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Sirsa News: ओटू झील में बरसाती पानी की आवक बढ़ी, किसानों को धान की सिंचाई में मिली राहत

Tue, 11 Aug 2026 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Tue, 11 Aug 2026 12:32 AM IST
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water supply in otu lake
सिंचाई विभाग ने घग्गर नदी और ओटू झील से निकलने वाले सभी खरीफ चैनलों में पानी छोड़ा
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फोटो --- 40 से 42
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। बीते दिनों हुई बरसात के बाद ओटू झील में पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंचने से क्षेत्र के किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। पानी की उपलब्धता बढ़ने के साथ सिंचाई विभाग ने घग्गर नदी और ओटू झील से निकलने वाले सभी खरीफ चैनलों में पानी छोड़ दिया है। इससे धान की रोपाई और सिंचाई के काम में तेजी आई है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सोमवार को ओटू झील का जलस्तर 648.95 गेज पर नियंत्रित किया गया। फिलहाल ओटू हेड के सभी गेट बंद हैं। झील में अतिरिक्त पानी पहुंचने के कारण यह गेटों के ऊपर से बहकर आगे राजस्थान की ओर निकल रहा है।
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किसानों को सिंचाई का पूरा लाभ देने के लिए घग्गर नदी और झील से निकलने वाले सभी खरीफ चैनलों में पानी छोड़ा गया है। कुछ दिन पहले तक ओटू झील में पानी की कमी के कारण किसान धान की फसल को लेकर चिंतित थे।
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किसानों का कहना है कि धान की अच्छी पैदावार के लिए पर्याप्त पानी बेहद जरूरी है। खेतों में बरसाती पानी पहुंचने से मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है और बार-बार नलकूप चलाने की जरूरत कम हो जाती है।
किसान सुखविंदर सिंह, बलजीत सिंह, नत्था सिंह, करणवीर, प्रेमचंद, गुर साहब, अमरीक सिंह, बुट्टा सिंह और करण कुमार सहित अन्य किसानों ने बताया कि क्षेत्र में अभी बरसात कम हुई है, लेकिन ओटू झील में पानी की आवक होने से धान की रोपाई और सिंचाई में काफी राहत मिली है।
उन्होंने बताया कि खेतों में पर्याप्त पानी ठहरने से धान की जड़ों को आवश्यक नमी मिलती है, जिससे पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और फसल की रंगत भी अच्छी रहती है। इससे पैदावार अच्छी होने की उम्मीद बढ़ गई है ।

किसानों के अनुसार नहरों और खरीफ चैनलों में बरसाती पानी उपलब्ध होने से भूमिगत जल का दोहन भी कम होगा। इससे बिजली और डीजल की खपत घटने के साथ सिंचाई लागत में कमी आएगी। साथ ही खेतों में पानी पहुंचने से भूजल स्तर के पुनर्भरण में भी मदद मिलेगी। किसानों ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में अच्छी बरसात हुई तो धान की फसल के लिए सिंचाई का पर्याप्त पानी उपलब्ध रहेगा।
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