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जल जहर : बंजर हो रही धरती, बीमार धरतीपुत्र

Thu, 08 Feb 2024 12:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Thu, 08 Feb 2024 12:17 AM IST
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Water Poison: Earth becoming barren, son of the earth sick
बलविंद्र स्वामी
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सिरसा। शहर से तीन किलोमीटर दूर बसे नटार गांव में भूमि अपनी उर्वरा क्षमता खो रही है। गांव के साथ लगती 50 एकड़ भूमि पूरी तरह बंजर हो चुकी है। खेत में फसल उग सके, इसके लिए किसान दूसरे जगह से मिट्टी लाकर खेतों में बिछाना पड़ता है। अत्यधिक दोहन के कारण यहां भूजल स्तर 500 फुट गहराई में पहुंच चुका है। काला शोरा यानि अवशिष्ट सोडियम कार्बोनेट (आरएससी) की मात्रा अधिक होने के कारण यह पानी पीने लायक भी नहीं है। जन स्वास्थ्य विभाग इस पानी को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक घोषित कर चुका है, पर नहरी पानी की उपलब्ध नहीं होने के कारण यहां के लोग 25 साल से इसी पानी को पीने के लिए मजबूर हैं। कहते हैं- यह जल धीमा जहर है, पर बिना पानी कैसे जीएं।
25 साल से नहरी पानी की कमी इस गांव में खेतों के लिए अभिशाप बन गई है। किसान जीवनयापन और खेती के लिए भूमिगत पानी पर निर्भर हैं, लेकिन अत्याधिक दोहन क कारण भूजल-स्तर 500 फुट तक पहुंच गया है। ऐसे में किसान नहरी पानी की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। इनका कहना है कि यदि उन्हें जल्द ही नहरी पानी नहीं मिला तो उन्हें पलायन करना पड़ेगा।
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किसानों के अनुसार मौजूदा समय में भूमिगत जल भूजल से खेतों की सिंचाई करना भी अब संभव नहीं रहा है। वर्ष 2009 में जन स्वास्थ्य विभाग की लैब में जब पानी की जांच की गई तो इसमें सबसे अधिक काला शोरे की मात्रा पाई गई थी। इसके बाद से निरंतर पानी और भूमि की जांच किसान करवा रहे हैं। हालात खराब ही हुए हैं। अपनी खत्म होती भूमि को देखकर नटार के किसान पिछले 15 वर्षों से खेती के लिए घग्गर नदी के पानी की मांग कर रहे हैं। आलम यह है कि गांव अन्य किसान कृषि भूमि को बंजर होने बचाने के लिए हर साल दूसरी मिट्टी जमीन डालकर खेती का जुगाड़ कर रहे हैं। संवाद
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पीने के लिए भी नहीं है नहरी पानी
गांव नटार में खेती के साथ साथ पीने के लिए भी नहरी पानी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों की माने तो सालों से भूमिगत जल पीकर ही गुजारा हो रहा है। नहरी पीने के लिए नहीं रहा है। जिस तरह से भूजलस्तर गिर रहा है। गांव में भविष्य में पीने के पानी की कमी भी हो जाएगी।
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जानें, पीने लायक क्यों नहीं यह पानी

पेयजल के लिए 150 से 250 तक टीडीएस अच्छा है। 300 टीडीएस तक पानी साफ माना जाता है। नहरी पानी का टीडीएस 500 तक होने पर भी पीने योग्य माना जा सकता है। वहीं, भूमिगत जल का टीडीएस 1200 से अधिक हो तो पीना खतरनाक है। नटार गांव के पानी का टीडीएस 4000- 5500 तक है। यह सेहत के लिए हानिकारक है। नटार के भूमिगत जल में लवण की मात्रा इतनी अधिक है कि इससे चाय बनाने पर चाय फट जाती है, वहीं दाल भी नहीं पकाई जा सकती। इस पानी को पीकर कई लोग बीमार हो चुके हैं।



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पहले वीटा प्लांट के समीप से निकलने वाले माइनर का पानी हमारे गांव में पहुंचता था । लेकिन पिछले 25 सालों से वह भी बंद हो चुका है। सिंचाई तो दूर की बात है नहरी पानी पीने के लिए भी गांववासियों को नहीं मिल रहा है। - हीरा सिंह, ग्रामीण। फोटो - 27


वर्ष 2009 में गांव के पेयजल की जांच करवाई गई थी तो जन स्वास्थ्य विभाग ने पानी की गुणवत्ता को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया था। इसके बाद से हर वर्ष जांच करवाते है और परिणाम वहीं निकलकर सामने आते हैं। -राकेश कुमार, पूर्व सरपंच,। फोटो -- 28


गांव में कृषि भूमि के लिए नहरी पानी नहीं उपलब्ध हो रहा है। इसकी वजह से हमारी भूमि बंजर होती जा रही है। गांव का पेयजल भी पीने के लिए उपयोगी नहीं है। भूमिगत पानी का ज्याद दोहन करने से खेतों में लवणीयता आ गई। - लक्ष्य सिंह, ग्रामीण नटार। फोटो -29



पिछले 20 से 25 सालों से गांव में नहरी पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। भूमिगत जल 400 से 500 फुट पहुंच गया है। सिंचाई के लिए भी अब इस पानी का प्रयोग किसान नहीं कर पा रहे है। फसलों को लिए यह उपयोगी भी नहीं है। - ललित सिंह, ग्रामीण नटार। फोटो -- 30




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काला शोरा यानि अवशिष्ट सोडियम कार्बोनेट की वजह से वायु संचार घट जाता है, जिसकी वजह से जमीन सख्त होने लगती है और फैसले अंकुरित होना कम हो जाती है। साथ ही भूमि पर पानी जमा होने लगता है।



डा. जीएएस जाखड़, कोऑर्डिनेटर कृषि विज्ञान केंद्र, सिरसा।
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