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सीआरए के पूर्व सहायक प्रोफेसर को मिला जनकवि मेहर सिंह सम्मान

Sun, 18 Dec 2016 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सोनीपत
ब्यूरो/अमर उजाला सोनीपत Updated Sun, 18 Dec 2016 12:04 AM IST
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CRA's former assistant professor got to respect Jnkvi Mehar Singh, sonipat
सीआरए के पूर्व प्रोफेसर एवं लेखक डाक्टर संतराम देशवाल। - फोटो : Bureau
प्रदेश सरकार ने सीआरए कॉलेज के पूर्व सहायक प्रोफेसर एवं लेखक डॉक्टर संतराम देशवाल को जनकवि मेहर सिंह सम्मान 2014 से नवाजा है। पत्रकारिता व लेखन के क्षेत्र में देशवाल अहम स्थान रहा है। 2004 में आई उनकी पुस्तक लोक-आलोक को 21 हजार व 2010 में हरियाणवी भाषा में कविता व गजल के तौर पर लिखी उनकी पुस्तक अनकहे दर्द को हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से 25 हजार का पुरस्कार मिल चुका है। अब हरियाणा सरकार ने उन्हें सम्मान दिया है। सम्मान की सूचना पाकर डॉ. संतराम देशवाल का दर्द फूट कर सामने आ गया।
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डॉ. संतराम ने बताया कि वे मूलरूप से झज्जर जिले के गांव खेड़का गुर्जर के रहने वाले हैं और फिलहाल सेक्टर 15 में रह रहे हैं। वह लंबे समय तक पत्रकारिता के क्षेत्र में स्वतंत्र लेखन किया।  80 के दशक में समाचार पत्रों में उनका अलग से कॉलम छपता था। 1987 में वे सीआरए कॉलेज सोनीपत में हिंदी के सहायक प्रोफेसर लग गए। 30 साल शिक्षक रहने के साथ-साथ वाले लेखन का कार्य किया। 2005 में आंगन में मोर नाचा, किसने देखा पुस्तक लिखी। इसके बाद हरियाणवी भाषा में कविता व गजल के रूप में अनकहे दर्द पुस्तक लिखी, जिसे अकादमी की ओर से 25 हजार रुपये का पुरस्कार मिला। 2014 में वह सेवानिवृत हो गए। अब साउथ प्वाइंट डिग्री कॉलेज से जुड़े हैं।
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नेताओं के चक्कर काटता तो 10 साल पहले मिल जाता ये सम्मान
देशवाल ने कहा कि पुरस्कार पाकर वे खुश हैं, क्योंकि इसके लिए उन्होंने न तो नेताओं के चक्कर काटे और न ही किसी की सिफारिश लगवाई। बकौल देशवाल वह कई सांसद को जानते थे, लेकिन उन्होंने कभी नहीं कहा कि उसे पुरस्कार चाहिए। अगर उस समय कहते तो 10 साल पहले सम्मान मिल जाता, लेकिन तय कर लिया था सिफारिश से करवाया गया सम्मान नहीं चाहिए। अब भाजपा सरकार में भी किसी को नहीं कहा। अब सरकार ने खुद ही यह सम्मान दिया है।
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