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एआई के दौर में कोडिंग बड़ा हथियार : कुलपति
Tue, 07 Oct 2025 01:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 07 Oct 2025 01:21 AM IST
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फोटो 02- सोनीपत के मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में कोड
सोनीपत। कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि आईटी सेक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते दौर में कोडिंग सबसे बड़ा हथियार है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में जिनको कोडिंग का ज्ञान होगा वही सबसे आगे रहेगा।
यह जानकारी उन्होेंने मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग की ओर से आयोजित कोडिंग प्रतियोगिता के दौरान दी।
कुलपति ने कहा कि कोडिंग आज सिर्फ कंप्यूटर की भाषा नहीं बल्कि आने वाले भविष्य की पहचान बन चुकी है। जिस तरह पढ़ना-लिखना साक्षरता की निशानी माना जाता है उसी तरह कोडिंग डिजिटल युग की नई साक्षरता बन रही है।
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युवा कोडिंग के माध्यम से न केवल कंप्यूटर को निर्देश देना सीखते हैं बल्कि अपनी कल्पनाओं को हकीकत का रूप भी देते हैं। आज स्कूलों में कोडिंग को शुरुआती कक्षाओं से पढ़ाया जाने लगा है। इससे बच्चों में तार्किक सोच, रचनात्मकता, समस्या सुलझाने की क्षमता विकसित हो रही है।
उन्होंने कहा कि कई बच्चे अपने कोडिंग कौशल से एप, गेम बना रहे हैं। वहीं, युवा स्टार्टअप व नई तकनीकों के जरिए दुनियाभर में पहचान बना रहे हैं। विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सुखदीप सिंह ने विजेताओं को सम्मानित किया। विद्यार्थियों को भविष्य में ऐसी प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रेरित किया।
इस दौरान प्रतियोगिता दो चरणों में हुई जिसमें 55 टीमों ने तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में प्रोग्रामिंग, तार्किक सोच व नवाचार को बढ़ावा देना रहा।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अजमेर सिंह, डॉ. नीतू वर्मा, समन्वयक आदित्य अग्रवाल, रचित गोयल रहे। निर्णायक मंडल की भूमिका डॉ. दिनेश, डॉ. सुमन सांगवान, डॉ. सुमन देशवाल, डॉ. अनीता, डॉ. परविंद्र सिंह, डॉ. अमिता ने निभाई।
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यह जानकारी उन्होेंने मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग की ओर से आयोजित कोडिंग प्रतियोगिता के दौरान दी।
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कुलपति ने कहा कि कोडिंग आज सिर्फ कंप्यूटर की भाषा नहीं बल्कि आने वाले भविष्य की पहचान बन चुकी है। जिस तरह पढ़ना-लिखना साक्षरता की निशानी माना जाता है उसी तरह कोडिंग डिजिटल युग की नई साक्षरता बन रही है।
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युवा कोडिंग के माध्यम से न केवल कंप्यूटर को निर्देश देना सीखते हैं बल्कि अपनी कल्पनाओं को हकीकत का रूप भी देते हैं। आज स्कूलों में कोडिंग को शुरुआती कक्षाओं से पढ़ाया जाने लगा है। इससे बच्चों में तार्किक सोच, रचनात्मकता, समस्या सुलझाने की क्षमता विकसित हो रही है।
उन्होंने कहा कि कई बच्चे अपने कोडिंग कौशल से एप, गेम बना रहे हैं। वहीं, युवा स्टार्टअप व नई तकनीकों के जरिए दुनियाभर में पहचान बना रहे हैं। विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सुखदीप सिंह ने विजेताओं को सम्मानित किया। विद्यार्थियों को भविष्य में ऐसी प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रेरित किया।
इस दौरान प्रतियोगिता दो चरणों में हुई जिसमें 55 टीमों ने तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में प्रोग्रामिंग, तार्किक सोच व नवाचार को बढ़ावा देना रहा।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अजमेर सिंह, डॉ. नीतू वर्मा, समन्वयक आदित्य अग्रवाल, रचित गोयल रहे। निर्णायक मंडल की भूमिका डॉ. दिनेश, डॉ. सुमन सांगवान, डॉ. सुमन देशवाल, डॉ. अनीता, डॉ. परविंद्र सिंह, डॉ. अमिता ने निभाई।