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अनोखी शादी : बेसहारा मुक बधिर कन्या को मिला जीवनभर का सहारा
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सिरसा। कहते हैं, जिनका कोई नहीं, उसका तो खुदा है यारो। खुदा अपने बंदे भेजता है ताकि इस दुनिया में कोई भी बेसहारा न रहे। सिरसा के भाई कन्हैया आश्रम में रविवार को अनोखी शादी हुई। शादी के लिए तैयार होकर दुल्हन एंबुलेंस में आई। धूमधाम से शादी हुई। फर्क सिर्फ इतना रहा कि बारात का स्वागत करने के लिए परिवार के सदस्य नहीं बल्कि आश्रम के पदाधिकारी और यहां रहने वाले लोग रहे।
भाई कन्हैया मानव सेवा ट्रस्ट की ओर से आश्रम संचालित किया जा रहा है। इस आश्रम में मंदबुद्धि, बेसहारा महिलाओं, बच्चों और अन्य लोगों को सहारा दिया जाता है। करीब दो वर्ष पहले किसी दूसरे जिले से एक एनजीओ ने यहां एक युवती को भेजा। उक्त युवती का नाम पूनम है और वह मूक बधिर है। 10वीं तक की स्पेशल एजुकेशन से शिक्षा प्राप्त पूनम शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है। फर्क सिर्फ इतना है कि पूनम अनाथ है इसलिए आश्रम ने उसे संभाला। आश्रम के संचालक गुरविंद्र सिंह ने पूनम की शादी करके घर बसाने की योजना बनाई। मूक बधिर लड़की के लिए रिश्ता ढूंढा गया तो लड़का मिल गया। हनुमानगढ़ निवासी मूक बधिर सुरेंद्र कुमार से रिश्ता तय कर किया। रविवार को दोनों की शादी का कार्यक्रम निर्धारित किया गया। इससे पहले हल्दी, मेहंदी सहित शादी की सभी रस्में भी अदा की गई। आश्रम संचालक गुरविंद्र सिंह की उपस्थिति में ट्रस्टी भूप सोनी ने कन्यादान किया। जबकि पूनम के परिवार के सदस्यों की भूमिका आश्रम के सेवादारों, यहां रहने वाले अन्य लोगों ने निभाई। धूमधाम से शादी कर दी गई और जरूरत का सामान भी दिया
नजर आया अनोखा नजारा, एंबुलेंस में आई दुल्हन
शादी के लिए पूनम को तैयार होने के लिए भेजा गया। दोपहर को फेरे होने थे। तैयार होकर पूनम आई तो भाई कन्हैया आश्रम की एंबुलेंस में तैयार होकर लौटी। सामान्य गाड़ी की बजाय एंबुलेंस में इसलिए लाया गया ताकि आमजन को संदेश दिया जा सके कि आश्रम में भी परिवार रहता है। यहां कोई भी बेसहारा नहीं है और सब कुछ हमारा ही है। बारात का स्वागत धूमधाम से किया गया और शादी के बाद विदाई के वक्त पूनम के लिए पूरा आश्रम परिवार भावुक हो गया।
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एनजीओ ने आश्रम में भेजा तो पूनम बोली : मेरी जिंदगी ऐसे ही कटेगी?
पलवल के एक एनजीओ को छोटी सी उम्र की लड़की लावारिस हालत में मिली जो मूक बधिर थी। सरकारी नियम कहता है कि एनजीओ के पास 18 साल तक के ही बच्चे रह सकते हैं। इसके बाद या तो उनकी शादी करवाई जाए या वे चाहे जहां चले जाएं। लेकिन पूनम बालिग हुई तो एनजीओ वालों ने सिरसा आश्रम में भेज दिया। पूनम ने आश्रम संचालक गुरविंद्र सिंह से इशारों में पूछा कि क्या पूरी जिंदगी ऐसे ही कटेगी। इस पर गुरविंद्र सिंह ने उसे कहा कि रिश्ता ढूंढकर शादी करवाएंगे और घर बसाएंगे। इतना ही नहीं वे जिंदगी भर मायका की भूमिका भी निभाएंगे। अब पूनम की शादी पूरी रस्मों के साथ हो गई है। गुरविंद्र सिंह कहते हैं कि आश्रम पूरी जिंदगी भर पूनम के साथ मायका का रिश्ता भी निभाएगा और उसके कभी महसूस नहीं होने देंगे की वो अनाथ है।
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भाई कन्हैया मानव सेवा ट्रस्ट की ओर से आश्रम संचालित किया जा रहा है। इस आश्रम में मंदबुद्धि, बेसहारा महिलाओं, बच्चों और अन्य लोगों को सहारा दिया जाता है। करीब दो वर्ष पहले किसी दूसरे जिले से एक एनजीओ ने यहां एक युवती को भेजा। उक्त युवती का नाम पूनम है और वह मूक बधिर है। 10वीं तक की स्पेशल एजुकेशन से शिक्षा प्राप्त पूनम शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है। फर्क सिर्फ इतना है कि पूनम अनाथ है इसलिए आश्रम ने उसे संभाला। आश्रम के संचालक गुरविंद्र सिंह ने पूनम की शादी करके घर बसाने की योजना बनाई। मूक बधिर लड़की के लिए रिश्ता ढूंढा गया तो लड़का मिल गया। हनुमानगढ़ निवासी मूक बधिर सुरेंद्र कुमार से रिश्ता तय कर किया। रविवार को दोनों की शादी का कार्यक्रम निर्धारित किया गया। इससे पहले हल्दी, मेहंदी सहित शादी की सभी रस्में भी अदा की गई। आश्रम संचालक गुरविंद्र सिंह की उपस्थिति में ट्रस्टी भूप सोनी ने कन्यादान किया। जबकि पूनम के परिवार के सदस्यों की भूमिका आश्रम के सेवादारों, यहां रहने वाले अन्य लोगों ने निभाई। धूमधाम से शादी कर दी गई और जरूरत का सामान भी दिया
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नजर आया अनोखा नजारा, एंबुलेंस में आई दुल्हन
शादी के लिए पूनम को तैयार होने के लिए भेजा गया। दोपहर को फेरे होने थे। तैयार होकर पूनम आई तो भाई कन्हैया आश्रम की एंबुलेंस में तैयार होकर लौटी। सामान्य गाड़ी की बजाय एंबुलेंस में इसलिए लाया गया ताकि आमजन को संदेश दिया जा सके कि आश्रम में भी परिवार रहता है। यहां कोई भी बेसहारा नहीं है और सब कुछ हमारा ही है। बारात का स्वागत धूमधाम से किया गया और शादी के बाद विदाई के वक्त पूनम के लिए पूरा आश्रम परिवार भावुक हो गया।
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एनजीओ ने आश्रम में भेजा तो पूनम बोली : मेरी जिंदगी ऐसे ही कटेगी?
पलवल के एक एनजीओ को छोटी सी उम्र की लड़की लावारिस हालत में मिली जो मूक बधिर थी। सरकारी नियम कहता है कि एनजीओ के पास 18 साल तक के ही बच्चे रह सकते हैं। इसके बाद या तो उनकी शादी करवाई जाए या वे चाहे जहां चले जाएं। लेकिन पूनम बालिग हुई तो एनजीओ वालों ने सिरसा आश्रम में भेज दिया। पूनम ने आश्रम संचालक गुरविंद्र सिंह से इशारों में पूछा कि क्या पूरी जिंदगी ऐसे ही कटेगी। इस पर गुरविंद्र सिंह ने उसे कहा कि रिश्ता ढूंढकर शादी करवाएंगे और घर बसाएंगे। इतना ही नहीं वे जिंदगी भर मायका की भूमिका भी निभाएंगे। अब पूनम की शादी पूरी रस्मों के साथ हो गई है। गुरविंद्र सिंह कहते हैं कि आश्रम पूरी जिंदगी भर पूनम के साथ मायका का रिश्ता भी निभाएगा और उसके कभी महसूस नहीं होने देंगे की वो अनाथ है।

शादी के बाद नवविवाहित जोड़े को विदा करते हुए गुरविंद्र सिंह।- फोटो : Sirsa