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नगर निगम ने गांवों से मिले 10 करोड़ रुपये कर दिए खर्च, अब 13 करोड़ वापस दिए जाएंगे
Updated Wed, 05 Dec 2018 12:54 AM IST
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नगर निगम 13 करोड़ रुपये देगा, तब शुरू होगा 15 गांवों का विकास
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। सरकार ने नगर निगम विरोध समिति के कहने पर 15 गांवों को भले ही नगर निगम से बाहर निकाल दिया हो, लेकिन निगम से बाहर किए गए गांवों में अब विकास कार्यों का पेंच फंस गया है। जिन 15 गांवों को निगम से बाहर किया गया है, उनसे निगम के खाते में आया रुपया व वहां के विकास कार्यों पर अभी तक खर्च हुए रुपये का पूरा हिसाब तैयार हो चुका है। जिसमें 23 करोड़ रुपये निगम को मिले थे और 10 करोड़ रुपये उनमें से इन गांवों में खर्च किए जाने का दावा किया जा रहा है। इस तरह गांवों को केवल 13 करोड़ रुपये वापस दिए जाएंगे और यह रुपये वापस देने के बाद ही गांवों में विकास शुरू हो सकेगा।
नगर निगम जुलाई 2015 में बनने के साथ ही 26 गांवों को इसमें शामिल किया गया था। उसके बाद गांवों के कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि निगम ने गांवों का करोड़ों रुपया व पंचायती जमीन को ट्रांसफर कराकर अपने पास रख लिया है। उसके बावजूद गांवों में विकास कार्य नहीं कराए गए तो गांवों में प्रापर्टी टैक्स, बिलों में एमसी टैक्स आदि लगाने शुरू कर दिए। इस कारण गांवों को निगम से बाहर निकालने की मांग की गई थी और इसके लिए आंदोलन शुरू करते हुए नगर निगम विरोध समिति बनाई गई थी। इस नगर निगम विरोध समिति में कुछ गांवों के चंद लोग शामिल थे, जिन्होंने आंदोलन करते हुए सभी जन प्रतिनिधियों व नेताओं से मिलकर ज्ञापन दिया था। वहीं समिति के लोग हरियाणा भवन में सीएम मनोहर लाल से भी मिले थे और उसके बाद 52 दिन तक शहर के अग्रसेन चौक पर धरना दिया गया था। इस मामले में सांसद रमेश कौशिक के मध्यस्थता करने पर 15 गांवों को निगम से बाहर करने की 2 जून को घोषणा कर दी गई थी और इसमें एक माह पहले ही अधिसूचना भी जारी कर दी गई।
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इन गांवों को निगम से किया गया बाहर
नगर निगम से मुकीमपुर, दिपालपुर, खेवड़ा, हरसाना खुर्द, हरसाना कलां, नसीरपुर बांगर, मुरशीदपुर को पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है। इनमें मुरशीदपुर में आबादी नहीं है जो केवल राजस्व रिकार्ड में दर्ज है, जबकि हरसाना खुर्द व हरसाना कला रिकार्ड में दो गांव दर्ज है। वहीं मुरथल, नांगल खुर्द, कुमासपुर, किशोरा, चौहान जोशी, बहालगढ़, असावरपुर, बैंयापुर गांव की आबादी वाला क्षेत्र बाहर किया गया है, लेकिन इनकी खेती व अन्य कुछ जमीन नगर निगम में रहेगी।
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अधूरे विकास कार्यों में फंसा रुपया
नगर निगम ने इन गांवों में कई विकास कार्य शुरू करा दिए थे, जिनमें पानी की लाइन बिछवाने से लेकर फिरनी व नालियों का निर्माण शामिल है। जबकि थ्री पोंड सिस्टम समेत अन्य काफी काम पूरे करा दिए गए थे। लेकिन जिन कार्यों को अभी पूरा नहीं कराया गया है, उन कार्यों पर संशय खड़ा हो गया है। निगम के अधिकारी अब गांवों को निगम अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने के कारण कार्य नहीं करा पाने की बात कहते हैं। ऐसे में उनपर अभी तक खर्च हुआ करोड़ों रुपया भी खराब होता दिख रहा है। क्योंकि उनपर अब पंचायत को फैसला लेना है। अब देखना होगा कि पंचायत उन कार्यों को पूरा कराती है या नहीं।
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नगर निगम से जिन गांवों को बाहर किया गया है, उनका पूरा हिसाब तैयार हो चुका है। उनका लगभग 13 करोड़ रुपया वापस किया जाएगा, जिसके बाद विकास कार्य शुरू करा दिए जाएंगे। -विनय सिंह, डीसी
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। सरकार ने नगर निगम विरोध समिति के कहने पर 15 गांवों को भले ही नगर निगम से बाहर निकाल दिया हो, लेकिन निगम से बाहर किए गए गांवों में अब विकास कार्यों का पेंच फंस गया है। जिन 15 गांवों को निगम से बाहर किया गया है, उनसे निगम के खाते में आया रुपया व वहां के विकास कार्यों पर अभी तक खर्च हुए रुपये का पूरा हिसाब तैयार हो चुका है। जिसमें 23 करोड़ रुपये निगम को मिले थे और 10 करोड़ रुपये उनमें से इन गांवों में खर्च किए जाने का दावा किया जा रहा है। इस तरह गांवों को केवल 13 करोड़ रुपये वापस दिए जाएंगे और यह रुपये वापस देने के बाद ही गांवों में विकास शुरू हो सकेगा।
नगर निगम जुलाई 2015 में बनने के साथ ही 26 गांवों को इसमें शामिल किया गया था। उसके बाद गांवों के कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि निगम ने गांवों का करोड़ों रुपया व पंचायती जमीन को ट्रांसफर कराकर अपने पास रख लिया है। उसके बावजूद गांवों में विकास कार्य नहीं कराए गए तो गांवों में प्रापर्टी टैक्स, बिलों में एमसी टैक्स आदि लगाने शुरू कर दिए। इस कारण गांवों को निगम से बाहर निकालने की मांग की गई थी और इसके लिए आंदोलन शुरू करते हुए नगर निगम विरोध समिति बनाई गई थी। इस नगर निगम विरोध समिति में कुछ गांवों के चंद लोग शामिल थे, जिन्होंने आंदोलन करते हुए सभी जन प्रतिनिधियों व नेताओं से मिलकर ज्ञापन दिया था। वहीं समिति के लोग हरियाणा भवन में सीएम मनोहर लाल से भी मिले थे और उसके बाद 52 दिन तक शहर के अग्रसेन चौक पर धरना दिया गया था। इस मामले में सांसद रमेश कौशिक के मध्यस्थता करने पर 15 गांवों को निगम से बाहर करने की 2 जून को घोषणा कर दी गई थी और इसमें एक माह पहले ही अधिसूचना भी जारी कर दी गई।
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इन गांवों को निगम से किया गया बाहर
नगर निगम से मुकीमपुर, दिपालपुर, खेवड़ा, हरसाना खुर्द, हरसाना कलां, नसीरपुर बांगर, मुरशीदपुर को पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है। इनमें मुरशीदपुर में आबादी नहीं है जो केवल राजस्व रिकार्ड में दर्ज है, जबकि हरसाना खुर्द व हरसाना कला रिकार्ड में दो गांव दर्ज है। वहीं मुरथल, नांगल खुर्द, कुमासपुर, किशोरा, चौहान जोशी, बहालगढ़, असावरपुर, बैंयापुर गांव की आबादी वाला क्षेत्र बाहर किया गया है, लेकिन इनकी खेती व अन्य कुछ जमीन नगर निगम में रहेगी।
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अधूरे विकास कार्यों में फंसा रुपया
नगर निगम ने इन गांवों में कई विकास कार्य शुरू करा दिए थे, जिनमें पानी की लाइन बिछवाने से लेकर फिरनी व नालियों का निर्माण शामिल है। जबकि थ्री पोंड सिस्टम समेत अन्य काफी काम पूरे करा दिए गए थे। लेकिन जिन कार्यों को अभी पूरा नहीं कराया गया है, उन कार्यों पर संशय खड़ा हो गया है। निगम के अधिकारी अब गांवों को निगम अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने के कारण कार्य नहीं करा पाने की बात कहते हैं। ऐसे में उनपर अभी तक खर्च हुआ करोड़ों रुपया भी खराब होता दिख रहा है। क्योंकि उनपर अब पंचायत को फैसला लेना है। अब देखना होगा कि पंचायत उन कार्यों को पूरा कराती है या नहीं।
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नगर निगम से जिन गांवों को बाहर किया गया है, उनका पूरा हिसाब तैयार हो चुका है। उनका लगभग 13 करोड़ रुपया वापस किया जाएगा, जिसके बाद विकास कार्य शुरू करा दिए जाएंगे। -विनय सिंह, डीसी