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Sirsa News: तीन श्रद्धालुओं ने अपनाया तपस्वी जीवन, मिले नए नाम
Thu, 11 Dec 2025 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Thu, 11 Dec 2025 11:18 PM IST
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सिरसा। डेरा बाबा ब्रह्मदास अपने चेले को तिलक लगाते हुए। स्रोत : स्वयं
सिरसा।
डेरा बाबा भूमणशाह में गुरुवार को भैरव की आम सभा के दौरान गद्दीनशीन बाबा ब्रह्मदास महाराज के पावन सानिध्य में साधु दीक्षा समारोह बड़े ही श्रद्धाभाव व उत्साह के साथ संपन्न हुआ। साधु-संतों और ग्रामीणों की उपस्थिति में आयोजित इस भव्य आयोजन में अध्यात्म और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
डेरा बाबा भूमणशाह में कई वर्षों से सेवा कर रहे श्रद्धालु संदीप कुमार निवासी खुइया सरवर (जिला फाजिल्का, पंजाब), जितेंद्र कुमार निवासी संगर सरिस्ता (सिरसा) और सुरेंद्र कुमार निवासी पिंड चक मानेवाला (जलालाबाद, फाजिल्का) ने कुछ माह पहले पूर्ण साधु बनकर उदासी संप्रदाय के तपस्वी जीवन को अपनाने की इच्छा व्यक्त की थी। इस अवसर पर तीनों को नए आध्यात्मिक नाम भी प्रदान किए गए।
तीनों श्रद्धालुओं ने उदासीन बाबा भूमण शाह की शिक्षाओं और उदासी संप्रदाय की मर्यादाओं का पालन करने, सांसारिक मोह-माया से दूर रहते हुए बिना स्वार्थ और लालच के सेवा व तपस्या का जीवन व्यतीत करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन्होंने परिवार की सहमति से लिया है।
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गुरु महाराज ने उनके निर्णय पर परिवारों से भी औपचारिक सहमति प्राप्त की। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद बाबा ब्रह्म दास महाराज ने तीनों के आग्रह को स्वीकार किया और उन्हें दीक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया।
दीक्षा समारोह के दौरान गुरु महाराज ने उदासी परंपरा के अनुसार अभिषेक कर तीनों को सिरोपा भेंट किया और अपने शिष्यों के रूप में स्वीकार करते हुए उन्हें पूर्ण साधु का दर्जा प्रदान किया।
जानें...किसको क्या नाम मिला
अब संदीप कुमार को शिवदास, जितेंद्र कुमार को राजेंद्रानंद, सुरेंद्र कुमार को संतोष दास के नाम से जाना जाएगा। गुरु महाराज ने घोषणा की कि दीक्षा के साथ ही इनका सांसारिक संबंध समाप्त माना जाएगा और उनके नए नामों को रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा।
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डेरा बाबा भूमणशाह में गुरुवार को भैरव की आम सभा के दौरान गद्दीनशीन बाबा ब्रह्मदास महाराज के पावन सानिध्य में साधु दीक्षा समारोह बड़े ही श्रद्धाभाव व उत्साह के साथ संपन्न हुआ। साधु-संतों और ग्रामीणों की उपस्थिति में आयोजित इस भव्य आयोजन में अध्यात्म और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
डेरा बाबा भूमणशाह में कई वर्षों से सेवा कर रहे श्रद्धालु संदीप कुमार निवासी खुइया सरवर (जिला फाजिल्का, पंजाब), जितेंद्र कुमार निवासी संगर सरिस्ता (सिरसा) और सुरेंद्र कुमार निवासी पिंड चक मानेवाला (जलालाबाद, फाजिल्का) ने कुछ माह पहले पूर्ण साधु बनकर उदासी संप्रदाय के तपस्वी जीवन को अपनाने की इच्छा व्यक्त की थी। इस अवसर पर तीनों को नए आध्यात्मिक नाम भी प्रदान किए गए।
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तीनों श्रद्धालुओं ने उदासीन बाबा भूमण शाह की शिक्षाओं और उदासी संप्रदाय की मर्यादाओं का पालन करने, सांसारिक मोह-माया से दूर रहते हुए बिना स्वार्थ और लालच के सेवा व तपस्या का जीवन व्यतीत करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन्होंने परिवार की सहमति से लिया है।
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गुरु महाराज ने उनके निर्णय पर परिवारों से भी औपचारिक सहमति प्राप्त की। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद बाबा ब्रह्म दास महाराज ने तीनों के आग्रह को स्वीकार किया और उन्हें दीक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया।
दीक्षा समारोह के दौरान गुरु महाराज ने उदासी परंपरा के अनुसार अभिषेक कर तीनों को सिरोपा भेंट किया और अपने शिष्यों के रूप में स्वीकार करते हुए उन्हें पूर्ण साधु का दर्जा प्रदान किया।
जानें...किसको क्या नाम मिला
अब संदीप कुमार को शिवदास, जितेंद्र कुमार को राजेंद्रानंद, सुरेंद्र कुमार को संतोष दास के नाम से जाना जाएगा। गुरु महाराज ने घोषणा की कि दीक्षा के साथ ही इनका सांसारिक संबंध समाप्त माना जाएगा और उनके नए नामों को रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा।