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पद्मश्री सम्मान मेरा नहीं, पूरे गांव और देश की बेटियों की मेहनत का सम्मान : सविता पूनिया
Sat, 27 Jun 2026 01:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 27 Jun 2026 01:02 AM IST
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सविता पूनिया
डिंग मंडी(सिरसा)। राष्ट्रपति के हाथों पद्मश्री सम्मान प्राप्त करने के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम की गोलकीपर सविता पूनिया पहली बार अपने पैतृक गांव जोधकां पहुंचीं। उन्होंने संवाद न्यूज एजेंसी के संवाददाता से विशेष बातचीत करते हुए कहा कि गांव पहुंचने पर उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि उनके माता-पिता, परिवार, कोच, साथी खिलाड़ियों, गांव और देश की हर उस बेटी का है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत कर रही है। उन्होंने कहा कि गांव की मिट्टी से मिला संस्कार और परिवार का विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है।
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पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद पहली बार अपने घर लौटने पर कैसा महसूस हो रहा है?
जवाब : घर पहुंच कर बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। इतना बड़ा अवॉर्ड मिलना मेरे लिए और परिवार के लिए बहुत बड़ी बात है। गांव की मिट्टी से मेरा विशेष लगाव है और यहां आकर हमेशा नई ऊर्जा मिलती है।
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जब राष्ट्रपति के हाथों पद्मश्री लिया, उस पल आपके मन में सबसे पहले क्या आया?
जवाब : वह पल मेरे जीवन का सबसे भावुक और यादगार क्षण था। सम्मान लेते समय सबसे पहले अपने माता-पिता, परिवार, कोच और उन सभी लोगों का चेहरा आंखों के सामने आया जिन्होंने हर मुश्किल समय में मेरा साथ दिया। लगा कि वर्षों की मेहनत और संघर्ष का फल मिल गया।
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आपके खेल जीवन में सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?
जवाब : शुरुआत में सुविधाओं की कमी थी। गांव से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। कई बार कठिन परिस्थितियां आईं लेकिन परिवार के सहयोग, कोच के मार्गदर्शन और अपने लक्ष्य पर विश्वास ने कभी हार नहीं मानने दी। हर चुनौती ने मुझे और मजबूत बनाया।
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अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय आप किसे देना चाहेंगी?
जवाब : मेरी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय मेरे माता-पिता, परिवार, कोच और पूरी टीम को जाता है। उन्होंने हर परिस्थिति में मेरा हौसला बढ़ाया। यदि उनका विश्वास और सहयोग नहीं होता तो शायद मैं आज इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाती।
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क्या आपको लगता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं की अभी भी कमी है?
जवाब : पहले की तुलना में काफी सुधार हुआ है लेकिन अभी भी गांवों में अच्छी खेल सुविधाओं, प्रशिक्षकों और संसाधनों की जरूरत है। यदि खिलाड़ियों को सही माहौल और अवसर मिलें तो ग्रामीण क्षेत्रों से कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं। सरकार और समाज दोनों को इस दिशा में लगातार काम करना चाहिए।
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पद्मश्री सम्मान के बाद आपकी आगे की क्या योजनाएं हैं?
जवाब : मेरा पूरा ध्यान अब आगामी विश्व कप की तैयारियों पर है। मैं अपनी फिटनेस और प्रदर्शन पर लगातार काम कर रही हूं। मेरी कोशिश रहेगी कि टीम के साथ मिलकर भारत के लिए बेहतरीन प्रदर्शन करूं और देश को विश्व कप जिताने में अपनी पूरी भूमिका निभाऊं।
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गांव की बेटियों को आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
जवाब : मैं गांव की हर बेटी से कहना चाहूंगी कि अपने सपनों को कभी छोटा मत समझिए। मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। अगर एक साधारण गांव की बेटी देश के लिए खेलते हुए पद्मश्री तक पहुंच सकती है तो कोई भी बेटी अपनी मंजिल हासिल कर सकती है। परिस्थितियां चाहे जैसी हों, मेहनत करना कभी मत छोड़िए। सविता पूनिया ने कहा कि पद्मश्री सम्मान उनके लिए जिम्मेदारी भी बढ़ाता है। अब उनका प्रयास रहेगा कि अपने प्रदर्शन से देश का नाम और ऊंचा करें तथा नई पीढ़ी के खिलाड़ियों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को खेलों के लिए प्रेरित करती रहें।
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पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद पहली बार अपने घर लौटने पर कैसा महसूस हो रहा है?
जवाब : घर पहुंच कर बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। इतना बड़ा अवॉर्ड मिलना मेरे लिए और परिवार के लिए बहुत बड़ी बात है। गांव की मिट्टी से मेरा विशेष लगाव है और यहां आकर हमेशा नई ऊर्जा मिलती है।
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जब राष्ट्रपति के हाथों पद्मश्री लिया, उस पल आपके मन में सबसे पहले क्या आया?
जवाब : वह पल मेरे जीवन का सबसे भावुक और यादगार क्षण था। सम्मान लेते समय सबसे पहले अपने माता-पिता, परिवार, कोच और उन सभी लोगों का चेहरा आंखों के सामने आया जिन्होंने हर मुश्किल समय में मेरा साथ दिया। लगा कि वर्षों की मेहनत और संघर्ष का फल मिल गया।
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आपके खेल जीवन में सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?
जवाब : शुरुआत में सुविधाओं की कमी थी। गांव से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। कई बार कठिन परिस्थितियां आईं लेकिन परिवार के सहयोग, कोच के मार्गदर्शन और अपने लक्ष्य पर विश्वास ने कभी हार नहीं मानने दी। हर चुनौती ने मुझे और मजबूत बनाया।
अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय आप किसे देना चाहेंगी?
जवाब : मेरी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय मेरे माता-पिता, परिवार, कोच और पूरी टीम को जाता है। उन्होंने हर परिस्थिति में मेरा हौसला बढ़ाया। यदि उनका विश्वास और सहयोग नहीं होता तो शायद मैं आज इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाती।
क्या आपको लगता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं की अभी भी कमी है?
जवाब : पहले की तुलना में काफी सुधार हुआ है लेकिन अभी भी गांवों में अच्छी खेल सुविधाओं, प्रशिक्षकों और संसाधनों की जरूरत है। यदि खिलाड़ियों को सही माहौल और अवसर मिलें तो ग्रामीण क्षेत्रों से कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं। सरकार और समाज दोनों को इस दिशा में लगातार काम करना चाहिए।
पद्मश्री सम्मान के बाद आपकी आगे की क्या योजनाएं हैं?
जवाब : मेरा पूरा ध्यान अब आगामी विश्व कप की तैयारियों पर है। मैं अपनी फिटनेस और प्रदर्शन पर लगातार काम कर रही हूं। मेरी कोशिश रहेगी कि टीम के साथ मिलकर भारत के लिए बेहतरीन प्रदर्शन करूं और देश को विश्व कप जिताने में अपनी पूरी भूमिका निभाऊं।
गांव की बेटियों को आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
जवाब : मैं गांव की हर बेटी से कहना चाहूंगी कि अपने सपनों को कभी छोटा मत समझिए। मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। अगर एक साधारण गांव की बेटी देश के लिए खेलते हुए पद्मश्री तक पहुंच सकती है तो कोई भी बेटी अपनी मंजिल हासिल कर सकती है। परिस्थितियां चाहे जैसी हों, मेहनत करना कभी मत छोड़िए। सविता पूनिया ने कहा कि पद्मश्री सम्मान उनके लिए जिम्मेदारी भी बढ़ाता है। अब उनका प्रयास रहेगा कि अपने प्रदर्शन से देश का नाम और ऊंचा करें तथा नई पीढ़ी के खिलाड़ियों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को खेलों के लिए प्रेरित करती रहें।