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मां-बाप ने बेटी को छोड़ा तो मौसी ने संभाला, खिलाड़ी बनाने के लिए गहने रखे गिरवी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 13 Oct 2021 11:42 PM IST
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When the parents left the daughter, the aunt took over, mortgaged the ornaments to make the player
अपने जीते हुए प्रमाण पत्र व मेडल के साथ अनामिका। - फोटो : Sirsa
सिरसा। समाज में संदेश दिया जाता है कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, बेटियां बोझ नहीं। लेकिन अभी भी समाज में कुछ लोग ऐसे हैं जो घटिया मानसिकता का परिचय देते हुए बेटी को बोझ समझते हैं। ऐसे ही एक मामले में जिस बेटी को मां-बाप दोनों ने अपनाने से इनकार कर दिया, उसे मौसी ने संभाला। आज वहीं बेटी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योगा खिलाड़ी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। मां-बाप के साथ छोड़ने की मायूसी को पीछे छोड़ गांव दिवान खेड़ा की अनामिका ने हौसलों की ऐसी उड़ान भरी कि इस रूढ़िवादी समाज में अपनी अलग पहचान बना ली।
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अनामिका जब तीन वर्ष की थी तो उसके माता-पिता घरेलू कलह के चलते एक दूसरे से अलग हो गए। दोनों ने बेटियों अनामिका और उसकी बड़ी बहन को बोझ समझकर उनके मामा के यहां छोड़ दिया। बेटे को पिता अपने साथ ले गया, वहीं मां ने कहीं और शादी कर ली। यहीं से उनकी मौसी वीरपाल कौर दोनों का सहारा बनीं। डबवाली की रहने वाली वीरपाल कौर के कोई संतान नहीं है। ऐसे में दोनों बेटियों को उन्होंने अपना लिया। दोनों बहनों में से मौसी ने बड़ी की फिलहाल शादी कर दी है। वहीं अनामिका योगा के क्षेत्र में अपना लोहा मनवा रही है।
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खेलकूद में रुझान देख मौसी ने बढ़ाया आगे
अनामिका ने बताया कि योगा खिलाड़ी बनना उसके लिए आसान नहीं था। माता-पिता छोड़ गए जिसके बाद मौसी ने ही पालन पोषण किया। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह आगे नहीं बढ़ पा रही थी। ऐसे में बहुत बार वह कई प्रतियोगिताओं में भाग भी नहीं ले सकी। हर प्रतियोगिता में जाने के लिए कोई साथ नहीं होता था। अकेले ही हर जगह जाना चुनौतीपूर्ण रहा। वहीं लोग तरह-तरह की बातें करते थे। जिससे लड़ना और भी अधिक मुश्किल था।
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मौसी ने गहने तक बेचकर बढ़ाया हौसला
मौसी वीरपाल कौर ने सिलाई व विधवा पेंशन से ही अनामिका और उसकी बड़ी बहन की परवरिश की। वहीं जब अनामिका को कहीं बाहर प्रतियोगिता के लिए जाना होता था तो पैसों की जरूरत होती थी, तब वह अपने गहने गिरवी रखकर उसे इंतजाम करती थीं।

गांव के बच्चों को सिखा रही है योग के गुर
अनामिका ने अभी 11वीं कक्षा की छात्रा है। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ वह गांव के बच्चों को योगा के गुर सिखाती है। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अनामिका प्रतिदिन योगाभ्यास भी जारी रखती है। अनामिका का कहना है कि जैसे उसके माता-पिता ने उसे बोझ समझकर छोड़ दिया ऐसा किसी ओर के साथ न हो इसलिए वह जितना हो सकता है बच्चों को योग सिखाती है।
अब तक ये अवॉर्ड किए हासिल
1. छठी कक्षा में जिलास्तरीय प्रतियोगिता
2. नौंवी कक्षा में नेशनल व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता
3. चार नेशनल मेडल
2 गोल्ड, 1 सिल्वर, 1 ब्रॉन्ज
4. अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल

योगा का अभ्यास करते अभ्यार्थी।

योगा का अभ्यास करते अभ्यार्थी।- फोटो : Sirsa

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