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Sonipat News: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आगमन से पहले आंदोलन कर रहे सरपंच पुलिस हिरासत में
Tue, 14 Feb 2023 02:38 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 14 Feb 2023 02:38 PM IST
सार
सरपंचों के धरने का नेतृत्व कर रहे जिला पार्षद संजय बड़वासनी ने कहा कि ई-टेंडरिंग व राइट टू रिकॉल के विरोध में सरपंच एक माह से धरने पर बैठे हुए हैं। सरकार के इन नियमों के विरोध में सरपंचों को केंद्रीय गृह मंत्री से मिलने मुरथल विश्वविद्यालय में पहुंचना था।
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सरपंचों को हिरासत में लेती पुलिस।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
विस्तार
सोनीपत के मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आएंगे। उनसे मिलने जा रहे आंदोलनरत सरपंचों को पुलिस की ओर से हिरासत में लिया गया। सरपंच मंगलवार को सेक्टर-15 स्थित राई से विधायक मोहनलाल बड़ौली के आवास पर धरना दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने काले झंडे लेकर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
सरपंचों के धरने का नेतृत्व कर रहे जिला पार्षद संजय बड़वासनी ने कहा कि ई-टेंडरिंग व राइट टू रिकॉल के विरोध में सरपंच एक माह से धरने पर बैठे हुए हैं। सरकार के इन नियमों के विरोध में सरपंचों को केंद्रीय गृह मंत्री से मिलने मुरथल विश्वविद्यालय में पहुंचना था, लेकिन पुलिस कर्मियों ने विधायक आवास के बाहर धरना स्थल से मुरथल विश्वविद्यालय में जा रहे सरपंचों को हिरासत में लिया है। सरपंचों की मांगों को दबाने की कोशिश की जा रही है। जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया गया है। पुलिस प्रशासन की ओर से सरपंचों की सुनवाई नहीं हो रही है। उनकी मांग है कि ई-टेंडरिंग व राइट टू रिकॉल को वापस लिया जाए।
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सरपंचों के धरने का नेतृत्व कर रहे जिला पार्षद संजय बड़वासनी ने कहा कि ई-टेंडरिंग व राइट टू रिकॉल के विरोध में सरपंच एक माह से धरने पर बैठे हुए हैं। सरकार के इन नियमों के विरोध में सरपंचों को केंद्रीय गृह मंत्री से मिलने मुरथल विश्वविद्यालय में पहुंचना था, लेकिन पुलिस कर्मियों ने विधायक आवास के बाहर धरना स्थल से मुरथल विश्वविद्यालय में जा रहे सरपंचों को हिरासत में लिया है। सरपंचों की मांगों को दबाने की कोशिश की जा रही है। जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया गया है। पुलिस प्रशासन की ओर से सरपंचों की सुनवाई नहीं हो रही है। उनकी मांग है कि ई-टेंडरिंग व राइट टू रिकॉल को वापस लिया जाए।
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