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Sonipat News: फसल अवशेष में आग की मिली 40 लोकेशन, नौ मिली सही
Sun, 20 Oct 2024 03:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 20 Oct 2024 03:28 AM IST
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सोनीपत के गन्नौर क्षेत्र के खेत में फसल अवशेषों में लगाई गई आग। स्रोत : ग्रामीण
सोनीपत। जिले में फसल अवशेष में आग लगाने की अबतक 40 लोकेशन मिली जिनमें 9 सही पाई गई। अधिकतर किसानों ने खेत में पराली का सही तरीके से निस्तारण किया है। फसल अवशेषों या पराली में आग लगाने से होने वाले नुकसान के बारे में किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है।
कृषि अधिकारियों का कहना है कि जिले में अब तक सैटेलाइट से फसल अवशेषों में आग लगाने की 40 लोकेशन मिली हैं। भौतिक सत्यापन के बाद इनमें से 31 लोकेशन गलत मिली हैं, जबकि नौ स्थानों पर आग लगी हुई पाई गई है। इनमें से एक लोकेशन गैर कृषि भूमि की पाई गई है। आठ स्थानों पर खेतों में फसल अवशेष जलते मिले हैं। ऐसे में आठ किसानों पर करीब 20 हजार रुपये जुर्माना किया गया है, जबकि छह किसानों पर एफआईआर दर्ज करवाई गई है।
फसल अवशेषों में आग लगाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कृषि विभाग ने विभिन्न क्षेत्रों में टीमें गठित की गई हैं, जो किसानों को फसल अवशेषों में आग नहीं लगाने के प्रति जागरूक करती हैं। जिन क्षेत्रों में फसल अवशेष में आग लगाने की घटनाएं सामने आई हैं, कृषि अधिकारियों ने उन क्षेत्रों में तैनात तीन पर्यवेक्षक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नोटिस भी जारी किए हैं।
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दिवाली से पहले बिगड़ने लगी आब-ओ-हवा
अमूमन दिवाली पर अधिक आतिशबाजी होने पर ही शहर की आब-ओ-हवा प्रदूषित होती थी, लेकिन इस बार दिवाली से पहले ही वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर बढ़ने लगा है। शनिवार को जिले में एक्यूआई 256 दर्ज किया गया। इसमें पीएम 2.5 का स्तर 351 तो पीएम-10 का स्तर 271 दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि त्योहारी सीजन में बाजार में भीड़ बढ़ने व वाहनों की अधिकता भी वायु में प्रदूषण का स्तर बढ़ा रही है। वहीं कूड़े के ढेरों में लगाई जा रही आग भी प्रदूषण बढ़ने का एक कारण है। विशेषज्ञ का कहना है कि वातावरण में हवा की गति बेहद धीमी है। इसके कारण प्रदूषण के कण वातावरण में एक जगह रहते हैं। दूसरी तरफ दिन व रात के तापमान में भी अंतर बना हुआ है। सुबह व शाम को नमी बढ़ने से प्रदूषण के कण ऊपरी वातावरण में नही पहुंच पा रहे हैं।
वर्जन
जिले में फसल अवशेषों में आग लगाने के नौ मामले मिले हैं। 99.99 फीसदी किसानों ने पराली का सही तरीके से प्रबंधन किया है। अगर आप पराली प्रबंधन नहीं कर पा रहे हैं तो हमें बताएं, लेकिन खेत में किसी भी प्रकार की आग न लगाएं। सरकार या विभाग नहीं चाहता कि किसानों पर कार्रवाई की जाए। किसान पराली का सही तरीके से निस्तारण करें, ताकि हवा शुद्ध रहे। -डॉ. मनोज कुमार, उपायुक्त, सोनीपत
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कृषि अधिकारियों का कहना है कि जिले में अब तक सैटेलाइट से फसल अवशेषों में आग लगाने की 40 लोकेशन मिली हैं। भौतिक सत्यापन के बाद इनमें से 31 लोकेशन गलत मिली हैं, जबकि नौ स्थानों पर आग लगी हुई पाई गई है। इनमें से एक लोकेशन गैर कृषि भूमि की पाई गई है। आठ स्थानों पर खेतों में फसल अवशेष जलते मिले हैं। ऐसे में आठ किसानों पर करीब 20 हजार रुपये जुर्माना किया गया है, जबकि छह किसानों पर एफआईआर दर्ज करवाई गई है।
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फसल अवशेषों में आग लगाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कृषि विभाग ने विभिन्न क्षेत्रों में टीमें गठित की गई हैं, जो किसानों को फसल अवशेषों में आग नहीं लगाने के प्रति जागरूक करती हैं। जिन क्षेत्रों में फसल अवशेष में आग लगाने की घटनाएं सामने आई हैं, कृषि अधिकारियों ने उन क्षेत्रों में तैनात तीन पर्यवेक्षक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नोटिस भी जारी किए हैं।
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दिवाली से पहले बिगड़ने लगी आब-ओ-हवा
अमूमन दिवाली पर अधिक आतिशबाजी होने पर ही शहर की आब-ओ-हवा प्रदूषित होती थी, लेकिन इस बार दिवाली से पहले ही वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर बढ़ने लगा है। शनिवार को जिले में एक्यूआई 256 दर्ज किया गया। इसमें पीएम 2.5 का स्तर 351 तो पीएम-10 का स्तर 271 दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि त्योहारी सीजन में बाजार में भीड़ बढ़ने व वाहनों की अधिकता भी वायु में प्रदूषण का स्तर बढ़ा रही है। वहीं कूड़े के ढेरों में लगाई जा रही आग भी प्रदूषण बढ़ने का एक कारण है। विशेषज्ञ का कहना है कि वातावरण में हवा की गति बेहद धीमी है। इसके कारण प्रदूषण के कण वातावरण में एक जगह रहते हैं। दूसरी तरफ दिन व रात के तापमान में भी अंतर बना हुआ है। सुबह व शाम को नमी बढ़ने से प्रदूषण के कण ऊपरी वातावरण में नही पहुंच पा रहे हैं।
वर्जन
जिले में फसल अवशेषों में आग लगाने के नौ मामले मिले हैं। 99.99 फीसदी किसानों ने पराली का सही तरीके से प्रबंधन किया है। अगर आप पराली प्रबंधन नहीं कर पा रहे हैं तो हमें बताएं, लेकिन खेत में किसी भी प्रकार की आग न लगाएं। सरकार या विभाग नहीं चाहता कि किसानों पर कार्रवाई की जाए। किसान पराली का सही तरीके से निस्तारण करें, ताकि हवा शुद्ध रहे। -डॉ. मनोज कुमार, उपायुक्त, सोनीपत