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Sonipat News: रुड़की गांव में आस्था का संगम आज, दादी भदा मंदिर पर लगेगा मेला
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18...गांव रूड़की में सती दादी भदा की याद लगने वाले भंडारे में श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद तैयार क
- फोटो : हटवा गांव में पीड़ित परिवार से बात करते भाजपा नेता आशीष तिवारी।
रोहतक। गांव रुड़की में माही चौदस यानी 31 जनवरी को दादी भदा सती के मंदिर पर काफी संख्या में श्रद्धालु जुटेंगे। मंदिर परिसर में विशाल भंडारा व मेला लगाया जाएगा। हुड्डा गोत्र में दादी भदा सती के प्रति मान्यता है। गोत्र से जुड़े हुए सभी गांव के श्रद्धालु मंदिर में आकर अपनी मनोकामना मांगते हैं।
दादी भदा सती के मंदिर गांव रुड़की, आसन, किलोई, मुंगान व घुसकानी में भी स्थापित हैं। आज से 721 वर्ष पहले बसे गांव रुड़की में हुड्डा गोत्र की प्रसिद्ध व बड़ी मान्यता सती दादी भदा की याद में मेला व भंडारा लगाया जाएगा।
इस सात हजार से ज्यादा जनसंख्या वाले गांव में 3000 से ज्यादा घरों में गूगल धूप से धूमणी भी दी जाएगी ताकि गांव के पशु धन और मनुष्यों का स्वास्थ्य ठीक रहे। गांव के घरों में खीर या अन्य पकवान बनाए जाएंगे।
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गांव रुड़की के जो लोग अपनी नौकरी या व्यवसाय के चलते दूसरे प्रदेशों में बसे हुए हैं, वह भी इस दिन आकर मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं।
ये है इतिहास
गांव निवासी जाट कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. जसमेर सिंह ने बताया कि जनश्रुति के अनुसार हुड्डा गोत्र के दादा की शादी राजस्थान के गांव काशीबघोड़ा में हुई थी। शादी के बाद जब वे अपनी पत्नी भदा को लेकर आ रहे थे तो रास्ते में जंगलों में कुछ लोगों ने उनका वध कर दिया। इस घटना के बाद दादी भदा अपने पति के साथ वहीं सती हो गई। पति के प्रति ऐसी श्रद्धा के चलते वह लोगों के लिए आस्था का केंद्र बन गई।
एक क्विंटल गुगल सामग्री का होगा प्रयोग
दादी भदा मंदिर में हवन यज्ञ के साथ एक क्विंटल से ज्यादा गुगल धूप का प्रयोग होगा। युवाओं की टोली बनाकर प्रत्येक घर में गुगल धूप की धूमणी देंगे। दुल्हन शादी के बाद पहली बार गांव आती है तो वह दादी के मंदिर में आशीर्वाद प्राप्त करने जरूर आती है।
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दादी भदा सती के मंदिर गांव रुड़की, आसन, किलोई, मुंगान व घुसकानी में भी स्थापित हैं। आज से 721 वर्ष पहले बसे गांव रुड़की में हुड्डा गोत्र की प्रसिद्ध व बड़ी मान्यता सती दादी भदा की याद में मेला व भंडारा लगाया जाएगा।
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इस सात हजार से ज्यादा जनसंख्या वाले गांव में 3000 से ज्यादा घरों में गूगल धूप से धूमणी भी दी जाएगी ताकि गांव के पशु धन और मनुष्यों का स्वास्थ्य ठीक रहे। गांव के घरों में खीर या अन्य पकवान बनाए जाएंगे।
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गांव रुड़की के जो लोग अपनी नौकरी या व्यवसाय के चलते दूसरे प्रदेशों में बसे हुए हैं, वह भी इस दिन आकर मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं।
ये है इतिहास
गांव निवासी जाट कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. जसमेर सिंह ने बताया कि जनश्रुति के अनुसार हुड्डा गोत्र के दादा की शादी राजस्थान के गांव काशीबघोड़ा में हुई थी। शादी के बाद जब वे अपनी पत्नी भदा को लेकर आ रहे थे तो रास्ते में जंगलों में कुछ लोगों ने उनका वध कर दिया। इस घटना के बाद दादी भदा अपने पति के साथ वहीं सती हो गई। पति के प्रति ऐसी श्रद्धा के चलते वह लोगों के लिए आस्था का केंद्र बन गई।
एक क्विंटल गुगल सामग्री का होगा प्रयोग
दादी भदा मंदिर में हवन यज्ञ के साथ एक क्विंटल से ज्यादा गुगल धूप का प्रयोग होगा। युवाओं की टोली बनाकर प्रत्येक घर में गुगल धूप की धूमणी देंगे। दुल्हन शादी के बाद पहली बार गांव आती है तो वह दादी के मंदिर में आशीर्वाद प्राप्त करने जरूर आती है।

18...गांव रूड़की में सती दादी भदा की याद लगने वाले भंडारे में श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद तैयार क- फोटो : हटवा गांव में पीड़ित परिवार से बात करते भाजपा नेता आशीष तिवारी।