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बिना विश्वास के भक्ति असंभव : स्वामी श्रीरत्नेश
Updated Wed, 28 Nov 2018 01:04 AM IST
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बिना विश्वास के भक्ति असंभव : स्वामी श्रीरत्नेश
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। दि महाराजा अग्रसेन समाज कल्याण समिति व श्री ज्योतिषपीठ की ओर से सेक्टर-14 स्थित अग्रसेन भवन में दिव्य श्री रामकथा ज्ञान महायज्ञ का आयेाजन किया जा रहा है। प्रवचन करते हुए जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीरत्नेश जी महाराज ने बताया कि रामचरित मानस पूरी रामकथा भगवान् शंकर के मुख से कही गई। इस कथा को माता पार्वती ने सुना।
स्वामी श्रीरत्नेश महाराज ने बताया कि रामचरितमानस में माता पार्वती के जन्म का वर्णन है, परंतु शंकर का नहीं। श्रद्धा का जन्म होता है, किंतु विश्वास का नहीं। श्रद्धा का जन्म बुद्धि में होता है, लेकिन विश्वास हृदय का सहज स्वभाव है। बुद्धि प्रत्येक वस्तु को कार्य-कारण के आधार पर ही स्वीकार करती है, किंतु हृदय की स्वीकृति के पीछे कोई तर्क नहीं होता। रामचरितमानस पथ के लिए श्रद्धा संबल यानी पाथेय है। बिना विश्वास के भक्ति असंभव है। इस दौरान आरके कुच्छल, एसपी गुप्ता, अनिल गुप्ता ,ओडी गर्ग, काजल रानी, मधु गुप्ता, ऊषा रानी आदि मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। दि महाराजा अग्रसेन समाज कल्याण समिति व श्री ज्योतिषपीठ की ओर से सेक्टर-14 स्थित अग्रसेन भवन में दिव्य श्री रामकथा ज्ञान महायज्ञ का आयेाजन किया जा रहा है। प्रवचन करते हुए जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीरत्नेश जी महाराज ने बताया कि रामचरित मानस पूरी रामकथा भगवान् शंकर के मुख से कही गई। इस कथा को माता पार्वती ने सुना।
स्वामी श्रीरत्नेश महाराज ने बताया कि रामचरितमानस में माता पार्वती के जन्म का वर्णन है, परंतु शंकर का नहीं। श्रद्धा का जन्म होता है, किंतु विश्वास का नहीं। श्रद्धा का जन्म बुद्धि में होता है, लेकिन विश्वास हृदय का सहज स्वभाव है। बुद्धि प्रत्येक वस्तु को कार्य-कारण के आधार पर ही स्वीकार करती है, किंतु हृदय की स्वीकृति के पीछे कोई तर्क नहीं होता। रामचरितमानस पथ के लिए श्रद्धा संबल यानी पाथेय है। बिना विश्वास के भक्ति असंभव है। इस दौरान आरके कुच्छल, एसपी गुप्ता, अनिल गुप्ता ,ओडी गर्ग, काजल रानी, मधु गुप्ता, ऊषा रानी आदि मौजूद रहे।
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