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बैंक अधिकारियों की गलती से कथूरा में किसान हुआ शर्मसार
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Sat, 28 Nov 2015 12:05 AM IST
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बैंक अधिकारियों की गलती के चलते कथूरा गांव में एक किसान परिवार बेवजह शर्मसार हो गया। ऋण नहीं चुकाने के आरोप पर बैंक ने न केवल गांव में उसकी जमीन नीलामी करने की मुनादी करा दी बल्कि शुक्रवार को तहसीलदार को साथ लेकर जमीन नीलाम करने भी पहुंच गए। जब प्रशासन और बैंक अधिकारियों को कागजात दिखाए, तब टीम वापस लौटी। बैंक के रवैये को लेकर ग्रामीणों में गहरा रोष है।
भाकियू नेता सत्यवान नरवाल ने बताया कि कथूरा निवासी खेलसिंह ने 1999 में पानीपत जिले के गांव अहर-कुराना स्थित एसबीआई बैंक की ब्रांच से चार लाख और करतार सिंह ने 2004 में उसी ब्रांच से दो लाख के रुपये करीब ऋण लिया था। बैंक ने अपने स्तर पर कार्रवाई करते हुए अदालत में खेल सिंह की 10 कैनाल और करतार की 8 कैनाल जमीन की बोली कराने के लिए अदालत से अनुमति मांगी। अदालत की अनुमति के बाद शुक्रवार को बैंक अधिकारियों की टीम गोहाना के तहसीलदार को साथ लेकर गांव पहुंची और नीलामी के लिए मुनादी करा दी। तब किसान करतार सिंह ने प्रशासन और बैंक अधिकारियों को बताया कि वह तो अपनी ऋण की राशि पहले ही जमा करा चुका है। अधिकारियों ने ब्रांच से संपर्क कर जांच पड़ताल की। इसके बाद टीम बैरंग लौट गई। किसान सोमवीर, रवींद्र, तेजवीर, रघुवीर, बलजीत, सोनू, सुल्तान और कप्तान सिंह का कहना है कि बैंक अधिकारियों को पहले अपना रिकॉर्ड की जांच करके आना चाहिए था। इस तरह मुनादी से गांव में किसान की मानहानि हुई है।
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भाकियू नेता सत्यवान नरवाल ने बताया कि कथूरा निवासी खेलसिंह ने 1999 में पानीपत जिले के गांव अहर-कुराना स्थित एसबीआई बैंक की ब्रांच से चार लाख और करतार सिंह ने 2004 में उसी ब्रांच से दो लाख के रुपये करीब ऋण लिया था। बैंक ने अपने स्तर पर कार्रवाई करते हुए अदालत में खेल सिंह की 10 कैनाल और करतार की 8 कैनाल जमीन की बोली कराने के लिए अदालत से अनुमति मांगी। अदालत की अनुमति के बाद शुक्रवार को बैंक अधिकारियों की टीम गोहाना के तहसीलदार को साथ लेकर गांव पहुंची और नीलामी के लिए मुनादी करा दी। तब किसान करतार सिंह ने प्रशासन और बैंक अधिकारियों को बताया कि वह तो अपनी ऋण की राशि पहले ही जमा करा चुका है। अधिकारियों ने ब्रांच से संपर्क कर जांच पड़ताल की। इसके बाद टीम बैरंग लौट गई। किसान सोमवीर, रवींद्र, तेजवीर, रघुवीर, बलजीत, सोनू, सुल्तान और कप्तान सिंह का कहना है कि बैंक अधिकारियों को पहले अपना रिकॉर्ड की जांच करके आना चाहिए था। इस तरह मुनादी से गांव में किसान की मानहानि हुई है।
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