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Sonipat News: कमरे में हीटर व अंगीठी जलाने से हो सकता है बड़ा हादसा
Tue, 07 Jan 2025 02:34 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 07 Jan 2025 02:34 AM IST
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गोहाना। सर्दी से बचने के लिए बंद कमरे में अंगीठी का प्रयोग जानलेवा हो सकता है। अंगीठी में कोयले या लकड़ी को जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड सहित कई जहरीली गैसें निकलती हैं जो सांसों के लिए संकट बन सकती है। अंगीठी ही नहीं रूम हीटर भी बंद कमरे में जहरीली गैसें बना देते हैं। सर्दी से बचने के लिए रूम हीटर व अंगीठी जलाने के दौरान सावधानियां बरतना जरूरी हैं। उपमंडल नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डाॅ. संजय छिक्कारा ने बताया कि बंद कमरे में हीटर, ब्लोअर या अंगीठी जलाने से गर्मी बढ़ने से धीरे-धीरे कमरे में ऑक्सीजन खत्म हो जाती है और कार्बन मोनोऑक्साइड अत्यधिक बढ़ जाती है। यह गैस सांस के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंच कर खून में मिल जाती है। इससे खून में हीमोग्लोबिन का स्तर घट जाता है, जिससे व्यक्ति की मौत हो जाती है। उन्होंने बताया कि सर्दी से बचने के लिए यदि ब्लोअर या हीटर का प्रयोग करते हैं तो इसे थोड़े समय के लिए ही करें। गर्म कमरे से एकाएक बाहर जाने पर बीमार पड़ सकते हैं। ऐसे में हीटर से हटकर कुछ देर समय गुजारें, तब बाहर जाएं।
अंगीठी व हीटर से ऐसे बढ़ती है परेशानी
बंद कमरे में कोयला जल रहा है तो इससे वातावरण में कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। यह गैस दिमाग पर सीधा असर डालती है और सांसों के जरिए शरीर के अंदर पहुंच जाती है। दिमाग पर असर पड़ने से कमरे में सो रहा व्यक्ति बेहोश हो सकता है। रक्त में यह कार्बन घुलकर धीरे-धीरे ऑक्सीजन कम कर देता है। वहीं, ब्लोअर या हीटर जलाने से कमरे का तापमान बढ़ जाता है और नमी का स्तर कम हो जाता है। इससे जो लोग स्वस्थ हैं उन्हें भी सांस संबंधी कई समस्याएं हो सकती हैं। सांस के मरीज के लिए यह बेहद खतरनाक है।
सोनीपत में अंगीठी जलाने से हो चुके हैं हादसे
-31 दिसंबर, 2019 की रात को कुमासपुर में कमरे के अंदर अंगीठी जलाने से मूलरूप से बिहार की महिला व उसकी एक साल की बेटी की मौत हो गई थी।
-27 नवंबर, 2018 को गांव रामनगर के पास एक निर्माणाधीन फैक्टरी में अंगीठी जलाकर सोए बिहार के चार मजदूरों की मौत हो गई थी।
-जनवरी, 2016 में खरखौदा के दिल्ली चौक के पास कमरे में अंगीठी जलाकर सोने से दंपती व उनके पोते की मौत हो गई थी।
घर में वेंटिलेशन हो तभी हीटर या ब्लोअर चलाएं। अंगीठी पर अगर कोई खाना बनाता है तो सोने से पहले उसे बुझा देना चाहिए। सांस व किडनी के मरीज अंगीठी का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।
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- डाॅ. संजय छिक्कारा, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, उपमंडल नागरिक अस्पताल
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अंगीठी व हीटर से ऐसे बढ़ती है परेशानी
बंद कमरे में कोयला जल रहा है तो इससे वातावरण में कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। यह गैस दिमाग पर सीधा असर डालती है और सांसों के जरिए शरीर के अंदर पहुंच जाती है। दिमाग पर असर पड़ने से कमरे में सो रहा व्यक्ति बेहोश हो सकता है। रक्त में यह कार्बन घुलकर धीरे-धीरे ऑक्सीजन कम कर देता है। वहीं, ब्लोअर या हीटर जलाने से कमरे का तापमान बढ़ जाता है और नमी का स्तर कम हो जाता है। इससे जो लोग स्वस्थ हैं उन्हें भी सांस संबंधी कई समस्याएं हो सकती हैं। सांस के मरीज के लिए यह बेहद खतरनाक है।
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सोनीपत में अंगीठी जलाने से हो चुके हैं हादसे
-31 दिसंबर, 2019 की रात को कुमासपुर में कमरे के अंदर अंगीठी जलाने से मूलरूप से बिहार की महिला व उसकी एक साल की बेटी की मौत हो गई थी।
-27 नवंबर, 2018 को गांव रामनगर के पास एक निर्माणाधीन फैक्टरी में अंगीठी जलाकर सोए बिहार के चार मजदूरों की मौत हो गई थी।
-जनवरी, 2016 में खरखौदा के दिल्ली चौक के पास कमरे में अंगीठी जलाकर सोने से दंपती व उनके पोते की मौत हो गई थी।
घर में वेंटिलेशन हो तभी हीटर या ब्लोअर चलाएं। अंगीठी पर अगर कोई खाना बनाता है तो सोने से पहले उसे बुझा देना चाहिए। सांस व किडनी के मरीज अंगीठी का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।
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- डाॅ. संजय छिक्कारा, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, उपमंडल नागरिक अस्पताल