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106 विद्यार्थियों में से 54 लौटे, 52 का इंतजार
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गन्नौर एसडीएम सुरेंद्र दून यूक्रेन गए विद्यार्थियों के परिजनों से बातचीत करते हुए। संवाद
- फोटो : Sonipat
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सोनीपत। रूस और यूक्रेन में चल रहे युद्ध के बीच यूक्रेन से विद्यार्थियों की वतन वापसी जारी है। जिले के 52 विद्यार्थी अभी भी यूक्रेन में ही फंसे हुए हैं। रूस के हमला तेज करने के कारण परिजनों की परेशानी बढ़ी हुई है। प्रशासनिक अधिकारियों की मानें तो जिले के कुल 106 बच्चे मेडिकल की पढ़ाई करने यूक्रेन गए थे। इनमें से 54 विद्यार्थियों को सकुशल लाया गया है, जबकि 52 विद्यार्थी अभी भी फंसे हुए हैं।
खास बात यह है कि जिला प्रशासन ने यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों की पहचान के लिए उपायुक्त की अगुवाई में मुहिम चलाई है। जिसके तहत प्रशासनिक अधिकारी यूक्रेन गए बच्चों की पहचान कर उनके घर जाकर परिजनों से बात कर पूरा ब्योरा ले रहे हैं। अधिकारियों ने परिजनों के साथ फोटो भी लिए हैं। इस मुहिम के तहत प्रशासनिक अधिकारी अब तक 106 में से 100 विद्यार्थियों के परिजनों से मिल चुके हैं। जबकि 6 विद्यार्थी ऐसे हैं, जिनके परिजनों के साथ फोन पर बातचीत की गई है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि करीब 10 विद्यार्थी वीरवार देर रात तक वतन वापसी कर लेंगे।
हवाई अड्डे पर खड़ी की एक गाड़ी
यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों को सकुशल वापस लाने के लिए सरकार तत्परता से काम कर रही है। जिलास्तर पर अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इस पूरे काम को प्रदेश में फरीदाबाद के डिवीजनल कमिश्नर व रेजिडेंट कमिश्नर संजय जून लीड कर रहे हैं। उन्होंने जिला स्तर पर सभी उपायुक्तों को इस संदर्भ में निर्देश दिए थे। इन्हीं निर्देशों के तहत केवल दो दिनों में सोनीपत प्रशासन ने सूची तैयार कर ली है। इसमें यह भी जानकारी दी गई है कि कौन सा विद्यार्थी मौजूदा स्थिति में कहां है। इसके अलावा विद्यार्थियों के परिजनों के मोबाइल नंबर के अलावा बच्चों के यूक्रेन के मोबाइल नंबर भी उपलब्ध करवाए गए हैं। जिला प्रशासन ने दिल्ली हवाई अड्डे पर भी एक गाड़ी स्थायी रूप से खड़ी कर दी है, जिले के जिन बच्चों के परिजन हवाई अड्डे से अपने बच्चों को नहीं ला पा रहे, उनको इसी गाड़ी से सोनीपत लाया जाएगा।
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प्रदेश के 1735 विद्यार्थी गए थे यूक्रेन
जिला प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त सूची के अनुसार, प्रदेश से 1735 विद्यार्थी यूक्रेन गए थे। इनमें सबसे अधिक संख्या पानीपत की है, जहां से 141 बच्चे यूक्रेन गए थे। इनमें से 29 बच्चे वापस आ चुके हैं। दूसरे नंबर पर करनाल है, जहां से 138 बच्चे यूक्रेन गए थे, इसमें से 49 वापसी कर चुके हैं। तीसरे नंबर पर यमुनानगर के 122 बच्चे यूक्रेन गए थे, इसमें से 37 की वापसी हो पाई है। वहीं पंचकूला से केवल 27 बच्चे गए थे, जिनमें से 12 की वापसी हो गई है। महेंद्रगढ़ से 30, फतेहाबाद और मेवात से 41-41 विद्यार्थी यूक्रेन गए थे। प्रदेश के 1735 विद्यार्थियों में से 597 विद्यार्थियों की वापसी हुई है।
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महज 10 मीटर दूर फटा बम, सहम गए थे सभी
यूक्रेन के पसेचीन शहर के वृद्धाश्रम में फंसी दीपालपुर निवासी मानसी जांगड़ा ने बताया कि वह खारकीव मेडिकल यूनिवर्सिटी की द्वितीय वर्ष की छात्रा है। वह सितंबर 2021 में ही यूक्रेन गई थी। 24 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद से हम हॉस्टल के नीचे बने बंकर में हैं। 2 मार्च शाम 4 बजे भारतीय दूतावास ने मैसेज भेजे कि सभी खारकीव खाली कर दें, कर्फ्यू लग जाएगा। उसके बाद विद्यार्थियों ने निकलने के प्रयास शुरू कर दिए। बुधवार की सुबह करीब 400 विद्यार्थी 12 किलोमीटर पैदल चलकर मेट्रो स्टेशन पर पहुंचे। यहां लाइन बनाकर खड़े थे। ट्रेन आई तो यूक्रेनी नागरिकों ने चेन बना ली और किसी भी भारतीय को चढ़ने नहीं दिया। पूछने पर कहा कि पहले यहां के नागरिक व बच्चे चढ़ेंगे। उनके चढ़ने के बाद हमने चढ़ने का प्रयास किया तो उन्होंने भारतीयों को धक्के दे दिए। ट्रेन एक घंटा खड़ी रही, लेकिन किसी को नहीं चढ़ने दिया। भारतीय दूतावास की तरफ से किसी प्रकार की सहायता नहीं मिल रही। दूतावास की तरफ से पसेचीन व दो अन्य जगह सुरक्षित बताई गई थी। पसेचीन 18 किलोमीटर दूर था, हम पैदल ही उस तरफ चल पड़े। कुछ देर बाद ही हमसे महज 10 मीटर की दूरी पर एक बम आकर गिरा। हम बच तो गए, लेकिन सभी विद्यार्थी मलबे से अट गए। मुश्किल से 18 किलोमीटर का सफर पैदल तय करते हुए वृद्धाश्रम में रुके हैं। बुधवार से अभी तक खाना तक नहीं मिला। दूतावास की तरफ से हमें यहां से निकालने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा। रोमानिया, हंगरी व पौलेंड बॉर्डर भी यहां से करीब 1200 किलोमीटर की दूरी पर हैं। एजेंसी दो बसें लेकर आए हैं, लेकिन इनमें पहले प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को निकाला जा रहा है। वृद्धाश्रम के अंदर बम ब्लास्ट की आवाजें सुनाई दे रही हैं। सभी विद्यार्थी बेहद घबराए हुए हैं। यहां से निकल पाएंगे या नहीं, यह भी नहीं पता। हमारी भारत सरकार से अपील है कि हमें जल्द से जल्द यहां से निकलवाने का प्रबंध किया जाए।
वर्जन
यूक्रेन गए जिले के विद्यार्थियों को वापस लाने के लिए जिला प्रशासन सजग है। यूक्रेन में जिले के 106 विद्यार्थियों में से 54 की सकुशल वापसी हो चुकी है। अधिकारी लगातार यूक्रेन गए विद्यार्थियों के परिजनों से संपर्क साध रहे हैं। जिले के विद्यार्थियों की पूरी सूची प्रधानमंत्री कार्यालय भेजी जा चुकी है। वीरवार रात तक 10 विद्यार्थियों के लौटने की उम्मीद है।
- ललित सिवाच, उपायुक्त, सोनीपत
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खास बात यह है कि जिला प्रशासन ने यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों की पहचान के लिए उपायुक्त की अगुवाई में मुहिम चलाई है। जिसके तहत प्रशासनिक अधिकारी यूक्रेन गए बच्चों की पहचान कर उनके घर जाकर परिजनों से बात कर पूरा ब्योरा ले रहे हैं। अधिकारियों ने परिजनों के साथ फोटो भी लिए हैं। इस मुहिम के तहत प्रशासनिक अधिकारी अब तक 106 में से 100 विद्यार्थियों के परिजनों से मिल चुके हैं। जबकि 6 विद्यार्थी ऐसे हैं, जिनके परिजनों के साथ फोन पर बातचीत की गई है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि करीब 10 विद्यार्थी वीरवार देर रात तक वतन वापसी कर लेंगे।
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हवाई अड्डे पर खड़ी की एक गाड़ी
यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों को सकुशल वापस लाने के लिए सरकार तत्परता से काम कर रही है। जिलास्तर पर अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इस पूरे काम को प्रदेश में फरीदाबाद के डिवीजनल कमिश्नर व रेजिडेंट कमिश्नर संजय जून लीड कर रहे हैं। उन्होंने जिला स्तर पर सभी उपायुक्तों को इस संदर्भ में निर्देश दिए थे। इन्हीं निर्देशों के तहत केवल दो दिनों में सोनीपत प्रशासन ने सूची तैयार कर ली है। इसमें यह भी जानकारी दी गई है कि कौन सा विद्यार्थी मौजूदा स्थिति में कहां है। इसके अलावा विद्यार्थियों के परिजनों के मोबाइल नंबर के अलावा बच्चों के यूक्रेन के मोबाइल नंबर भी उपलब्ध करवाए गए हैं। जिला प्रशासन ने दिल्ली हवाई अड्डे पर भी एक गाड़ी स्थायी रूप से खड़ी कर दी है, जिले के जिन बच्चों के परिजन हवाई अड्डे से अपने बच्चों को नहीं ला पा रहे, उनको इसी गाड़ी से सोनीपत लाया जाएगा।
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प्रदेश के 1735 विद्यार्थी गए थे यूक्रेन
जिला प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त सूची के अनुसार, प्रदेश से 1735 विद्यार्थी यूक्रेन गए थे। इनमें सबसे अधिक संख्या पानीपत की है, जहां से 141 बच्चे यूक्रेन गए थे। इनमें से 29 बच्चे वापस आ चुके हैं। दूसरे नंबर पर करनाल है, जहां से 138 बच्चे यूक्रेन गए थे, इसमें से 49 वापसी कर चुके हैं। तीसरे नंबर पर यमुनानगर के 122 बच्चे यूक्रेन गए थे, इसमें से 37 की वापसी हो पाई है। वहीं पंचकूला से केवल 27 बच्चे गए थे, जिनमें से 12 की वापसी हो गई है। महेंद्रगढ़ से 30, फतेहाबाद और मेवात से 41-41 विद्यार्थी यूक्रेन गए थे। प्रदेश के 1735 विद्यार्थियों में से 597 विद्यार्थियों की वापसी हुई है।
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महज 10 मीटर दूर फटा बम, सहम गए थे सभी
यूक्रेन के पसेचीन शहर के वृद्धाश्रम में फंसी दीपालपुर निवासी मानसी जांगड़ा ने बताया कि वह खारकीव मेडिकल यूनिवर्सिटी की द्वितीय वर्ष की छात्रा है। वह सितंबर 2021 में ही यूक्रेन गई थी। 24 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद से हम हॉस्टल के नीचे बने बंकर में हैं। 2 मार्च शाम 4 बजे भारतीय दूतावास ने मैसेज भेजे कि सभी खारकीव खाली कर दें, कर्फ्यू लग जाएगा। उसके बाद विद्यार्थियों ने निकलने के प्रयास शुरू कर दिए। बुधवार की सुबह करीब 400 विद्यार्थी 12 किलोमीटर पैदल चलकर मेट्रो स्टेशन पर पहुंचे। यहां लाइन बनाकर खड़े थे। ट्रेन आई तो यूक्रेनी नागरिकों ने चेन बना ली और किसी भी भारतीय को चढ़ने नहीं दिया। पूछने पर कहा कि पहले यहां के नागरिक व बच्चे चढ़ेंगे। उनके चढ़ने के बाद हमने चढ़ने का प्रयास किया तो उन्होंने भारतीयों को धक्के दे दिए। ट्रेन एक घंटा खड़ी रही, लेकिन किसी को नहीं चढ़ने दिया। भारतीय दूतावास की तरफ से किसी प्रकार की सहायता नहीं मिल रही। दूतावास की तरफ से पसेचीन व दो अन्य जगह सुरक्षित बताई गई थी। पसेचीन 18 किलोमीटर दूर था, हम पैदल ही उस तरफ चल पड़े। कुछ देर बाद ही हमसे महज 10 मीटर की दूरी पर एक बम आकर गिरा। हम बच तो गए, लेकिन सभी विद्यार्थी मलबे से अट गए। मुश्किल से 18 किलोमीटर का सफर पैदल तय करते हुए वृद्धाश्रम में रुके हैं। बुधवार से अभी तक खाना तक नहीं मिला। दूतावास की तरफ से हमें यहां से निकालने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा। रोमानिया, हंगरी व पौलेंड बॉर्डर भी यहां से करीब 1200 किलोमीटर की दूरी पर हैं। एजेंसी दो बसें लेकर आए हैं, लेकिन इनमें पहले प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को निकाला जा रहा है। वृद्धाश्रम के अंदर बम ब्लास्ट की आवाजें सुनाई दे रही हैं। सभी विद्यार्थी बेहद घबराए हुए हैं। यहां से निकल पाएंगे या नहीं, यह भी नहीं पता। हमारी भारत सरकार से अपील है कि हमें जल्द से जल्द यहां से निकलवाने का प्रबंध किया जाए।
वर्जन
यूक्रेन गए जिले के विद्यार्थियों को वापस लाने के लिए जिला प्रशासन सजग है। यूक्रेन में जिले के 106 विद्यार्थियों में से 54 की सकुशल वापसी हो चुकी है। अधिकारी लगातार यूक्रेन गए विद्यार्थियों के परिजनों से संपर्क साध रहे हैं। जिले के विद्यार्थियों की पूरी सूची प्रधानमंत्री कार्यालय भेजी जा चुकी है। वीरवार रात तक 10 विद्यार्थियों के लौटने की उम्मीद है।
- ललित सिवाच, उपायुक्त, सोनीपत