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Sirsa News: भीषण गर्मी ने प्रभावित की जिले की सब्जियों व फलों की खेती

Fri, 31 May 2024 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Fri, 31 May 2024 12:00 AM IST
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The scorching heat affected the cultivation of vegetables and fruits in the district
सिरसा। जिले में पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब सब्जियों व फलों पर भी पड़ने लगा है। गर्मी का असर यह है कि घीया, करेला, तरबूज व टिंडा की सही से फ्रुटिंग (फल के फलने की प्रक्रिया) नहीं हो रही है। यही नहीं किन्नू के बागों पर भी गर्मी का असर दिखाई देने लगा है। गर्मी से किन्नू के पौधों पर लगने वाली टिंडी भी झड़ने लगी है। बागवानी विभाग की माने तो जिस प्रकार से गर्मी पड़ रही है, उससे पौधों पर फलने की प्रक्रिया पर काफी बुरा असर पड़ा है।
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बता दें कि जिले में इस बार भीषण गर्मी पड़ रही है। इस सप्ताह तो अधिकतम तापमान 50 डिग्री को पार कर चुका है। पिछले एक सप्ताह से तापमान 47-48 डिग्री तक बना हुआ है। ऐसे में बढ़े तापमान का असर मौसमी सब्जियों व फलों की खेती पर भी आने लगा है। विशेषज्ञों की माने तो इस बार गर्मी इतनी भीषण है कि वाष्पीकरण के कारण धरती लगातार गर्म होती जा रही है। इसका असर जिले में इस बार करेला, तरबूज, घीया व टिंडा की बीजी गई सब्जियों फ्रुटिंग पर हो रहा है। यानि सब्जियों पर लगने वाला फल पनप नहीं पा रहा है, क्योंकि पौधों की जड़ गर्मी से काफी प्रभावित हो रही हैं। नमी की कमी के कारण पौधों को सही तरीके से पानी नहीं मिल रहा। यह सब्जियों के पौधों के लिए काफी नुकसानदायक हो रहा है।
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यही हाल किन्नू के पौधों पर हो रहा है। इस समय किन्नू के पौधों पर फूल आने के बाद फाल आने शुरू हुए थे लेकिन भीषण गर्मी के चलते फाल जमीन पर गिरने लगे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पौधों की जड़ों में नमी समाप्त हो जाती है, तो बधवार व फलों को सही पोटाश और नाइट्रोजन नहीं मिलता, जिस कारण वह झड़ने लगते हैं।
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-जिले में सब्जियों की खेती
सिरसा में इस बार करेला की 60 एकड़, घीया की 40 एकड़, टिंडा की 30 एकड़ तथा तरबूज की 180 एकड़ जमीन पर खेती हुई है। इसके अलावा 15 हजार एकड़ में किन्नू के बाग लगे हुए हैं। इनसे होने वाली पैदावार भीषण गर्मी से प्रभावित हो रही है।

-करें फसलों का बचाव
बागवानी विभाग के विशेषज्ञों ने बताया कि सब्जियों व फलों को गर्मी से बचाने का एकमात्र उपाय यही है कि उनकी जड़ों के साथ पराली को लगा दिया जाए और दो दिन बाद सिंचाई करें। इससे वाष्पीकरण कम होगा और पौधों को उचित मात्रा में पानी मिलेगा। इसके अलावा पोटाश की मात्रा को भी बढ़ाया जाए। मिट्टी का तापमान संतुलित करने का एकमात्र उपाय लगातार पानी की सिंचाई करना ही है और साथ ही पराली का प्रयोग।



भीषण गर्मी का असर सब्जियों व फलों पर हो रहा है। जिले में मौसमी सब्जियों घीया, करेला, टिंडा व तरबूज पर इसका असर पड़ रहा है। उनके फल पनप नहीं पा रहे हैं। किन्नू के पौधों पर लगे छोटे फल भी झड़ रहे हैं।
-डॉ. पुष्पेंद्र सिंह, जिला बागवानी अधिकारी।
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