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Sirsa News: तेरे दर का छोड़कर किस दर जाऊं मैं...
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डबवाली। शहर के आर्य यज्ञशाला में हवन करते हुए आर्य समाज के लोग। आर्य समाज
डबवाली। आर्य समाज की ओर से यज्ञशाला में आयोजित रविवारीय साप्ताहिक हवन अध्यक्ष एसके आर्य के सानिध्य एवं यज्ञब्रह्मा विजय कुमार शास्त्री के ब्रह्मत्व में संपन्न हुआ। इसमें मुख्य यजमान के तौर पर कुलदीप सिंह पटवारी ने आहुतियां डालीं। इसके बाद महामंत्री डॉ. रामफल आर्य ने महर्षि दयानंद सरस्वती को समर्पित सुखी बसे संसार सब दुखिया रहे न कोय। हे प्रभु तुम शक्तिशाली हो बनाते सृष्टि को... एवं तेरे दर का छोड़कर किस दर जाऊं मैं... आदि भजन प्रस्तुत किए।
यज्ञब्रह्मा विजय कुमार शास्त्री ने कहा कि यज्ञो वै श्रेष्ठतम् कर्म अर्थात् प्रत्येक श्रेष्ठ कर्म यज्ञ कहलाता है और हवन यज्ञ करना सबसे श्रेष्ठ कर्म है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को शुद्ध करने में हवन यज्ञ का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि औषधीय गुणों से युक्त अनेक प्रकार की सामग्री हवन यज्ञ की पवित्र अग्नि में भस्म होकर पूरे वायुमंडल में विद्यमान होकर हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट कर देती हैं और पर्यावरण को शुद्ध बनाती है।
एसके आर्य ने कहा कि योगीराज श्री कृष्ण व मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम भी हवन यज्ञ किया करते थे। उन्होंने कहा कि जन्मदिन आदि शुभ अवसरों पर हमें यज्ञ अवश्य करना चाहिए, इससे समाज में लोगों के आपस में मिलने से एक-दूसरे को जानने व समझने का मौका मिलता है। तदोपरांत उन्होंने वैदिक प्रार्थना पढ़कर सुनाई।
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कोषाध्यक्ष एवं संपत्ति अधिकारी भारत मित्र छाबड़ा ने हवन यज्ञ की पवित्र अग्नि से अभिमंत्रित शुद्ध जल से एसके आर्य को जन्मदिन की बधाई देते हुए उन्हें दीर्घायु होने का आशीर्वाद दिया। इस मौके संस्था संरक्षक राज कुमार गर्ग लोहे वाले, श्याम लाल सिंगला आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में जयघोष व शांतिपाठ के बाद लड्डू का प्रसाद वितरित किया गया।
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यज्ञब्रह्मा विजय कुमार शास्त्री ने कहा कि यज्ञो वै श्रेष्ठतम् कर्म अर्थात् प्रत्येक श्रेष्ठ कर्म यज्ञ कहलाता है और हवन यज्ञ करना सबसे श्रेष्ठ कर्म है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को शुद्ध करने में हवन यज्ञ का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि औषधीय गुणों से युक्त अनेक प्रकार की सामग्री हवन यज्ञ की पवित्र अग्नि में भस्म होकर पूरे वायुमंडल में विद्यमान होकर हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट कर देती हैं और पर्यावरण को शुद्ध बनाती है।
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एसके आर्य ने कहा कि योगीराज श्री कृष्ण व मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम भी हवन यज्ञ किया करते थे। उन्होंने कहा कि जन्मदिन आदि शुभ अवसरों पर हमें यज्ञ अवश्य करना चाहिए, इससे समाज में लोगों के आपस में मिलने से एक-दूसरे को जानने व समझने का मौका मिलता है। तदोपरांत उन्होंने वैदिक प्रार्थना पढ़कर सुनाई।
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कोषाध्यक्ष एवं संपत्ति अधिकारी भारत मित्र छाबड़ा ने हवन यज्ञ की पवित्र अग्नि से अभिमंत्रित शुद्ध जल से एसके आर्य को जन्मदिन की बधाई देते हुए उन्हें दीर्घायु होने का आशीर्वाद दिया। इस मौके संस्था संरक्षक राज कुमार गर्ग लोहे वाले, श्याम लाल सिंगला आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में जयघोष व शांतिपाठ के बाद लड्डू का प्रसाद वितरित किया गया।