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स्वस्थ होकर घर लौटे कोरोना वॉरियर्स ने कहाः 'समाज ने ताने मारकर हौसला तोड़ना चाहा, दोस्तों और डाक्टरों के साथ से कोरोना को हराया'
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कोरोना वारियर्स एमपीएचडब्ल्यू रोहित शर्मा
- फोटो : Sonipat
अंकित चौहान
सोनीपत। लोगों को कोरोना से बचाव के लिए दिन-रात ड्यूटी करने वाले कोरोना वारियर्स एमपीएचडब्ल्यू जब खुद संक्रमण की चपेट में आया तो समाज के कुछ लोगों ने उसका हौसला तोड़ने का खूब प्रयास किया। उसके साथ ही परिवार का विरोध करते हुए ताने मारे गए, लेकिन उसने हौसला नहीं टूटने दिया। ऐसे हालात में दोस्तों व डाक्टरों ने उसका पूरा साथ दिया और वह 14 दिन बाद कोरोना को जंग में हराकर अपने घर वापस लौट आया। एमपीएचडब्ल्यू ने साफ कहा कि किसी भी पीड़ित को कोरोना कमजोर नहीं करता है, बल्कि वह समाज के ताने का पता चलने पर कमजोर होता है। इसलिए ऐसे हालात में केवल सकारात्मक सोच रखनी चाहिए और हालात का डटकर सामना करना चाहिए। वह लॉकडाउन का पूरा पालन करते हुए हर किसी को घर में रहने की बात भी कहते हैं।
सोनीपत के मोहन नगर में रहने वाले रोहित शर्मा फरीदाबाद के स्वास्थ्य विभाग में एमपीएचडब्ल्यू कार्यरत है जो इस समय डीएमओ कार्यालय में तैनात हैं। फरीदाबाद में जिन जगहों पर कोरोना के मरीज मिलते थे, उन जगहों पर सैनिटाइजेशन कराना रोहित की जिम्मेदारी थी। इसके साथ ही अस्पताल, ओपीडी व अन्य अधिकतर जगहों को सैनिटाइज कराने के लिए रोहित खुद ही जाते थे। ऐसी संक्रमण वाली जगहों पर जाने वाले कोरोना वारियर्स रोहित शर्मा ने खुद ही जांच कराने का फैसला लिया, जबकि उसमें कोरोना का कोई लक्षण नहीं था। उसे जिस समय कोरोना पॉजिटिव होने का पता चला तो वह उस समय घर में मौजूद था। वह तुरंत ही अस्पताल में पहुंच गया और उसे मेडिकल कॉलेज खानपुर में भर्ती करा दिया गया। उसके कोरोना पॉजिटिव होने का पता घर के आसपास भी लग गया, जिसके बाद समाज की प्रताड़ना उसे व परिवार को झेलनी पड़ी। परिवार को लोगों ने ताने मारने शुरू कर दिए और उनके साथ हर किसी का व्यवहार बदल गया। परिवार के लोगों ने इस बारे में रोहित को बातचीत में बताया, लेकिन उसके दोस्तों, मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों व परिवार ने उसका पूरा साथ दिया। जिससे उसने अपना हौसला नहीं टूटने दिया और वह पूरी तरह से सकारात्मक रहा। जिसका परिणाम यह निकला कि वह अब पूरी तरह से ठीक होकर अपने घर आ चुका है। रोहित शर्मा कहते हैं कि वह दूसरों को बचाने के चक्कर में कोरोना पॉजिटिव हुआ था, लेकिन उसके बाद भी समाज का उसके व परिवार के प्रति अच्छा व्यवहार नहीं रहा। इसलिए समाज को अपनी सोच बदलनी होगी तो कोरोना संक्रमण से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का हर किसी को पालन करना होगा।
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कोरोना का अभी तक कोई लक्षण नहीं दिखा
एमपीएचडब्ल्यू रोहित शर्मा ने बताया कि जब जांच कराई थी तो उस समय भी कोई लक्षण नहीं था। वह कोरोना संक्रमित जगहों पर सैनिटाइजेशन कराने गए थे, इसलिए ही अपनी जांच कराई थी। उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद से वह मेडिकल कॉलेज खानपुर में भर्ती रहे, लेकिन वहां भी कोरोना का कोई लक्षण नहीं दिखाई दिया। अब वह घर आ चुके हैं और इस समय भी पूरी तरह से सही हैं। रोहित कहते हैं कि उनमें कोरोना का कोई लक्षण नहीं दिखाई दिया।
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सोनीपत। लोगों को कोरोना से बचाव के लिए दिन-रात ड्यूटी करने वाले कोरोना वारियर्स एमपीएचडब्ल्यू जब खुद संक्रमण की चपेट में आया तो समाज के कुछ लोगों ने उसका हौसला तोड़ने का खूब प्रयास किया। उसके साथ ही परिवार का विरोध करते हुए ताने मारे गए, लेकिन उसने हौसला नहीं टूटने दिया। ऐसे हालात में दोस्तों व डाक्टरों ने उसका पूरा साथ दिया और वह 14 दिन बाद कोरोना को जंग में हराकर अपने घर वापस लौट आया। एमपीएचडब्ल्यू ने साफ कहा कि किसी भी पीड़ित को कोरोना कमजोर नहीं करता है, बल्कि वह समाज के ताने का पता चलने पर कमजोर होता है। इसलिए ऐसे हालात में केवल सकारात्मक सोच रखनी चाहिए और हालात का डटकर सामना करना चाहिए। वह लॉकडाउन का पूरा पालन करते हुए हर किसी को घर में रहने की बात भी कहते हैं।
सोनीपत के मोहन नगर में रहने वाले रोहित शर्मा फरीदाबाद के स्वास्थ्य विभाग में एमपीएचडब्ल्यू कार्यरत है जो इस समय डीएमओ कार्यालय में तैनात हैं। फरीदाबाद में जिन जगहों पर कोरोना के मरीज मिलते थे, उन जगहों पर सैनिटाइजेशन कराना रोहित की जिम्मेदारी थी। इसके साथ ही अस्पताल, ओपीडी व अन्य अधिकतर जगहों को सैनिटाइज कराने के लिए रोहित खुद ही जाते थे। ऐसी संक्रमण वाली जगहों पर जाने वाले कोरोना वारियर्स रोहित शर्मा ने खुद ही जांच कराने का फैसला लिया, जबकि उसमें कोरोना का कोई लक्षण नहीं था। उसे जिस समय कोरोना पॉजिटिव होने का पता चला तो वह उस समय घर में मौजूद था। वह तुरंत ही अस्पताल में पहुंच गया और उसे मेडिकल कॉलेज खानपुर में भर्ती करा दिया गया। उसके कोरोना पॉजिटिव होने का पता घर के आसपास भी लग गया, जिसके बाद समाज की प्रताड़ना उसे व परिवार को झेलनी पड़ी। परिवार को लोगों ने ताने मारने शुरू कर दिए और उनके साथ हर किसी का व्यवहार बदल गया। परिवार के लोगों ने इस बारे में रोहित को बातचीत में बताया, लेकिन उसके दोस्तों, मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों व परिवार ने उसका पूरा साथ दिया। जिससे उसने अपना हौसला नहीं टूटने दिया और वह पूरी तरह से सकारात्मक रहा। जिसका परिणाम यह निकला कि वह अब पूरी तरह से ठीक होकर अपने घर आ चुका है। रोहित शर्मा कहते हैं कि वह दूसरों को बचाने के चक्कर में कोरोना पॉजिटिव हुआ था, लेकिन उसके बाद भी समाज का उसके व परिवार के प्रति अच्छा व्यवहार नहीं रहा। इसलिए समाज को अपनी सोच बदलनी होगी तो कोरोना संक्रमण से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का हर किसी को पालन करना होगा।
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कोरोना का अभी तक कोई लक्षण नहीं दिखा
एमपीएचडब्ल्यू रोहित शर्मा ने बताया कि जब जांच कराई थी तो उस समय भी कोई लक्षण नहीं था। वह कोरोना संक्रमित जगहों पर सैनिटाइजेशन कराने गए थे, इसलिए ही अपनी जांच कराई थी। उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद से वह मेडिकल कॉलेज खानपुर में भर्ती रहे, लेकिन वहां भी कोरोना का कोई लक्षण नहीं दिखाई दिया। अब वह घर आ चुके हैं और इस समय भी पूरी तरह से सही हैं। रोहित कहते हैं कि उनमें कोरोना का कोई लक्षण नहीं दिखाई दिया।
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