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सत कुंभा उत्सव में मानव कल्याण के लिए रूद्र महायज्ञ में आहुति डालने पहुंचे श्रद्धालु
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सत कुंभा उत्सव में मानव कल्याण के लिए रुद्र महायज्ञ में आहुति डालने पहुंचे श्रद्धालु
अमर उजाला ब्यूरो
गन्नौर। सत कुंभा उत्सव के तीसरे दिन मानव कल्याण के लिए चल रहे रुद्र महायज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आहुति डाली। जहां पीठाधीश्वर महंत राजेश्वर स्वरूप महाराज ने कहा कि सृष्टि में धर्म मार्ग पर चलने के लिए भारत के ऋषि मुनि व तपस्वियों ने यज्ञ का महत्व बताया है। रुद्र महायज्ञ मानव कल्याण, मानवीय सद्भावनाओं को ऊंचाई देने, मानव को मानव के करीब लाने, मानव को धर्म मार्ग पर चलने, मानव के अंदर दिव्य गुणों को जागृत करने और वातावरण को प्रदूषण मुक्त करने के लिए किया जा रहा है।
पीठाधीश्वर महंत राजेश्वर स्वरूप महाराज ने कहा कि रुद्र महायज्ञ करने वालों को परम सौभाग्य प्राप्त है। सतकुंभा धाम पर चल रहे हवन यज्ञशाला में मिट्टी, अग्नि, जल, वायु, आकाश 5 कुंड बने हैं। पांच काम इंद्रियां हैं, पांच ज्ञान इंद्रियां हैं, इनको नियंत्रित करने के लिए श्रद्धा भावना के साथ आहुति डालते हैं। कहा कि जिस संकल्प को लेकर आप आहुति दे रहे हैं, वह आपके जीवन के अंदर साकार रूप में प्रकट होता है। उनमें भक्ति भावना, भक्ति करने की ललक, प्रभु के प्रति समर्पण और आत्म कल्याण के साथ-साथ मानव कल्याण की मंगल कामनाओं को पूरा किया जा रहा है। कार्यक्रम में कमेटी के सदस्य जनेश्वर, रामनिवास, ब्रह्मपाल, सतीश एडवोकेट, सेठपाल आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम में वृंदावन से आये पवन चतुर्वेदी ने अपने साथी कलाकारों के साथ भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को स्वर और संगीत के साथ प्रस्तुत किया।
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अमर उजाला ब्यूरो
गन्नौर। सत कुंभा उत्सव के तीसरे दिन मानव कल्याण के लिए चल रहे रुद्र महायज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आहुति डाली। जहां पीठाधीश्वर महंत राजेश्वर स्वरूप महाराज ने कहा कि सृष्टि में धर्म मार्ग पर चलने के लिए भारत के ऋषि मुनि व तपस्वियों ने यज्ञ का महत्व बताया है। रुद्र महायज्ञ मानव कल्याण, मानवीय सद्भावनाओं को ऊंचाई देने, मानव को मानव के करीब लाने, मानव को धर्म मार्ग पर चलने, मानव के अंदर दिव्य गुणों को जागृत करने और वातावरण को प्रदूषण मुक्त करने के लिए किया जा रहा है।
पीठाधीश्वर महंत राजेश्वर स्वरूप महाराज ने कहा कि रुद्र महायज्ञ करने वालों को परम सौभाग्य प्राप्त है। सतकुंभा धाम पर चल रहे हवन यज्ञशाला में मिट्टी, अग्नि, जल, वायु, आकाश 5 कुंड बने हैं। पांच काम इंद्रियां हैं, पांच ज्ञान इंद्रियां हैं, इनको नियंत्रित करने के लिए श्रद्धा भावना के साथ आहुति डालते हैं। कहा कि जिस संकल्प को लेकर आप आहुति दे रहे हैं, वह आपके जीवन के अंदर साकार रूप में प्रकट होता है। उनमें भक्ति भावना, भक्ति करने की ललक, प्रभु के प्रति समर्पण और आत्म कल्याण के साथ-साथ मानव कल्याण की मंगल कामनाओं को पूरा किया जा रहा है। कार्यक्रम में कमेटी के सदस्य जनेश्वर, रामनिवास, ब्रह्मपाल, सतीश एडवोकेट, सेठपाल आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम में वृंदावन से आये पवन चतुर्वेदी ने अपने साथी कलाकारों के साथ भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को स्वर और संगीत के साथ प्रस्तुत किया।
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