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किसान संगठनों की हुई मीटिंग, चीनी मिल से जुड़े मुद्दों पर हुई चर्चा
Updated Thu, 03 Aug 2017 01:03 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। शुगर मिल में बुधवार को गन्ना उत्पादक किसानों की मीटिंग हुई। इसमें किसान संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। मीटिंग के दौरान सीएम घोषणा के अनुसार मिल की पेराई क्षमता बढ़वाने, चीनी मिल को एक नवंबर से चालू करने के साथ अलग से नया चीनी मिल स्थापित करने की मांगों पर विचार किया गया। सोनीपत मिल के बंद होने के बाद नारायणगढ़ और यूपी की चीनी मिलों में डाले गए गन्ने की रिकवरी न होने पर रोष जताया। साथ ही आरोप लगाया कि सरकार चीनी मिल को चालू करवाने के लिए कदम नहीं उठा रही है।
मीटिंग के दौरान किसानों ने आरोप लगाया कि शुगर मिल के चीफ इंजीनियर का मिल प्रशासन से, प्रशासन का डायरेक्टरों से तालमेल नहीं है। इसके चलते शुगर मिल में नई टर्बाइन नहीं लग पाई है। सरकार जिस तरह सोनीपत बिजली निगम के 23 सब डिवीजनों का निजीकरण और परिवहन सेवाओं का निजीकरण कर रही है। उसी तरह से को-ऑपरेटिव चीनी मिल का निजीकरण करने की योजना बना रही है। इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाकियू नेता रोहताश बैनीवाल ने कहा कि बैठक में डायरेक्टरों को भी बुलाया गया था, लेकिन वे भी मिल प्रशासन से जुड़े हुए हैं। इसलिए वे नहीं पहुंचे। वे भी चीनी मिल को चालू करवाने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। इस अवसर पर भाकियू जिला प्रधान रोहताश बैनीवाल, रोहतक के जिला प्रधान धर्मबीर हुड्डा, श्रद्धानंद सोलंकी, ब्रह्मसिंह दहिया, हवासिंह, छतर सिंह जाहरी, ओम सिंह आंतिल, भगत सिंह, यूनियन के हलका गन्नौर प्रधान जयभगवान, दलबीर, नफेसिंह, ओमप्रकाश माजरा आदि मौजूद रहे।
बंगलूरू से मंगाई है नई टर्बाइन : मलिक
मीटिंग में पहुंचे मिल के चीफ इंजीनियर तेजपाल सिंह मलिक ने किसानों से कहा कि एक नवंबर को शुगर मिल को चालू कर दिया जाएगा। मिल प्रशासन की ओर से बंगलूरू की एक कंपनी से नई टर्बाइन मांगी गई है। इस लगाने के बाद मिल को चालू किया जाएगा। टर्बाइन पर करीब सवा करोड़ की लागत आएगी। मिल की क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार को एस्टीमेट भेजा हुआ है। सरकार की ओर से अभी तक बजट जारी नहीं हुआ है। बजट जारी होने के बाद क्षमता बढ़ाने का काम शुरू होग्रा।
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यूपी और नारायणगढ़ की मिल से नहीं हो पाई रिकवरी
यूपी की मिलों से अभी तक सोनीपत के किसानों को गन्ने की रिकवरी नहीं हो पाई है। इसके लिए सरकार गन्ना उत्पादक किसानों की कोई मदद नहीं कर रही। यमुनानगर के नारायणगढ़ की चीनी मिल में जिले के 16 किसानों के 10 लाख 20 हजार रुपये बचे हैं। यह भी उन किसानों का पेमेंट रुका है, जिनके नाम गलत है।
- हवासिंह आंतिल, किसान, दीपालपुर
सरकार चीनी मिल का निजीकरण करने की योजना
को-ऑपरेटिव चीनी मिल का सरकार निजीकरण करना चाहती है। इसके लिए चीनी मिल में अभी तक न तो टर्बाइन पहुंची है और न ही पेराई क्षमता बढ़ाने के लिए बजट पहुंचा है। यदि समय पर चीनी मिल चालू नहीं हुई तो किसानों को परेशानी होगी।
- रोहताश बैनीवाल, जिलाध्यक्ष, भाकियू
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सोनीपत। शुगर मिल में बुधवार को गन्ना उत्पादक किसानों की मीटिंग हुई। इसमें किसान संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। मीटिंग के दौरान सीएम घोषणा के अनुसार मिल की पेराई क्षमता बढ़वाने, चीनी मिल को एक नवंबर से चालू करने के साथ अलग से नया चीनी मिल स्थापित करने की मांगों पर विचार किया गया। सोनीपत मिल के बंद होने के बाद नारायणगढ़ और यूपी की चीनी मिलों में डाले गए गन्ने की रिकवरी न होने पर रोष जताया। साथ ही आरोप लगाया कि सरकार चीनी मिल को चालू करवाने के लिए कदम नहीं उठा रही है।
मीटिंग के दौरान किसानों ने आरोप लगाया कि शुगर मिल के चीफ इंजीनियर का मिल प्रशासन से, प्रशासन का डायरेक्टरों से तालमेल नहीं है। इसके चलते शुगर मिल में नई टर्बाइन नहीं लग पाई है। सरकार जिस तरह सोनीपत बिजली निगम के 23 सब डिवीजनों का निजीकरण और परिवहन सेवाओं का निजीकरण कर रही है। उसी तरह से को-ऑपरेटिव चीनी मिल का निजीकरण करने की योजना बना रही है। इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाकियू नेता रोहताश बैनीवाल ने कहा कि बैठक में डायरेक्टरों को भी बुलाया गया था, लेकिन वे भी मिल प्रशासन से जुड़े हुए हैं। इसलिए वे नहीं पहुंचे। वे भी चीनी मिल को चालू करवाने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। इस अवसर पर भाकियू जिला प्रधान रोहताश बैनीवाल, रोहतक के जिला प्रधान धर्मबीर हुड्डा, श्रद्धानंद सोलंकी, ब्रह्मसिंह दहिया, हवासिंह, छतर सिंह जाहरी, ओम सिंह आंतिल, भगत सिंह, यूनियन के हलका गन्नौर प्रधान जयभगवान, दलबीर, नफेसिंह, ओमप्रकाश माजरा आदि मौजूद रहे।
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बंगलूरू से मंगाई है नई टर्बाइन : मलिक
मीटिंग में पहुंचे मिल के चीफ इंजीनियर तेजपाल सिंह मलिक ने किसानों से कहा कि एक नवंबर को शुगर मिल को चालू कर दिया जाएगा। मिल प्रशासन की ओर से बंगलूरू की एक कंपनी से नई टर्बाइन मांगी गई है। इस लगाने के बाद मिल को चालू किया जाएगा। टर्बाइन पर करीब सवा करोड़ की लागत आएगी। मिल की क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार को एस्टीमेट भेजा हुआ है। सरकार की ओर से अभी तक बजट जारी नहीं हुआ है। बजट जारी होने के बाद क्षमता बढ़ाने का काम शुरू होग्रा।
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यूपी और नारायणगढ़ की मिल से नहीं हो पाई रिकवरी
यूपी की मिलों से अभी तक सोनीपत के किसानों को गन्ने की रिकवरी नहीं हो पाई है। इसके लिए सरकार गन्ना उत्पादक किसानों की कोई मदद नहीं कर रही। यमुनानगर के नारायणगढ़ की चीनी मिल में जिले के 16 किसानों के 10 लाख 20 हजार रुपये बचे हैं। यह भी उन किसानों का पेमेंट रुका है, जिनके नाम गलत है।
- हवासिंह आंतिल, किसान, दीपालपुर
सरकार चीनी मिल का निजीकरण करने की योजना
को-ऑपरेटिव चीनी मिल का सरकार निजीकरण करना चाहती है। इसके लिए चीनी मिल में अभी तक न तो टर्बाइन पहुंची है और न ही पेराई क्षमता बढ़ाने के लिए बजट पहुंचा है। यदि समय पर चीनी मिल चालू नहीं हुई तो किसानों को परेशानी होगी।
- रोहताश बैनीवाल, जिलाध्यक्ष, भाकियू