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पांच महीने बाद आकर बेटी की शादी करूंगा कहकर गया था नरेश

Wed, 26 Apr 2017 12:07 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला सोनीपत
ब्यूरो अमर उजाला सोनीपत Updated Wed, 26 Apr 2017 12:07 AM IST
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after five month come back to got marriage daughter
नक्सली हमले में शहीद हुए नरेश के परिजन विलाप करते - फोटो : amarujala beuro
बेटी की शादी धूमधाम से करके उसे विदा करना हर मां-बाप का सपना होता है। यही सपना छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए नरेश कुमार ने देखा था। वह 18 दिन पहले जब घर से छुट्टी काटकर वापस छत्तीसगढ़ ड्यूटी पर गए थे तो परिवार वालों से वादा किया था कि पांच महीने बाद आकर बेटी की शादी करूंगा। नरेश ने बेटी के लिए लड़का भी देख रखा था। बस शादी पक्की करनी बाकी थी, लेकिन नरेश इससे पहले ही शहीद हो गए।
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फोन पर कहते थे, इस बार कई काम निपटाने हैं : राजबाला
नरेश के परिवार वालों ने बताया कि वह 26 फरवरी को सात अप्रैल तक की छुट्टी लेकर घर आए थे। वह सात अप्रैल को वापस जाने लगे तो कहा था कि वह पांच महीने बाद फिर छुट्टी लेकर आएगा क्योंकि इस बार बेटी की शादी करनी है। इसके लिए लड़का देखा हुआ है, लेकिन शादी पक्की करनी है और उसकी तैयारियां भी करनी हैं। इसके लिए काफी समय लगेगा और वह दो महीने की छुट्टी लेकर आएगा, जिससे बेटी की शादी आराम से कराकर वह देश की सेवा बखूबी से कर सके। शहीद की पत्नी राजबाला ने बताया कि वह घर में जब भी फोन करते थे तो यही बात कहते थे कि इस बार छुट्टी पर आकर कई काम निपटाने हैं। उसके साथ परिवार वालों की रविवार को 11 बजे आखिरी बार बात हुई और उसने गेहूं की फसल से लेकर बच्चों के एडमिशन के बारे में पत्नी राजबाला से पूछा था। उनके बीच लगभग आधा घंटे तक बात हुई और उसके बाद सोमवार को दोबारा बात करने के लिए कहा गया। नरेश के पास पत्नी राजबाला ने सोमवार को फोन मिलाया तो वह स्विच ऑफ आया, जिससे उसकी चिंता बढ़ गई, क्योंकि उनको पता था कि छत्तीसगढ़ में नक्सली हमला हुआ है। मंगलवार सुबह लगभग चार बजे नरेश के शहीद होने की सूचना घर पहुंची। इसके बाद से परिजनों की आंखों से आंसू थम नहीं रहे हैं।
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बेटी की शादी धूमधाम से करके उसे विदा करना हर मां-बाप का सपना होता है। यही सपना छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए नरेश कुमार ने देखा था। वह 18 दिन पहले जब घर से छुट्टी काटकर वापस छत्तीसगढ़ ड्यूटी पर गए थे तो परिवार वालों से वादा किया था कि पांच महीने बाद आकर बेटी की शादी करूंगा। नरेश ने बेटी के लिए लड़का भी देख रखा था। बस शादी पक्की करनी बाकी थी, लेकिन नरेश इससे पहले ही शहीद हो गए।
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फोन पर कहते थे, इस बार कई काम निपटाने हैं : राजबाला
नरेश के परिवार वालों ने बताया कि वह 26 फरवरी को सात अप्रैल तक की छुट्टी लेकर घर आए थे। वह सात अप्रैल को वापस जाने लगे तो कहा था कि वह पांच महीने बाद फिर छुट्टी लेकर आएगा क्योंकि इस बार बेटी की शादी करनी है। इसके लिए लड़का देखा हुआ है, लेकिन शादी पक्की करनी है और उसकी तैयारियां भी करनी हैं। इसके लिए काफी समय लगेगा और वह दो महीने की छुट्टी लेकर आएगा, जिससे बेटी की शादी आराम से कराकर वह देश की सेवा बखूबी से कर सके। शहीद की पत्नी राजबाला ने बताया कि वह घर में जब भी फोन करते थे तो यही बात कहते थे कि इस बार छुट्टी पर आकर कई काम निपटाने हैं। उसके साथ परिवार वालों की रविवार को 11 बजे आखिरी बार बात हुई और उसने गेहूं की फसल से लेकर बच्चों के एडमिशन के बारे में पत्नी राजबाला से पूछा था। उनके बीच लगभग आधा घंटे तक बात हुई और उसके बाद सोमवार को दोबारा बात करने के लिए कहा गया। नरेश के पास पत्नी राजबाला ने सोमवार को फोन मिलाया तो वह स्विच ऑफ आया, जिससे उसकी चिंता बढ़ गई, क्योंकि उनको पता था कि छत्तीसगढ़ में नक्सली हमला हुआ है। मंगलवार सुबह लगभग चार बजे नरेश के शहीद होने की सूचना घर पहुंची। इसके बाद से परिजनों की आंखों से आंसू थम नहीं रहे हैं।
पिता का फर्ज पूरा करेंगे, देश की करेंगे सेवा
नरेश भले ही नक्सली हमले में शहीद हो गए हों, लेकिन उनके बेटों का जज्बा कम नहीं हुआ है। वह अपने पिता का देश सेवा का फर्ज पूरा करने की बात कहते हैं। दोनों बेटे प्रीतम और प्रिंस कहते हैं कि वह पिता की तरह देश सेवा करना चाहते हैं। देश सेवा का मौका हर किसी को नहीं मिलता है। दोनों बेटे प्रीतम व प्रिंस भले ही अभी सीआरपीएफ या सेना के बारे में ज्यादा नहीं जानते हों, लेकिन वह अपने पिता की तरह बनना चाहते हैं।
जिले में तीन मंत्री, शहीद के घर एक भी नहीं पहुंचा
शहीद नरेश के परिवार वालों का दर्द उस समय दोगुना हो गया, जब जिले में मंगलवार को दो केंद्रीय मंत्रियों के अलावा एक प्रदेश की कैबिनेट मंत्री मौजूद रहीं, लेकिन शहीद के घर तक किसी ने जाने की जरूरत नहीं समझी। प्रशासनिक अधिकारी भी वहां तक नहीं पहुंचे और केवल एडीसी ने वहां पहुंचकर खानापूर्ति कर दी। शहीद नरेश के गांव से चंद किमी दूर ही केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, केंद्र में राज्यमंत्री सीआर चौधरी पहुंचे थे। इनमें से रामविलास पासवान ने राई औद्योगिक क्षेत्र में लैब का उद्घाटन किया तो सीआर चौधरी ने गन्नौर मंडी का निरीक्षण किया। वहीं, रामविलास पासवान के साथ प्रदेश की कैबिनेट मंत्री कविता जैन भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं। इसके बावजूद किसी भी मंत्री ने शहीद के घर जाकर परिवार वालों को सांत्वना देने की जरूरत नहीं समझी।
परिवार को मदद व नौकरी की उठी मांग, गांव में स्मारक भी बने
सरपंच पति सुनील व नरेश के ममेरे भाई राजेंद्र ने मांग उठाई है कि सरकार को नरेश की पत्नी व बच्चों को आर्थिक मदद के अलावा सरकारी नौकरी देनी चाहिए। इसके अलावा नरेश की बड़ी बेटी की शादी के लिए अलग से आर्थिक मदद दी जाए। सरपंच पति सुनील कुमार का कहना है कि नरेश देश के लिए शहीद हुआ है और ऐसे में सरकार को गांव में नरेश के नाम पर शहीद स्मारक व प्रवेश द्वार बनवाना चाहिए। इसके लिए वह खुद भी प्रस्ताव भेजेंगे।
नरेश भले ही नक्सली हमले में शहीद हो गए हों, लेकिन उनके बेटों का जज्बा कम नहीं हुआ है। वह अपने पिता का देश सेवा का फर्ज पूरा करने की बात कहते हैं। दोनों बेटे प्रीतम और प्रिंस कहते हैं कि वह पिता की तरह देश सेवा करना चाहते हैं। देश सेवा का मौका हर किसी को नहीं मिलता है। दोनों बेटे प्रीतम व प्रिंस भले ही अभी सीआरपीएफ या सेना के बारे में ज्यादा नहीं जानते हों, लेकिन वह अपने पिता की तरह बनना चाहते हैं।
जिले में तीन मंत्री, शहीद के घर एक भी नहीं पहुंचा
शहीद नरेश के परिवार वालों का दर्द उस समय दोगुना हो गया, जब जिले में मंगलवार को दो केंद्रीय मंत्रियों के अलावा एक प्रदेश की कैबिनेट मंत्री मौजूद रहीं, लेकिन शहीद के घर तक किसी ने जाने की जरूरत नहीं समझी। प्रशासनिक अधिकारी भी वहां तक नहीं पहुंचे और केवल एडीसी ने वहां पहुंचकर खानापूर्ति कर दी। शहीद नरेश के गांव से चंद किमी दूर ही केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, केंद्र में राज्यमंत्री सीआर चौधरी पहुंचे थे। इनमें से रामविलास पासवान ने राई औद्योगिक क्षेत्र में लैब का उद्घाटन किया तो सीआर चौधरी ने गन्नौर मंडी का निरीक्षण किया। वहीं, रामविलास पासवान के साथ प्रदेश की कैबिनेट मंत्री कविता जैन भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं। इसके बावजूद किसी भी मंत्री ने शहीद के घर जाकर परिवार वालों को सांत्वना देने की जरूरत नहीं समझी।

परिवार को मदद व नौकरी की उठी मांग, गांव में स्मारक भी बने
सरपंच पति सुनील व नरेश के ममेरे भाई राजेंद्र ने मांग उठाई है कि सरकार को नरेश की पत्नी व बच्चों को आर्थिक मदद के अलावा सरकारी नौकरी देनी चाहिए। इसके अलावा नरेश की बड़ी बेटी की शादी के लिए अलग से आर्थिक मदद दी जाए। सरपंच पति सुनील कुमार का कहना है कि नरेश देश के लिए शहीद हुआ है और ऐसे में सरकार को गांव में नरेश के नाम पर शहीद स्मारक व प्रवेश द्वार बनवाना चाहिए। इसके लिए वह खुद भी प्रस्ताव भेजेंगे।
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