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Sonipat News: 72 वर्ष बाद चार महासंयोग में मनाई जाएगी महाशिवरात्रि

Tue, 05 Mar 2024 11:09 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Tue, 05 Mar 2024 11:09 PM IST
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After 72 years, Mahashivratri will be celebrated in four great coincidences.
सोनीपत। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को चार महासंयोग में महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। यह महासंयोग 72 वर्ष बाद बन रहा है। इसमें सर्वार्थ सिद्धि, अद्भुत शिव योग, सिद्ध योग और चतुर्ग्रही योग का संयोग बन रहा है। साथ ही शुक्र प्रदोष व्रत भी पड़ रहा है जो मां लक्ष्मी को समर्पित है। श्रवण नक्षत्र होने से यह दिन ओर भी फलदायी बन गया है। इस महासंयोग में भगवान शिव की पूजा आराधना फलदायी रहेगी।
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ज्योतिषाचार्य पं. मनमोहन मिश्रा ने बताया कि मार्च का पूरा माह शिव पूजा के लिए विशेष है। आठ मार्च को महाशिवरात्रि है। यह माह विवाह से लेकर मुंडन तक लिए शुभ है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था। इस कारण इस दिन को अबूझ मुहूर्तों में से एक माना जाता है। विधि विधान से भगवान शिव का व्रत व पूजन करने से परम सिद्धि प्राप्त होगी। इस दिन शिव स्तुति, शिव चालीसा, रुद्राष्टक, शिवपुराण का पाठ के साथ ही शिवलिंग की पूजा करना शुभ माना जाता है। शिवपुराण में बताया गया है कि जो लोग विवाहित हैं उन्हें अपने जीवनसाथी के साथ विधि-विधान से शिवरात्रि की पूजा करनी चाहिए। शिवजी की पूजा प्रदोष काल में की जाती है।
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चार पहर की पूजा महत्वपूर्ण

महाशिवरात्रि पर चार पहर की पूजा अधिक महत्वपूर्ण है। माना जाता है कि चार पहर की पूजा करने से व्यक्ति जीवन भर के पापों से मुक्त हो जाता है और धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि के दिन शाम से शुरू होकर अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त तक चार घंटे की पूजा की जाती है। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल सहित कई चीजों को अर्पित किया जाता है। चार पहर की पूजा में भोलेनाथ को दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत, गन्ने का रस, गिलोय बेल के रस से अभिषेक करने का विशेष महत्व है।
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यह रहेगा मुहूर्त
चतुर्दशी तिथि आरंभ : 8 मार्च को शाम 9:57 बजे से
चतुर्दशी तिथि का समापन : 9 मार्च की शाम 6:17 बजे तक
भगवान शिव की पूजा का समय : शाम 06:25 बजे से रात 09:28 बजे तक

चार प्रहर की पूजा का मुहूर्त
रात्रि प्रथम प्रहर की पूजा : 8 मार्च को शाम 6:25 बजे से रात 9:28 बजे तक (दूध अर्पण करें)

रात्रि द्वितीय प्रहर की पूजा : 8 मार्च को रात 9:28 बजे से रात 12:31 बजे तक (दही अर्पण करें)

रात्रि तृतीय प्रहर की पूजा : 9 मार्च को तड़के 12:31 बजे से तड़के 3:34 बजे तक (घी अर्पण करें)

रात्रि चतुर्थ प्रहर की पूजा : 9 मार्च को तड़के 3.34 बजे से सुबह 6:37 बजे तक (शहद अर्पण करें)

व्रत पारण समय : 9 मार्च को सुबह 6:37 बजे से दोपहर 3:28 मिनट तक
प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है, इसलिए महाशिवरात्रि 8 मार्च को ही मनाई जाएगी। (शिवरात्रि में उदया तिथि का महत्व नहीं है, इसमें पूजा का महत्व प्रदोष काल में है।)
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