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Sirsa News: फोन से विभाग की खानापूर्ति ने बुजुर्गों के नांदेड़ के तोड़े सपने, 102 को लौटना पड़ा मायूस

Fri, 15 May 2026 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Fri, 15 May 2026 11:13 PM IST
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The department's phone call shattered the dreams of the elderly in Nanded, forcing 102 to return disappointed.
सिरसा में रेलवे स्टेशन पर नांदेड़ साहिब जाने के ​लिए दस्तावेज की जांच करवाते श्रद्धालु।
सिरसा। सिरसा से नांदेड़ साहिब को जाने वाली ट्रेन को लेकर पिछले एक माह से सपने सजोने वाले बुजुर्गों को शुक्रवार को मायूसी का सामना करना पड़ा। एक दो नहीं पूरे 102 श्रद्धालुओं को मायूस होकर लौटना पड़ा। प्रबंधन का टका सा जवाब उन्हें मिला कि आपने फोन नहीं उठाया, आपका फोन नहीं मिला। इसलिए आपका रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिया गया।
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बुजुर्गों ने गुहार लगाई कि अनपढ़ आदमी को क्या पता किसकी कॉल आई है या किसी नहीं। मिस कॉल कैसे निकालते। आज का पता था तो आकर आपके पास पहुंचे हैं। अब कोई व्यवस्था करवा दो। हैरानी की बात रही कि इस दौरान कोई आलाधिकारी मौजूद नहीं रहा तो मायूस होकर लोगों को वापस लौटना पड़ा। आलाधिकारियों की गैर मौजूदगी में महज खानापूर्ति चलती रही।
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जनसंपर्क व जनसूचना विभाग ने यह किया दावा
जिला जनसंपर्क व जनसूचना अधिकारी रामनाथ ने बताया कि 13 मई तक उनके पास 575 आवेदन आए हुए थे। 13 मई की रात 11 से 12 बजे तक इनको वेरिफिकेशन का काम फोन के माध्यम से किया गया। कई लोगों ने फोन नहीं उठाए, कई लोगों के फोन नहीं मिले या अन्य कारण रहे। इस कारण 102 लोगों के आवेदनों को कैंसिल करना पड़ा। 473 श्रद्धालुओं के आवेदन ही स्वीकृत हुए है और रेलवे ने रजिस्ट्रेशन के साथ उनकी बुकिंग की है। उन्हीं के हिसाब से व्यवस्था की गई हैं।
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उन्होंने कहा कि जो लोग अब आकर रजिस्ट्रेशन करवाना चाह रहे हैं उन्हें नहीं भेजा जा सकता है। रेलवे ने बुकिंग के हिसाब से सीटें दी हैं। जहां तक फिजिकल वेरीफिकेशन की बात है तो समय इतना नहीं था कि वह करवाया जा सकता। इसलिए फोन के आधार पर ही काम किया गया था।

सरपंचों की ली जा सकती थी मदद
नांदेड़ साहिब जाने वाले लोगों की स्वीकृति को लेकर गांवों के सरपंचों की मदद ली जा सकती थी। एक गांव से दो से पांच लोगों को ही जाना था। ऐसे में आसानी से सरपंच संपर्क साध सकते थे। जिससे बुजुर्गों को नादेड साहिब के निशुल्क दर्शन हो जाते। लेकिन प्रशासन की समय का अभाव की बात कर पल्ला झाड़ना, बुजुर्गों के सपनों पर पानी फेर गया। यदि सरपंचों या अन्य कर्मचारियों की मदद ली होती तो बुजुर्गों को लौटना नहीं पड़ता।
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यह बोले बुजुर्ग ---


फोन कब आया था। पता नहीं चला। घर पर बुजुर्ग पत्नी थी और उसने उठाया नहीं। मुझे भी मिस कॉल निकालनी नहीं आती, क्योंकि अनपढ़ हूं। बाद में अपने काम में लग गए। आज यहां आए तो पता चल रहा है कि आपने फोन नहीं उठाया, आपको फोन किया था। एक महीने से इंतजार कर रहे थे कि नांदेड़ साहिब निशुल्क यात्रा करेंगे। आज यहां आने पर जवाब मिला है कि आपको रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ, आपका लिस्ट में नाम नहीं है। कोई सुनवाई भी नहीं है। कम से कम सरपंच या किसी अन्य आदमी को भेज दिया होता। हम जाएंगे या नहीं। बस फोन करना क्या सही है। सरकार से मांग है कि इस व्यवस्था को लेकर सख्त कदम उठाए।
-दर्शन सिंह, गांव फग्गू

नांदेड़ साहिब जाने के लिए आई थी। यहां आई तो कहते हैं कि आपका लिस्ट में नाम नहीं है। आपको फोन किया था, आपने फोन नहीं उठाया। बेटे के पास फोन रहता है। उसने नहीं उठाया होगा। फोन के अलावा बंदा भेजना चाहिए ना। ऐसे कौन रजिस्ट्रेशन कैंसिल करता है। सुबह 11 बजे से अब एक बज गया है, कोई सुनवाई नहीं है।

-सुखपाल, गांव गंगा

रेलवे स्टेशन पर सुबह 11 बजे आ गए थे। यहां पर आने के बाद पता चला कि आपका लिस्ट में नाम नहीं है। पहले भाजपा नेताओं के फोन आ रहे थे कि सीटें खाली रहेंगी, आप रजिस्ट्रेशन करवाएं। अब यहां पर कोई सुनवाई नहीं है, कोई नेता भी सुनने को तैयार नहीं है। प्रशासनिक अधिकारी सुनवाई नहीं कर रहे हैं। अब वापस लौटना पड़ेगा और मजाक का अभियान बना दिया है।

-देवेंद्र कुमार, गांव जमाल
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