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Sonipat News: हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती मनाई
Sat, 29 Aug 2026 07:10 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 29 Aug 2026 07:10 PM IST
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फोटो - शहीद मदनलाल ढींगरा स्टेडियम में मेजर ध्यानचंद को नमन करते हुए संगठन के सदस्य। स्रोत - प्
गोहाना। आदर्श नगर स्थित शहीद मदनलाल ढींगरा खेल स्टेडियम में शनिवार को आजाद हिंद देशभक्त मोर्चा के सदस्यों ने राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती मनाई। कार्यक्रम में मेजर ध्यानचंद के जीवन, खेल उपलब्धियों और देश के प्रति उनके योगदान को याद किया गया।
मुख्य वक्ता आजाद डांगी ने कहा कि भारत में हर वर्ष 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। यह दिन हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती को समर्पित है। उन्होंने बताया कि मेजर ध्यानचंद मात्र 16 वर्ष की आयु में सेना में भर्ती हुए थे। सेना में रहते हुए हॉकी के प्रति उनका जुनून बढ़ता गया। उन्होंने करीब 22 वर्षों तक भारत का प्रतिनिधित्व किया और अंतरराष्ट्रीय हॉकी में 400 से अधिक गोल किए। उनकी असाधारण खेल प्रतिभा के कारण उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहा जाता है।
आजाद डांगी ने बताया कि वर्ष 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भारतीय टीम ने जर्मनी को फाइनल में हराकर स्वर्ण पदक जीता था। उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने उन्हें सेना में बड़ा पद देने की पेशकश की, लेकिन ध्यानचंद ने इसे ठुकरा दिया।
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इस अवसर पर दलवीर, मुकेश सैनी, पवन धीमान, सोमपाल, जय भगवान, बलवान शास्त्री, नरेंद्र, संजय गोयल, पंकज सैनी, वीरेंद्र पूनिया और सर्वेश सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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मुख्य वक्ता आजाद डांगी ने कहा कि भारत में हर वर्ष 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। यह दिन हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती को समर्पित है। उन्होंने बताया कि मेजर ध्यानचंद मात्र 16 वर्ष की आयु में सेना में भर्ती हुए थे। सेना में रहते हुए हॉकी के प्रति उनका जुनून बढ़ता गया। उन्होंने करीब 22 वर्षों तक भारत का प्रतिनिधित्व किया और अंतरराष्ट्रीय हॉकी में 400 से अधिक गोल किए। उनकी असाधारण खेल प्रतिभा के कारण उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहा जाता है।
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आजाद डांगी ने बताया कि वर्ष 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भारतीय टीम ने जर्मनी को फाइनल में हराकर स्वर्ण पदक जीता था। उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने उन्हें सेना में बड़ा पद देने की पेशकश की, लेकिन ध्यानचंद ने इसे ठुकरा दिया।
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इस अवसर पर दलवीर, मुकेश सैनी, पवन धीमान, सोमपाल, जय भगवान, बलवान शास्त्री, नरेंद्र, संजय गोयल, पंकज सैनी, वीरेंद्र पूनिया और सर्वेश सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।