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सिपाही-एसपीओ हत्याः हंसते खेलते हुए दोनों साथ ड्यूटी पर गए थे, कफन में लिपटकर पहुंचे घर
Wed, 01 Jul 2020 11:11 AM IST
रोहतक ब्यूरो
अमर उजाला, गोहाना(सोनीपत)
अमर उजाला, गोहाना(सोनीपत)
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2020 11:11 AM IST
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परिजनों को लेकर जाते पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
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सिपाही रविंद्र व एसपीओ कप्तान के गांव भले ही एक-दूसरे से काफी दूर हों, लेकिन उसके बाद भी दोनों के बीच अच्छी दोस्ती थी। दोनों की तैनाती भी बरोदा थाने की बुटाना चौकी में चल रही थी और दोनों ने ड्यूटी का समय भी एक साथ कराया हुआ था। जिससे दोनों दोस्त एक साथ बाइक पर घर से आते थे।
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वह दोनों सोमवार की सुबह भी एक साथ ही बाइक पर आए थे और उनको 24 घंटे की ड्यूटी करके मंगलवार सुबह वापस घर जाना था। लेकिन उनके परिजनों ने कभी सोचा भी नहीं था कि जिस तरह वह एक साथ ड्यूटी पर जाते हैं, उस तरह ही उनकी एक साथ हत्या कर दी जाएगी और उनके शव एक साथ गांवों में पहुंचेंगे।
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सिपाही रविंद्र के पिता भीम सिंह ने बताया कि उनका गांव बुढ़ा खेड़ा व एसपीओ कप्तान सिंह का गांव कलावती काफी दूर-दूर है। लेकिन रविंद्र व कप्तान की मुलाकात ड्यूटी के दौरान हुई और उन दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई। दोनों ने अपनी ड्यूटी भी बुटाना चौकी में एक साथ लगवा ली, जिससे दोनों दोस्त एक साथ घर से आ सके और वह एक साथ घर जा सके।
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उसके पिता ने बताया कि दोनों 24 घंटे की ड्यूटी करके वापस घर जाते थे और वह दोनों सोमवार सुबह को बाइक पर एक साथ ड्यूटी के लिए आए थे। वह मंगलवार सुबह को घर आने की बात कहकर गए थे, लेकिन उनको क्या पता था कि वह मंगलवार की सुबह नहीं लौटेंगे। बुढ़ा खेड़ा के सरपंच सुरेश ने बताया कि उनको मंगलवार सुबह सोनीपत से फोन करके बताया गया कि रविंद्र के पैर में गोली लगी है और वह बुटाना चौकी में मौजूद है तो वह सभी बुटाना चौकी में पहुंच जाए।
सरपंच सुरेश ने बताया कि यह सुनकर अजीब लगा कि जब पैर में गोली लगी है तो उसको अस्पताल में लेकर क्यों नहीं गए। इस तरह के विचार के साथ ही रविंद्र के परिजनों के साथ वह बुटाना चौकी पर पहुंचे, जहां रविंद्र व कप्तान के बारे में पता चलने पर सब गुमसुम हो गए। बताया कि रविंद्र अकेला ही परिवार का गुजर बसर कर रहा था तो कप्तान भी परिवार में अकेला कमाने वाला था। इस तरह दोनों दोस्तों के शव मंगलवार को गांवों में गए।