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Sonipat News: 900 करोड़ का हाईवे, खुले नाले न बन जाए जानलेवा

Sun, 04 Oct 2026 02:51 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 04 Oct 2026 02:51 AM IST
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900-crore highway: Open drains must not become a death trap.
फोटो :: सोनीपत के बहालगढ़ के पास नाला पर टूटा स्लैब। संवाद
सोनीपत। करीब 900 करोड़ रुपये की लागत से चौड़ा किए गए राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर कई स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। हाईवे किनारे बने जल निकासी नालों के स्लैब जगह-जगह टूट गए हैं कई स्थानों से पूरी तरह गायब हैं।
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संपर्क मार्ग पर गहरे गड्ढे, क्षतिग्रस्त सुरक्षा ग्रिल, टूटे स्प्रिंग पोस्ट वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। रात में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था न होने से खतरा और बढ़ जाता है।
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कुंडली से पानीपत तक करीब 24 किलोमीटर लंबे एनएच-44 के चौड़ीकरण पर लगभग 900 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। परियोजना का लोकार्पण 20 जून 2023 को हुआ था। यह मार्ग दिल्ली-एनसीआर को हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से जोड़ता है। ऐसे में इस पर दिन-रात बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही रहती है।
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खुले नालों के बीच हादसे का डर
हाईवे के किनारे जल निकासी के लिए बनाए गए नालों को स्लैब से ढका गया था, लेकिन रखरखाव के अभाव में कई स्लैब टूट चुके हैं। कुछ जगहों पर स्लैब गायब होने से नाले खुले पड़े हैं। स्थानीय निवासी राजेश, सुनील, संजय व पुनित का कहना है कि रात में इनकी पहचान करना मुश्किल होता है। अब दो माह बाद सर्दी में कोहरा छाने के बाद दृश्यता कम होने पर स्थिति और खतरनाक हो सकती है। दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए खुले नाले विशेष रूप से जोखिम पैदा कर रहे हैं।

रात में पथ प्रकाश की कमी बढ़ा रही खतरा

जिन स्थानों पर गड्ढे और खुले नाले हैं, वहां पर्याप्त पथ प्रकाश नहीं है। अंधेरे में तेज गति से आने वाले वाहन चालकों को अचानक सामने आए गड्ढे या खुले नाले दिखाई नहीं देते। राजकुमार, महेश और संजीत का कहना है कि हाईवे पर वाहनों की गति अधिक होने के कारण छोटी सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
रोजाना हजारों वाहनों की आवाजाही
स्थानीय लोगों के अनुसार एनएच-44 पर रोजाना करीब एक लाख वाहन गुजरते हैं। इतने व्यस्त मार्ग पर सुरक्षा इंतजामों में कमी को लेकर उन्होंने चिंता जताई है। राई क्षेत्र के संदीप व नीरज ने प्रशासन से खुले नालों को तत्काल ढकने, टूटे स्लैब बदलने, गड्ढे भरने और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था करने की मांग की है।
बहालगढ़ के पास खुले नाले ने लील ली थी जिंदगी
बहालगढ़ के पास पैदल पार पथ बनाने के लिए करीब 15 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया है। उसके पास सुरक्षा के इंतजाम की कमी के चलते एक युवक की उसमें डूबने से मौत हो गई थी। उसके बाद उसके चारों तरफ बैरिकेड व पत्थर लगा दिए गए। हालांकि गड्ढा स्थल पर पानी निकासी व निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हो सका है।

रोड सेफ्टी शाखा पहले ही बता चुकी खतरनाक जोन

जिला रोड सेफ्टी शाखा की ओर से हाईवे के दोनों तरफ खुले नालों वाले स्थानों को पहले ही खतरनाक क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया जा चुका है। ऐसे में सर्दी और कोहरे से पहले इन स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करना जरूरी माना जा रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि हादसा होने का इंतजार करने के बजाय सुरक्षा खामियों को पहले ही दूर किया जाना चाहिए।


जल्द लगाए जाएंगे नए स्लैब

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रोजेक्ट इंजीनियर प्रांजल मिश्रा ने कहा कि एनएच-44 और इसके संपर्क मार्गों पर वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। जहां नालों के स्लैब टूटे या गायब हैं, वहां नए स्लैब लगाए जाएंगे। नालों की सफाई भी कराई जाएगी। गड्ढों और क्षतिग्रस्त बैरिकेड को भी जल्द दुरुस्त कराया जाएगा।

फोटो :: सोनीपत के बहालगढ़ के पास नाला पर टूटा स्लैब। संवाद

फोटो :: सोनीपत के बहालगढ़ के पास नाला पर टूटा स्लैब। संवाद

फोटो :: सोनीपत के बहालगढ़ के पास नाला पर टूटा स्लैब। संवाद

फोटो :: सोनीपत के बहालगढ़ के पास नाला पर टूटा स्लैब। संवाद

फोटो :: सोनीपत के बहालगढ़ के पास नाला पर टूटा स्लैब। संवाद

फोटो :: सोनीपत के बहालगढ़ के पास नाला पर टूटा स्लैब। संवाद

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