फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   मुरथल यूनिवर्सिटी के भौतिकी विभाग को मिले 1.50 करोड़ रुपये, शोध कार्यों में मिलेगी मदद

मुरथल यूनिवर्सिटी के भौतिकी विभाग को मिले 1.50 करोड़ रुपये, शोध कार्यों में मिलेगी मदद

Fri, 04 Jan 2019 12:48 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 04 Jan 2019 12:48 AM IST
विज्ञापन
मुरथल यूनिवर्सिटी के भौतिकी विभाग को मिले 1.50 करोड़ रुपये, शोध कार्यों में मिलेगी मदद
मुरथल विवि के भौतिकी विभाग को मिले 1.50 करोड़
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। मुरथल यूनिवर्सिटी के भौतिकी विभाग के शोधार्थियों के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार ने भौतिकी विभाग को 1.50 करोड़ रुपये की मदद देने का निर्णय लिया है। सरकारी विश्वविद्यालयों में यह उपलब्धि प्राप्त करने वाला एक मात्र विश्वविद्यालय है। इस राशि से विभाग के शोधार्थियों को विशेष प्रोत्साहन मिल सकेगा।
केंद्र सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी विभाग ने एफआईएसटी (फंड फॉर इंप्रूवमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर) के लिए पिछले वर्ष में आवेदन मांगे थे। आवेदन करने के बाद विभाग ने आवेदनों की समीक्षा के पश्चात कुछ को प्रस्तुति देने के लिए बुलाया। जिसके आधार पर केंद्र सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी विभाग ने मुरथल यूनिवर्सिटी के भौतिकी विभाग को फिजिकल साइंस के शोध व विकास को बढ़ावा देने के लिए 1.50 करोड़ रुपये प्रदान किए। भौतिकी विभाग के शोधार्थियों व प्रोफेसरों ने राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के जर्नल में 140 शोधपत्र एससीआई इंडक्स (साइंस साइटेशन इंडक्स) में प्रकाशित किए हैं। 1991 शोधार्थियों ने भौतिकी विभाग की ओर से प्रकाशित किए गए शोधपत्रों का प्रयोग किया है। जबकि इनमें से 21 ऐसे शोध पत्र हैं जिसका एचआई इंडक्स 21 से अधिक दूसरे शोधार्थियों ने प्रयोग किया है।
विज्ञापन

बायो एक्टिव ग्लास बनाने में काम आएगी राशि
विभाग केंद्र सरकार से मिली राशि का प्रयोग ऐसे ग्लास बनाने में करेगा, जो लंबे समय तक बेहतर रोशनी देने में सक्षम होंगे। इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि ग्लास पर्यावरण के अनुकूल हो। इसके अतिरिक्त भौतिकी विभाग की ओर से ऐसे बायो एक्टिव ग्लास बनाए जाएंगे, जिससे शरीर के अंदर कोई अंग अगर खराब हो गया, तो बायो एक्टिव ग्लास की मदद से नया अंग लगाया जा सकेगा। वह अंग भी उसी तरीके से काम करेगा, जैसे की शरीर के अन्य अंग करते हैं। विभाग की ओर से बायो एक्टिव ग्लास बना तो लिए गए हैं, लेकिन उनका परीक्षण आगामी समय में किया जाएगा। पानी के प्रदूषण की समस्य को देखते हुए भौतिकी विभाग आने वाले समय में ऐसे मैटेरियल बनाएंगे, जो सूर्य प्रकाश का सदुपयोग करके पानी में उपलब्ध हानिकारक केमिकल, डाइस को साफ करके पानी के प्रदूषण को कम करेगा। इसके अतिरिक्त विभाग में न्यूक्लीयर हायर एनर्जी, नवीनीकरण ऊर्जा व सैंसर डिवाइसिस आदि पर प्रोजेक्ट के तहत प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर व शोधार्थी मिलकर कार्य करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed