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कार्यालय खुलते ही फसल खराबे की 338 शिकायत आईं
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सोनीपत। तीन दिन तक हुई बारिश से किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा है। छुट्टी के बाद मंगलवार को कृषि विभाग का कार्यालय खुलते ही किसान फसल खराब होने की शिकायत लेकर पहुंचे। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 338 किसानों ने फसल खराब होने की शिकायत दी है। मंगलवार शाम तक सोनीपत उपमंडल क्षेत्र के 166 और गोहाना खंड के 172 किसानों ने शिकायत दी है।
पश्चिमी विक्षोभ के चलते जिले में शुक्रवार, शनिवार और रविवार सुबह आठ बजे तक रुक-रुककर झमाझम बारिश हुई थी। जिसकी वजह से जिले के अधिकतर क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। बारिश का असर खरीफ सीजन की फसलों पर भी पड़ा है। खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान, बाजरा, कपास, मक्का और यहां तक की गन्ने के खेतों में भी जलभराव हो गया है। ऐसे में फसलों को काफी नुकसान हो सकता है। सोनीपत जिले में तीन दिनों में औसतन 105 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को बरसात थमने के 72 घंटे के अंदर अपनी शिकायत दर्ज करानी पड़ती है। कृषि विभाग के सर्वे के अनुसार सोनीपत जिले में 6 हजार एकड़ भूमि में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। जलभराव के कारण किसानों को खरीफ सीजन की फसलों के उत्पादन में 20 से 25 फीसदी तक नुकसान झेलना पड़ सकता है। गनीमत रही कि बरसात के साथ तेज हवाएं नहीं चली अन्यथा नुकसान का आंकड़ा 50 से 60 फीसदी तक पहुंच सकता था। विशेषज्ञों की मानें तो बारिश और जलभराव की स्थिति से फसलों में हुए नुकसान का सही अंदाजा सप्ताहभर के बाद ही लगाया जा सकता है। अगले एक या दो दिनों में जलभराव का असर फसलों पर दिखाई देना शुरू होगा।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल खराब होने पर किसानों को 72 घंटे के अंदर अपनी शिकायत दर्ज करानी होती है। मंगलवार शाम तक करीब 338 शिकायत आ चुकी है। किसान बुधवार को भी अपनी शिकायत कृषि विभाग कार्यालय में दर्ज करा सकते हैं। किसान जल्द से जल्द खेत में पानी निकासी की व्यवस्था करें, ताकि अधिक नुकसान होने से रोका जा सके।- डॉ.अनिल सहरावत, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत
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पश्चिमी विक्षोभ के चलते जिले में शुक्रवार, शनिवार और रविवार सुबह आठ बजे तक रुक-रुककर झमाझम बारिश हुई थी। जिसकी वजह से जिले के अधिकतर क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। बारिश का असर खरीफ सीजन की फसलों पर भी पड़ा है। खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान, बाजरा, कपास, मक्का और यहां तक की गन्ने के खेतों में भी जलभराव हो गया है। ऐसे में फसलों को काफी नुकसान हो सकता है। सोनीपत जिले में तीन दिनों में औसतन 105 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को बरसात थमने के 72 घंटे के अंदर अपनी शिकायत दर्ज करानी पड़ती है। कृषि विभाग के सर्वे के अनुसार सोनीपत जिले में 6 हजार एकड़ भूमि में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। जलभराव के कारण किसानों को खरीफ सीजन की फसलों के उत्पादन में 20 से 25 फीसदी तक नुकसान झेलना पड़ सकता है। गनीमत रही कि बरसात के साथ तेज हवाएं नहीं चली अन्यथा नुकसान का आंकड़ा 50 से 60 फीसदी तक पहुंच सकता था। विशेषज्ञों की मानें तो बारिश और जलभराव की स्थिति से फसलों में हुए नुकसान का सही अंदाजा सप्ताहभर के बाद ही लगाया जा सकता है। अगले एक या दो दिनों में जलभराव का असर फसलों पर दिखाई देना शुरू होगा।
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल खराब होने पर किसानों को 72 घंटे के अंदर अपनी शिकायत दर्ज करानी होती है। मंगलवार शाम तक करीब 338 शिकायत आ चुकी है। किसान बुधवार को भी अपनी शिकायत कृषि विभाग कार्यालय में दर्ज करा सकते हैं। किसान जल्द से जल्द खेत में पानी निकासी की व्यवस्था करें, ताकि अधिक नुकसान होने से रोका जा सके।- डॉ.अनिल सहरावत, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत
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