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वैज्ञानिक सोच पैदा करके युवा शक्ति को दी जा सकती है एक नई दिशा: वीसी
Tue, 28 Feb 2023 11:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Tue, 28 Feb 2023 11:11 PM IST
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सीडीएलयू में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थितजन। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजमेर सिंह मलिक ने कहा कि विज्ञान तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में काम आता है। भौतिकी विषय अन्य वैज्ञानिक विषयों की जननी है। वह सीडीएलयू में डिपार्टमेंट ऑफ फिजिक्स द्वारा ग्लोबल साइंस फॉर ग्लोबल वेल्बीइंग थीम पर आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2023 कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए जेआरएफ पाॅलिसी बनाई गई है, जिसमें डायरेक्ट रिसर्च स्कॉलर एडमिट किए जाएंगे। जनवरी-फरवरी 2023 में 26 जेआरएफ अवाॅर्डी यूनिवर्सिटी में आए हैं। एक अध्यापक को नोट्स तैयार करके अपने विषय को अच्छे से पढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर गुणवत्तापरक कार्यों को बढ़ावा दिया जा सकता है। भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी प्रतिभा का लोहा विश्व भर में मनवाया है। वैज्ञानिक सोच पैदा करके युवा शक्ति को एक नई दिशा प्रदान की जा सकती है।
पोस्टर मेकिंग में बॉटनी विभाग की टीम प्रथम
विशिष्ट अतिथि कुलसचिव डॉ. राजेश कुमार बंसल ने कहा कि शोध के क्षेत्र में अनेक गुणवत्ता परक कार्य हुए हैं, जिसके फलस्वरूप दो पेटेंट पंजीकृत हुए हैं और 8 स्वीकृति के लिए भेजे हुए हैं। इस कार्यक्रम में ग्लोबल साइंस फॉर ग्लोबल वेल्बीइंग विषय पर पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता भी करवाई गई। 12 विद्यार्थियों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया। बॉटनी विभाग की टीम प्रथम स्थान पर, भौतिकी विभाग की टीम द्वितीय स्थान पर व एनर्जी एंड एनवायरमेंटल साइंस की टीम तृतीय स्थान पर रही। विजेताओं को मुख्य अतिथि ने सम्मानित किया।
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समाज हित को ध्यान में रखकर करना चाहिए शोध विषय का चयन : देवेंद्र मोहन
मुख्य वक्ता के रूप में गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय हिसार के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर देवेंद्र मोहन ने संबोधित किया। फोटोनिक्स मेटेरियल्स एंड टेक्नोलॉजी फॉर साइंटिफिक रेवोलुशन इन 21 सेंचुरी विषय पर अपना व्याख्यान देते हुए कहा कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान पर भी विद्यार्थियों को जोर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शोध विषय का चयन समाज हित को ध्यान में रखकर करना चाहिए। अपने पसंदीदा वैज्ञानिक को रोल मॉडल मानकर जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के विकास में वैज्ञानिकों का अहम योगदान है। इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अवसर पर फिजिकल साइंस के डीन प्रोफेसर सुशील कुमार, प्राचार्य डॉ शाम लाल फुटेला, डॉ राम मेहर दीक्षित, डॉ रचना मलिक, डॉ अमरीक, डॉ प्रियंका सहित अनेक विभागों के प्राध्यापक उपस्थित थे।
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सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजमेर सिंह मलिक ने कहा कि विज्ञान तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में काम आता है। भौतिकी विषय अन्य वैज्ञानिक विषयों की जननी है। वह सीडीएलयू में डिपार्टमेंट ऑफ फिजिक्स द्वारा ग्लोबल साइंस फॉर ग्लोबल वेल्बीइंग थीम पर आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2023 कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए जेआरएफ पाॅलिसी बनाई गई है, जिसमें डायरेक्ट रिसर्च स्कॉलर एडमिट किए जाएंगे। जनवरी-फरवरी 2023 में 26 जेआरएफ अवाॅर्डी यूनिवर्सिटी में आए हैं। एक अध्यापक को नोट्स तैयार करके अपने विषय को अच्छे से पढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर गुणवत्तापरक कार्यों को बढ़ावा दिया जा सकता है। भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी प्रतिभा का लोहा विश्व भर में मनवाया है। वैज्ञानिक सोच पैदा करके युवा शक्ति को एक नई दिशा प्रदान की जा सकती है।
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पोस्टर मेकिंग में बॉटनी विभाग की टीम प्रथम
विशिष्ट अतिथि कुलसचिव डॉ. राजेश कुमार बंसल ने कहा कि शोध के क्षेत्र में अनेक गुणवत्ता परक कार्य हुए हैं, जिसके फलस्वरूप दो पेटेंट पंजीकृत हुए हैं और 8 स्वीकृति के लिए भेजे हुए हैं। इस कार्यक्रम में ग्लोबल साइंस फॉर ग्लोबल वेल्बीइंग विषय पर पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता भी करवाई गई। 12 विद्यार्थियों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया। बॉटनी विभाग की टीम प्रथम स्थान पर, भौतिकी विभाग की टीम द्वितीय स्थान पर व एनर्जी एंड एनवायरमेंटल साइंस की टीम तृतीय स्थान पर रही। विजेताओं को मुख्य अतिथि ने सम्मानित किया।
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समाज हित को ध्यान में रखकर करना चाहिए शोध विषय का चयन : देवेंद्र मोहन
मुख्य वक्ता के रूप में गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय हिसार के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर देवेंद्र मोहन ने संबोधित किया। फोटोनिक्स मेटेरियल्स एंड टेक्नोलॉजी फॉर साइंटिफिक रेवोलुशन इन 21 सेंचुरी विषय पर अपना व्याख्यान देते हुए कहा कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान पर भी विद्यार्थियों को जोर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शोध विषय का चयन समाज हित को ध्यान में रखकर करना चाहिए। अपने पसंदीदा वैज्ञानिक को रोल मॉडल मानकर जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के विकास में वैज्ञानिकों का अहम योगदान है। इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अवसर पर फिजिकल साइंस के डीन प्रोफेसर सुशील कुमार, प्राचार्य डॉ शाम लाल फुटेला, डॉ राम मेहर दीक्षित, डॉ रचना मलिक, डॉ अमरीक, डॉ प्रियंका सहित अनेक विभागों के प्राध्यापक उपस्थित थे।