। अंजूबाला गांव के रामकरण की इकलौती बेटी थी, तो मृतक राम रामकरण के भाई धारा के दो बेटों में से एक। घर इनके भले ही अलग अलग हों, लेकिन परिवार एक है।
अब अंजू ही थी इनके जीवन का सहारा
पहले अपने दो बेटों को और अब हादसे में बेटी व दो नातियों को खो चुके वृद्ध रामकरण की आंखों से सोमवार को आंसू नहीं थमे। जब भी बेटी का जिक्र आता तो वह फूट फूट कर रो पड़ता। रोते हुए बताया कि अंजू की शादी करीब 16 वर्ष पहले गांव जौली जिला सोनीपत में शादी हुई थी। उसका बेटा आशीष बड़ा लड़का था, उसकी शादी हो चुकी थी। जिसकी उसकी हार्टअटैक आने से मौत हो गई थी और छोटे लड़के संदीप की कैंसर से मौत हो चुकी है। अब बेटी अजूंबाला ही उनका सहारा थी, वह भी छोड़ गई। बेटे बेटी की मौत के सदमे से बड़ा बाप के लिए दूसरा कोई सदमा नहीं हो सकता। अंजू के चचेरे भाई राम का शाम के वक्त बड़े गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इसमें पूरा गांव ही उमड़ पड़ा था।
बेटे की मौत से मचा कोहराम
सड़क हादसे में राम की मौत की सूचना से उसके पिता धारा व मां शीला का भी रो रोकर बुरा हाल हो गया। आस पास के किसी भी घर में चूल्हा तक नहीं जला। जिसे भी इन मौतों का पता चला वो शोक जताने धारा व रामकरण के यहां पहुंच गए। रामकरण गांव में राशन का सरकारी डिपो चलाता है। राम के पिता धारा ने बताया कि राम रोहतक में इन्वर्टर बैटरी का कार्य करता था। गांव मारौत के सरपंच व आदि ने जाकर पीड़ितों को सांत्वना दी।
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पुलिस के मुताबिक जौली गांव निवासी अनिल (34) सेना में कार्यरत है। फिलहाल उसकी ड्यूटी चंडीगढ़ में है, जहां परिवार सहित रहता था। दो दिन पहले स्कूलों में शीतकालीन अवकाश हो गए। ऐसे में वह रविवार को ही पत्नी अंजू (30), बेटी पंकज (11), बेटे हर्ष (09) और हैप्पी (01) के साथ पैतृक गांव जौली आया था। रात को मंजू का भाई झज्जर जिले के गांव मारौत निवासी राम कार लेकर आ गया, ताकि सोमवार सुबह बहन और उसके तीनों बच्चों को घर ले जा सके। सुबह पांचों लोग कार से झज्जर के लिए रवाना हुए। गोहाना से पांच किलोमीटर दूर भैंसवाल मोड़ पर अचानक कार का संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। टक्कर में अंजू, राम, हर्ष और हैप्पी की मौके पर मौत हो गई, जबकि पंकज को राहगीरों ने किसी तरह निकाल कर पीजीआई रोहतक में भर्ती कराया।
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अपनों को खोजती रहीं अनिल की आंखें
एक साथ चार मौत होने से परिवार में मातम का माहौल है। अनिल की आंखें कभी मासूम हैप्पी और हर्ष को तो कभी अंजू को ढूंढ रही हैं। अगले ही पल उसे पीजीआई में दाखिल बेटी पंकज का ख्याल आता है। अपने साले राम के परिजनों को भी बीच-बीच में ढांढस बंधाता है। शाम को सभी शव जौली लाए गए, जहां गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
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सपने ही रह गए फौजी की आंखों में
रविवार को ही अंजू पति अनिल के साथ गांव जौली आई थी। अनिल घर पर ही रह गया, जबकि राम अपनी बहन और तीनों बच्चों को कार से ननिहाल लेकर जा रहा था। उसे क्या पता था कि रास्ते में इतना बड़ा हादसा हो जाएगा। परिजनों ने बताया कि घायल 11 वर्षीय पंकज चंडीगढ़ में ही छठी कक्षा में पढ़ती है और हर्ष पांचवीं कक्षा में पढ़ता था। जबकि हैप्पी की उम्र महज एक साल रही।
जौली में हर किसी की आंख में दर्द, जुबां पर नहीं आ रहे लफ्ज
एक ही परिवार के तीन व एक रिश्तेदार की मौत होने से गांव जौली व परिवार में मातम का माहौल बना है। पूरा गांव गमगीन बना हुआ है। पूरा गांव परिवार को ढ़ांढ़स बंधाने में लगा हुआ है। अपनी बहू व पोतो की मौत के बाद दादी का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं पिता अनिल व चाचा राजेश कुछ भी नहीं बोल पा रहे हैं।
इंतजार बेटी का था आई मौत की खबर
झज्जर/बेरी। गांव मारौत में वृद्ध संतरा को अपनी बेटी व दोहते-दोहती का इंतजार था। लेकिन उनके आने की बजाय उनकी मौत की सूचना आयी। इसके बाद तो वृद्धा के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसके रूदन से गांव में मातम का माहौल छा गया। वद्धा संतरा का रो रोकर बुराहाल था और वह यह कहते हुए बार बार बेसुध हो जाती ...दोनों बेटे तो पहले ही छोड़ गए थे, अब बेटी भी नहीं रही। हादसे के बाद मारौत का यह परिवार पूरी तरह से बिखर गया है। ग्रामीण भी बेटी, दो बच्चों व चचेरे भाई की मौत से स्तब्ध हैं। गांव में जली चिता से अनके घरों के चूल्हे बुझ गए।
रोहतक-पानीपत नेशनल हाइवे 719-ए स्थित गांव भैंसवान खुर्द मोड़ के पास सोमवार सुबह आल्टो कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई। हादसे में चार लोगों ने जन गंवा दी। कार चालक युवक राहुल उर्फ राम (22) गांव मारौत का था। दूसरी मृतका अंजूबाला उसकी चचेरी बहन और दो बालक हर्ष व हैप्पी उसके भांजे। ये सभी गाड़ी में सवार होकर मारौत आ रहे थे। गांव पहुंचा तो राम का शव और बेटी व नातियों की मौत की खबर। अपनों की मौत से दो घरों में जहां कोहराम मच गया, वहीं गांव में मातम पसर गया। अंजूबाला गांव के रामकरण की इकलौती बेटी थी, तो मृतक राम रामकरण के भाई धारा के दो बेटों में से एक। घर इनके भले ही अलग अलग हों, लेकिन परिवार एक है।
अब अंजू ही थी इनके जीवन का सहारा
पहले अपने दो बेटों को और अब हादसे में बेटी व दो नातियों को खो चुके वृद्ध रामकरण की आंखों से सोमवार को आंसू नहीं थमे। जब भी बेटी का जिक्र आता तो वह फूट फूट कर रो पड़ता। रोते हुए बताया कि अंजू की शादी करीब 16 वर्ष पहले गांव जौली जिला सोनीपत में शादी हुई थी। उसका बेटा आशीष बड़ा लड़का था, उसकी शादी हो चुकी थी। जिसकी उसकी हार्टअटैक आने से मौत हो गई थी और छोटे लड़के संदीप की कैंसर से मौत हो चुकी है। अब बेटी अजूंबाला ही उनका सहारा थी, वह भी छोड़ गई। बेटे बेटी की मौत के सदमे से बड़ा बाप के लिए दूसरा कोई सदमा नहीं हो सकता। अंजू के चचेरे भाई राम का शाम के वक्त बड़े गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इसमें पूरा गांव ही उमड़ पड़ा था।
बेटे की मौत से मचा कोहराम
सड़क हादसे में राम की मौत की सूचना से उसके पिता धारा व मां शीला का भी रो रोकर बुरा हाल हो गया। आस पास के किसी भी घर में चूल्हा तक नहीं जला। जिसे भी इन मौतों का पता चला वो शोक जताने धारा व रामकरण के यहां पहुंच गए। रामकरण गांव में राशन का सरकारी डिपो चलाता है। राम के पिता धारा ने बताया कि राम रोहतक में इन्वर्टर बैटरी का कार्य करता था। गांव मारौत के सरपंच व आदि ने जाकर पीड़ितों को सांत्वना दी।