फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   बच्चों की जन्मजात बीमारियों का होगा मुफ्त इलाज, आशा घर-घर जाकर करेंगी रिकॉर्ड तैयार

बच्चों की जन्मजात बीमारियों का होगा मुफ्त इलाज, आशा घर-घर जाकर करेंगी रिकॉर्ड तैयार

Fri, 09 Jun 2017 08:43 PM IST
Updated Fri, 09 Jun 2017 08:43 PM IST
विज्ञापन
बच्चों की जन्मजात बीमारियों का होगा मुफ्त इलाज, आशा घर-घर जाकर करेंगी रिकॉर्ड तैयार

विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
बच्चों की जन्मजात बीमारियों का उपचार कराने के लिए परिवार वालों को भारी भरकम रुपया खर्च नहीं करना पड़ेगा। अब बच्चों की जन्मजात बीमारियों के उपचार का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। एम्स समेत दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों के अलावा रोहतक व चंडीगढ़ के पीजीआई में यह सुविधा मिलेगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से आशाओं की ड्यूटी लगाई है जो ऐसे बच्चों का पता लगाने के लिए घर-घर जाकर सर्वे करेंगी। इससे सिविल अस्पताल के डीईआईसी (डिस्ट्रिक अरली इंटरवेंशन सेंटर) में यह रिकॉर्ड जमा हो सके और अस्पताल से संस्तुति करके बच्चे को इलाज कराने के लिए रेफर किया जा सके।
10 प्रतिशत बच्चों में होती है बीमारियां
जिले में हर माह करीब 2000 बच्चे जन्म लेते हैं, जिनमें से करीब 10 प्रतिशत बच्चों में जन्मजात बीमारियां होती हैं। सफेद मोतिया, दिल में छेद, होठ कटा हुआ, कान का फटा पर्दा समेत कई अन्य जन्मजात बीमारियां हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सरकार की ओर से जन्मजात बीमारियां को दूर कराने के लिए लोगों को राहत दी गई है क्योंकि अभी तक बच्चों का उपचार कराने पर काफी सामान व दवाइयों का खर्च बच्चे के परिजनों पर डाला जाता था, लेकिन अब उपचार से लेकर सामान व दवाइयों तक का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी।
विज्ञापन

सिविल अस्पताल रिकॉर्ड भेजेंगी आशा
जिले में इस समय स्वास्थ्य विभाग में 1200 आशा वर्कर हैं। इन आशा वर्कर को किसी बच्चे का जन्म होने पर उसके घर तीसरे, सातवें, 14वें, 28वें और 42वें दिन जाना होगा। इस दौरान उन्हें नवजात शिशु का हाल जानना होगा और उसमें कोई जन्मजात बीमारी होगी तो उसका पूरा रिकार्ड लेना होगा। इसके बाद उस रिकॉर्ड को आशा वर्कर सिविल अस्पताल में बने डीईआईसी (डिस्ट्रिक अरली इंटरवेंशन सेंटर) में जमा कराएगी। अस्पताल में पहले नवजात शिशु के स्वास्थ्य का चेकअप किया जाएगा। जन्मजात बीमारी की पुष्टि होने पर यहां से नवजात शिशु को इलाज के लिए पीजीआई व अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाएगा, जहां पर बच्चे के उपचार पर खर्च होने वाली राशि परिजनों की बजाय सरकार द्वारा खर्च की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

वर्जन
जन्मजात बीमारियां मिलने पर बच्चों को पीजीआई या अन्य बड़े सरकारी अस्पताल में रेफर किया जाएगा। उपचार की राशि सरकार द्वारा खर्च की जाएगी। सरकार की ओर से लोगों के आर्थिक बोझ को कम करने के लिए यह मुहिम शुरू की गई है।
-डॉ. जेएस पूनिया, सिविल सर्जन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed