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आत्मा का मन और इंद्रियों पर शासन मनुष्य को बनाता है महान : पंडित सुगन शर्मा
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सिरसा। कथा सुनते हुए श्रद्धालु। विज्ञप्ति
सिरसा। प्रभात पैलेस में श्री बंशीवट कथा समिति की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास पंडित सुगन शर्मा ने कथा का पाठ किया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कंस वध और अन्य राक्षसों के अंत पर चर्चा की। भागवत कथा के दौरान श्री कृष्ण और राधा के विवाह व सखियों संग रास की सुंदर झांकियां प्रस्तुत की गई।
पंडित सुगन शर्मा ने कहा कि आत्मा का मन और इंद्रियों पर शासन मनुष्य को महान बनाता है। भागवत में व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के चार सूत्र दिए गए हैं। जिनमें संयम, श्रेष्ठ कर्म, नाम जप और यज्ञ है। उन्होंने कहा कि वेदानुकूल शुभ कर्म, आचरण, धन, यश, मन, सुख-सम्मान का दाता है, जबकि पाप निकृष्ट कर्म मानव को पतन की और ले जाता है।
संयम का अर्थ-शरीर, इंद्रियों और मन पर अनुशासन है। इंद्रियों और मन का स्वभाव है। विषयभोगों, विलास और निकृष्ट कर्मों का आचरण। कथा व्यास ने बताया कि परमात्मा स्वयं प्रेम का ही रूप है। प्रेम से ऊपर कोई संबंध नहीं है, लेकिन प्रेम निष्कपट और निष्काम काम होना चाहिए, तभी वह परमात्मा को प्रिय होता है।
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कथा दौरान भगवान श्रीकृष्ण के कंस का वध करने, श्री कृष्ण संग रुक्मणि के विवाह, मां कात्यानी की पूजा का महत्व समझाया। तत्पश्चात श्रीकृष्ण व रुक्मिणी विवाह की झांकी निकाली गई। इस दौरान मंगल गीत गाए गए। कथा के अंत में श्री बंशीवट कथा समिति के प्रधान इंद्रकुमार चिड़ावेवाला, उपप्रधान सुनील गोयल, सचिव संजय तायल, सहायक उपप्रधान राधेश्याम बंसल, कोषाध्यक्ष रामकुमार जैन आदि मौजूद रहे।
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पंडित सुगन शर्मा ने कहा कि आत्मा का मन और इंद्रियों पर शासन मनुष्य को महान बनाता है। भागवत में व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के चार सूत्र दिए गए हैं। जिनमें संयम, श्रेष्ठ कर्म, नाम जप और यज्ञ है। उन्होंने कहा कि वेदानुकूल शुभ कर्म, आचरण, धन, यश, मन, सुख-सम्मान का दाता है, जबकि पाप निकृष्ट कर्म मानव को पतन की और ले जाता है।
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संयम का अर्थ-शरीर, इंद्रियों और मन पर अनुशासन है। इंद्रियों और मन का स्वभाव है। विषयभोगों, विलास और निकृष्ट कर्मों का आचरण। कथा व्यास ने बताया कि परमात्मा स्वयं प्रेम का ही रूप है। प्रेम से ऊपर कोई संबंध नहीं है, लेकिन प्रेम निष्कपट और निष्काम काम होना चाहिए, तभी वह परमात्मा को प्रिय होता है।
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कथा दौरान भगवान श्रीकृष्ण के कंस का वध करने, श्री कृष्ण संग रुक्मणि के विवाह, मां कात्यानी की पूजा का महत्व समझाया। तत्पश्चात श्रीकृष्ण व रुक्मिणी विवाह की झांकी निकाली गई। इस दौरान मंगल गीत गाए गए। कथा के अंत में श्री बंशीवट कथा समिति के प्रधान इंद्रकुमार चिड़ावेवाला, उपप्रधान सुनील गोयल, सचिव संजय तायल, सहायक उपप्रधान राधेश्याम बंसल, कोषाध्यक्ष रामकुमार जैन आदि मौजूद रहे।