{"_id":"691615c7f69022067c0b17f7","slug":"the-municipal-council-is-being-lax-in-providing-documents-in-the-ndc-fraud-case-sirsa-news-c-128-1-svns1027-147587-2025-11-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirsa News: एनडीसी फर्जीवाड़े में नगर परिषद दस्तावेज देने में अपना रहा ढुलमूल रवैया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirsa News: एनडीसी फर्जीवाड़े में नगर परिषद दस्तावेज देने में अपना रहा ढुलमूल रवैया
विज्ञापन
सिरसा। नगर परिषद की ओर से जारी की गई एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) से कंगनपुर की हुई फर्जी रजिस्ट्री मामले में अभी तक पुलिस को दस्तावेज नहीं सौंपे गए हैं। इस मामले में नगर परिषद को सदर थाना पुलिस ने दस्तावेज के लिए पत्र जारी किया था। पत्र मिलने के बाद भी नगर परिषद प्रशासन अभी तक दस्तावेज मुहैया करवाने के लिए ढुलमुल रवैया अपनाए हुए है।
हालांकि, इस मामले में नगर परिषद कार्यकारी अधिकारी सुनील रंगा का कहना है कि जिला नगर आयुक्त से इस मामले में विचार-विमर्श के बाद ही आगामी प्रक्रिया को अमल में लाया जाएगा। जिला नगर आयुक्त विरेंद्र सहरावत अनुमति मिलने के बाद ही दस्तावेज देने संबंधी कार्रवाई की जाएगी। जब तक नगर परिषद से दस्तावेज नहीं मिलते हैं तब तक पुलिस आगे की कार्रवाई को शुरू नहीं कर सकती है।
दरअसल, डेढ़ माह पहले बाजेकां क्षेत्र की जमाबंदी पर कंगनपुर एरिया के खसरा नंबर व किला नंबर एडिट करवाकर एनडीसी जारी हुई थी। इस एनडीसी के आधार पर तहसील में फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कर दी गई। इसके बाद प्रॉपर्टी बेचने वाले मालिक का पैसा नहीं मिलने पर उसने फर्जी रजिस्ट्री के लिए उपायुक्त को शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत की जांच में सामने कि फर्जी तरीके से रजिस्ट्री हुई है। इसके बाद पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए। पुलिस ने इस मामले में दो नगर परिषद के कर्मचारियों व तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है।
विज्ञापन
तहसील में रजिस्ट्री हुई तो जांच क्यों नहीं
नगर परिषद के कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद हर कोई तहसील कार्यालय में फर्जी एनडीसी के आधार पर कैसे अनधिकृत क्षेत्र में रजिस्ट्री हो गई, यह जानना चाहता है। नियमानुसार जमाबंदी से लेकर इंतकाल तक की जांच तहसील में होती है। पटवारी से लेकर रजिस्ट्री क्लर्क तक जांच करते हैं। वकील इस पूरी प्रक्रिया को अमल में लाता है। ऐसे में आर जोन में आने वाले खसरा नंबर व जमाबंदी पर कैसे रजिस्ट्री हो गई। इसलिए हर कोई पुलिस पर नजरे जमाए हुए है कि तहसील पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई है। सीटीएम की जांच में ही रजिस्ट्री फर्जी मिली है और शिकायतकर्ता ने खुद इसे स्वीकारा है।
-- --
हमारे पास पुलिस से पत्र आया है। जिला नगर आयुक्त से इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे। उनके आगामी आदेशों के अनुसार दस्तावेज देने व न देने का निर्णय लिया जाएगा।
- सुनील रंगा, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद।
विज्ञापन
हालांकि, इस मामले में नगर परिषद कार्यकारी अधिकारी सुनील रंगा का कहना है कि जिला नगर आयुक्त से इस मामले में विचार-विमर्श के बाद ही आगामी प्रक्रिया को अमल में लाया जाएगा। जिला नगर आयुक्त विरेंद्र सहरावत अनुमति मिलने के बाद ही दस्तावेज देने संबंधी कार्रवाई की जाएगी। जब तक नगर परिषद से दस्तावेज नहीं मिलते हैं तब तक पुलिस आगे की कार्रवाई को शुरू नहीं कर सकती है।
विज्ञापन
दरअसल, डेढ़ माह पहले बाजेकां क्षेत्र की जमाबंदी पर कंगनपुर एरिया के खसरा नंबर व किला नंबर एडिट करवाकर एनडीसी जारी हुई थी। इस एनडीसी के आधार पर तहसील में फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कर दी गई। इसके बाद प्रॉपर्टी बेचने वाले मालिक का पैसा नहीं मिलने पर उसने फर्जी रजिस्ट्री के लिए उपायुक्त को शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत की जांच में सामने कि फर्जी तरीके से रजिस्ट्री हुई है। इसके बाद पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए। पुलिस ने इस मामले में दो नगर परिषद के कर्मचारियों व तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है।
विज्ञापन
तहसील में रजिस्ट्री हुई तो जांच क्यों नहीं
नगर परिषद के कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद हर कोई तहसील कार्यालय में फर्जी एनडीसी के आधार पर कैसे अनधिकृत क्षेत्र में रजिस्ट्री हो गई, यह जानना चाहता है। नियमानुसार जमाबंदी से लेकर इंतकाल तक की जांच तहसील में होती है। पटवारी से लेकर रजिस्ट्री क्लर्क तक जांच करते हैं। वकील इस पूरी प्रक्रिया को अमल में लाता है। ऐसे में आर जोन में आने वाले खसरा नंबर व जमाबंदी पर कैसे रजिस्ट्री हो गई। इसलिए हर कोई पुलिस पर नजरे जमाए हुए है कि तहसील पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई है। सीटीएम की जांच में ही रजिस्ट्री फर्जी मिली है और शिकायतकर्ता ने खुद इसे स्वीकारा है।
हमारे पास पुलिस से पत्र आया है। जिला नगर आयुक्त से इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे। उनके आगामी आदेशों के अनुसार दस्तावेज देने व न देने का निर्णय लिया जाएगा।
- सुनील रंगा, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद।