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हरियाणा के उद्योग की 67 साल पुरानी नींव एटलस में उत्पादन पूरी तरह बंद, 200 कर्मियों को निकाला
Updated Fri, 10 Aug 2018 01:56 AM IST
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67 साल पुरानी एटलस कंपनी में उत्पादन पूरी तरह बंद, 200 कर्मियों को निकाला
अंकित चौहान
सोनीपत। हरियाणा में उद्योग की 67 साल पहले बड़ी नींव रखने वाली एटलस कंपनी ने साइकिल का उत्पादन पूरी तरह से बंद कर दिया है। कंपनी 200 कर्मियों को निकालने के लिए नोटिस जारी कर 23 अगस्त तक अपना हिसाब करने के फरमान जारी किया है। एक समय में देश व दुनिया तक साईकिल सप्लाई करने वाली एटलस ने 2003 में कारोबार समेटना शुरू कर दिया था। लेकिन वहां अभी तक आर्डर पर उत्पादन हो रहा था और अब वह भी पूरी तरह बंद करने से कर्मियों को बड़ा झटका लगा है। कर्मियों ने कंपनी पर नियम के अनुसार भी हिसाब नहीं करने का आरोप लगाते हुए प्रबंधन के खिलाफ सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराई है।
सोनीपत में एटलस साइकिल लिमिटेड की सबसे पहली यूनिट 1951 में लगी थी जो यहां लगातार अपना कारोबार बढ़ाती चली गई। इस फैक्टरी में सबसे पहले 120 साइकिल प्रतिदिन बनाई जाती थी और यह भी डिमांड के आधार पर बढ़ती चली गई। 1990 के दौर तक पहुंचते-पहुंचते एटलस साइकिल की देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में डिमांड होने लगी और यहां से म्यामार व साउथ अफ्रीका तक एक्सपोर्ट होने लगा। यह एक्सपोर्ट 1994-95 में शुरू हुआ था और 2002 तक स्थिति बेहतर रही। उस समय फैक्टरी में लगभग 6 हजार कर्मी काम करते थे। लेकिन 2003 तक पहुंचते हुए कंपनी ने यहां से फैक्टरी को समेटकर पुणे की ओर का रुख कर लिया। यहां सबसे पहले आधा प्लांट बंद किया गया और वहां काम करने वाले कर्मियों को यहां से पुणे शिफ्ट करने की बात कही गई। लेकिन उस समय अधिकतर कर्मियों ने नौकरी छोड़ दी और कर्मी काफी कम रह गए थे। इस समय कंपनी में ऑर्डर के अनुसार उत्पादन किया जा रहा था और यहां 350 कर्मी काम कर रहे थे।
कंपनी समेटने की तैयारी, स्टॉक किया खत्म
एटलस में जुलाई माह में उत्पादन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है और जितना भी माल पड़ा हुआ था, उससे साइकिल बनवाकर उनका स्टॉक करा लिया गया है। इसके बाद कंपनी में रविवार के साथ ही शनिवार व सोमवार के दिन भी छुट्टी का नोटिस लगा दिया गया और उन दोनों दिनों के रुपये वेतन से काटे जाने लगे। इसके बाद कंपनी ने 200 कर्मियों को एक अगस्त के दिन नौकरी से निकालने का नोटिस जारी कर दिया। कंपनी के कर्मी सुशील कुमार ने बताया कि उस समय सभी ने नोटिस लेने से मना कर दिया तो उनके घरों पर नोटिस भिजवा दिया गया। जिसमें कहा गया है कि वह 23 अगस्त तक अपना हिसाब कर लें। इसके विरोध में कर्मियों ने सीएम विंडो पर प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। जिसमें मांग की गई है कि उनको नौकरी पर रखा जाए या उनका हिसाब श्रम विभाग के नियमों के अनुसार कराया जाए।
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कंपनी बंद करने का निजी बताया जा रहा कारण
एटलस में पूरी तरह से उत्पादन बंद करने का कारण अभी तक प्रबंधन की ओर से प्रशासन या किसी अन्य के सामने नहीं बताया गया है। लेकिन कर्मियों के अनुसार एटलस कंपनी के प्रबंधन निजी कारणों से इसे बंद कर रहे हैं। उनके निजी कारणों के कारण ही कंपनी पर पिछले काफी साल से असर पड़ना शुरू हो गया था और वहां से लगातार कर्मियों को निकाला जा रहा है।
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एटलस कंपनी ने कर्मियों को निकालने के लिए नोटिस जारी कर दिए हैं और उनकी कोई शिकायत है। इस बारे में अभी तक मेरे पास तक मामला नहीं आया है। कर्मचारियों की ओर से सीएम विंडो पर शिकायत दी गई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-विनय सिंह, डीसी
फोटो 47: एटलस कंपनी
फोटो 48: कर्मियों को नौकरी से निकालने को दिया गया नोटिस
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अंकित चौहान
सोनीपत। हरियाणा में उद्योग की 67 साल पहले बड़ी नींव रखने वाली एटलस कंपनी ने साइकिल का उत्पादन पूरी तरह से बंद कर दिया है। कंपनी 200 कर्मियों को निकालने के लिए नोटिस जारी कर 23 अगस्त तक अपना हिसाब करने के फरमान जारी किया है। एक समय में देश व दुनिया तक साईकिल सप्लाई करने वाली एटलस ने 2003 में कारोबार समेटना शुरू कर दिया था। लेकिन वहां अभी तक आर्डर पर उत्पादन हो रहा था और अब वह भी पूरी तरह बंद करने से कर्मियों को बड़ा झटका लगा है। कर्मियों ने कंपनी पर नियम के अनुसार भी हिसाब नहीं करने का आरोप लगाते हुए प्रबंधन के खिलाफ सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराई है।
सोनीपत में एटलस साइकिल लिमिटेड की सबसे पहली यूनिट 1951 में लगी थी जो यहां लगातार अपना कारोबार बढ़ाती चली गई। इस फैक्टरी में सबसे पहले 120 साइकिल प्रतिदिन बनाई जाती थी और यह भी डिमांड के आधार पर बढ़ती चली गई। 1990 के दौर तक पहुंचते-पहुंचते एटलस साइकिल की देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में डिमांड होने लगी और यहां से म्यामार व साउथ अफ्रीका तक एक्सपोर्ट होने लगा। यह एक्सपोर्ट 1994-95 में शुरू हुआ था और 2002 तक स्थिति बेहतर रही। उस समय फैक्टरी में लगभग 6 हजार कर्मी काम करते थे। लेकिन 2003 तक पहुंचते हुए कंपनी ने यहां से फैक्टरी को समेटकर पुणे की ओर का रुख कर लिया। यहां सबसे पहले आधा प्लांट बंद किया गया और वहां काम करने वाले कर्मियों को यहां से पुणे शिफ्ट करने की बात कही गई। लेकिन उस समय अधिकतर कर्मियों ने नौकरी छोड़ दी और कर्मी काफी कम रह गए थे। इस समय कंपनी में ऑर्डर के अनुसार उत्पादन किया जा रहा था और यहां 350 कर्मी काम कर रहे थे।
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कंपनी समेटने की तैयारी, स्टॉक किया खत्म
एटलस में जुलाई माह में उत्पादन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है और जितना भी माल पड़ा हुआ था, उससे साइकिल बनवाकर उनका स्टॉक करा लिया गया है। इसके बाद कंपनी में रविवार के साथ ही शनिवार व सोमवार के दिन भी छुट्टी का नोटिस लगा दिया गया और उन दोनों दिनों के रुपये वेतन से काटे जाने लगे। इसके बाद कंपनी ने 200 कर्मियों को एक अगस्त के दिन नौकरी से निकालने का नोटिस जारी कर दिया। कंपनी के कर्मी सुशील कुमार ने बताया कि उस समय सभी ने नोटिस लेने से मना कर दिया तो उनके घरों पर नोटिस भिजवा दिया गया। जिसमें कहा गया है कि वह 23 अगस्त तक अपना हिसाब कर लें। इसके विरोध में कर्मियों ने सीएम विंडो पर प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। जिसमें मांग की गई है कि उनको नौकरी पर रखा जाए या उनका हिसाब श्रम विभाग के नियमों के अनुसार कराया जाए।
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कंपनी बंद करने का निजी बताया जा रहा कारण
एटलस में पूरी तरह से उत्पादन बंद करने का कारण अभी तक प्रबंधन की ओर से प्रशासन या किसी अन्य के सामने नहीं बताया गया है। लेकिन कर्मियों के अनुसार एटलस कंपनी के प्रबंधन निजी कारणों से इसे बंद कर रहे हैं। उनके निजी कारणों के कारण ही कंपनी पर पिछले काफी साल से असर पड़ना शुरू हो गया था और वहां से लगातार कर्मियों को निकाला जा रहा है।
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एटलस कंपनी ने कर्मियों को निकालने के लिए नोटिस जारी कर दिए हैं और उनकी कोई शिकायत है। इस बारे में अभी तक मेरे पास तक मामला नहीं आया है। कर्मचारियों की ओर से सीएम विंडो पर शिकायत दी गई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-विनय सिंह, डीसी
फोटो 47: एटलस कंपनी
फोटो 48: कर्मियों को नौकरी से निकालने को दिया गया नोटिस