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Sirsa News: प्रॉपर्टी आईडी और एनडीसी मामले में लापरवाही बरतने पर डबवाली का क्लर्क निलंबित
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डबवाली। जिला नगर आयुक्त वीरेंद्र सेहरावत ने प्रॉपर्टी अनापत्ति प्रमाणपत्र मामले में डबवाली के क्लर्क को निलंबित कर दिया है। आरोपी अवैध प्रॉपर्टी आईडी को पोर्टल पर वैध दिखाकर विकास शुल्क वसूलता था। वहीं, नगर परिषद की लचर कार्यप्रणाली खुलकर सामने आ गई है। अवैध कॉलोनियों के खसरा किला नंबर की जानकारी होने के बाद नो-ड्यूज सर्टिफिकेट (एनडीसी) जारी करना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की तरफ इशारा करता है।
जानकारी के अनुसार, क्लर्क श्रवण कुमार के खिलाफ पिछले कई महीनों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि वह जानबूझ कर प्रॉपर्टी आईडी और एनडीसी की फाइलों को निपटाने में देरी करता। इतना ही नहीं, कुछ एरिया की गलत एनओसी भी जारी की थी। जिला नगर आयुक्त वीरेंद्र सेहरावत का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। हालांकि क्लर्क के इस गतिविधि में शामिल होने से इंजीनियरिंग व अन्य अधिकारियों की गतिविधियां भी संदेह के दायरे में हैं।
यह होती है एनडीसी की प्रक्रिया
- एनडीसी को लेकर सबसे पहले प्रार्थी ऑन लाइन आवेदन करता है और दस्तावेज लगाता है।
- क्लर्क के पास ऑनलाइन फाइल आती है और वह मौका निरीक्षण लोकेशन के आधार पर करता है।
- मौका निरीक्षण करने से पहले ही साइट पर ऑन लाइन मैंप आईडी के वैध और अवैध होना दर्शाता देता है। इसी प्रक्रिया के दौरान सारा खेल होता है।
- कर्मचारी लोकेशन पर जाता है। आवेदनकर्ता के साथ तालमेल बनता है। उसके बाद अवैध एरिया को वैध एनओसी देने का खेल शुरू होता है।
- बिना नाम की आईडी खोजी जाती है और उस पर संबंधित व्यक्ति द्वारा पुन: आवेदन करवाया जाता है। पूर्व आवेदन को कैंसिल कर दिया जाता है।
- ऐसे में नाम दर्ज, एरिया की आईडी इंजीनियरिंग व कार्यकारी अधिकारी के पास जाती है। वैध या अवैध का झंझट खत्म हो जाता है।
- इसी आधार पर एनओसी मिल जाती है और मालिक दूसरी आईडी पर अपनी रजिस्ट्री व खरीद बेच कर कर देता है।
तहसील स्तर पर हो रही लापरवाही
जिला नगर योजनाकार और नगर परिषद द्वारा रकबे व कॉलोनी से जुड़े खसरा नंबर, किला नंबर जारी किए जाते हैं। सारे दस्तावेज तहसील कार्यालय के पास होते हैं। ऐसे में वह महज एनओसी देखकर ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूर्ण कर देते हैं और रजिस्ट्री की जांच नहीं करते। जुलाई 2024 से अब तक की फाइलों की जांच की जाए तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। सरकार द्वारा वर्ष 2024 में वैध की गईं कॉलोनियों के साथ लगते एरिया में पूरा खेल चल रहा है।
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डीटीपी जारी कर चुके हैं अवैध खसरा नंबर
जिला नगर योजनाकार अधिकारी कर्मवीर झाझड़िया व उनसे पूर्व अधिकारी कई बार वैध और अवैध खसरा नंबर की सूची जारी कर चुके हैं। नगर परिषद और तहसील के कर्मचारी और अधिकारी इस ओर गंभीरता नहीं दिखाते। जब डीटीपी द्वारा अवैध कॉलोनी पर कार्रवाई होती है तो लोग एनओसी दिखाते हैं, जिसके बाद सारा मामला सामने आता है। डीटीपी विभाग के अधिकारियों की माने तो जिस एनओसी को वह कैंसिल कर देते हैं, उसे नगर परिषद से लोग पास करवा लेते हैं और रजिस्ट्री हो जाती है।
लगातार मिल रहीं शिकायतों के बाद डीएमसी के आदेश पर तत्काल प्रभाव से श्रवण कुमार को निलंबित कर दिया है। आगामी जांच प्रक्रिया जारी है। - सुरेंद्र कुमार, कार्यकारी अधिकारी, डबवाली
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जानकारी के अनुसार, क्लर्क श्रवण कुमार के खिलाफ पिछले कई महीनों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि वह जानबूझ कर प्रॉपर्टी आईडी और एनडीसी की फाइलों को निपटाने में देरी करता। इतना ही नहीं, कुछ एरिया की गलत एनओसी भी जारी की थी। जिला नगर आयुक्त वीरेंद्र सेहरावत का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। हालांकि क्लर्क के इस गतिविधि में शामिल होने से इंजीनियरिंग व अन्य अधिकारियों की गतिविधियां भी संदेह के दायरे में हैं।
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यह होती है एनडीसी की प्रक्रिया
- एनडीसी को लेकर सबसे पहले प्रार्थी ऑन लाइन आवेदन करता है और दस्तावेज लगाता है।
- क्लर्क के पास ऑनलाइन फाइल आती है और वह मौका निरीक्षण लोकेशन के आधार पर करता है।
- मौका निरीक्षण करने से पहले ही साइट पर ऑन लाइन मैंप आईडी के वैध और अवैध होना दर्शाता देता है। इसी प्रक्रिया के दौरान सारा खेल होता है।
- कर्मचारी लोकेशन पर जाता है। आवेदनकर्ता के साथ तालमेल बनता है। उसके बाद अवैध एरिया को वैध एनओसी देने का खेल शुरू होता है।
- बिना नाम की आईडी खोजी जाती है और उस पर संबंधित व्यक्ति द्वारा पुन: आवेदन करवाया जाता है। पूर्व आवेदन को कैंसिल कर दिया जाता है।
- ऐसे में नाम दर्ज, एरिया की आईडी इंजीनियरिंग व कार्यकारी अधिकारी के पास जाती है। वैध या अवैध का झंझट खत्म हो जाता है।
- इसी आधार पर एनओसी मिल जाती है और मालिक दूसरी आईडी पर अपनी रजिस्ट्री व खरीद बेच कर कर देता है।
तहसील स्तर पर हो रही लापरवाही
जिला नगर योजनाकार और नगर परिषद द्वारा रकबे व कॉलोनी से जुड़े खसरा नंबर, किला नंबर जारी किए जाते हैं। सारे दस्तावेज तहसील कार्यालय के पास होते हैं। ऐसे में वह महज एनओसी देखकर ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूर्ण कर देते हैं और रजिस्ट्री की जांच नहीं करते। जुलाई 2024 से अब तक की फाइलों की जांच की जाए तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। सरकार द्वारा वर्ष 2024 में वैध की गईं कॉलोनियों के साथ लगते एरिया में पूरा खेल चल रहा है।
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डीटीपी जारी कर चुके हैं अवैध खसरा नंबर
जिला नगर योजनाकार अधिकारी कर्मवीर झाझड़िया व उनसे पूर्व अधिकारी कई बार वैध और अवैध खसरा नंबर की सूची जारी कर चुके हैं। नगर परिषद और तहसील के कर्मचारी और अधिकारी इस ओर गंभीरता नहीं दिखाते। जब डीटीपी द्वारा अवैध कॉलोनी पर कार्रवाई होती है तो लोग एनओसी दिखाते हैं, जिसके बाद सारा मामला सामने आता है। डीटीपी विभाग के अधिकारियों की माने तो जिस एनओसी को वह कैंसिल कर देते हैं, उसे नगर परिषद से लोग पास करवा लेते हैं और रजिस्ट्री हो जाती है।
लगातार मिल रहीं शिकायतों के बाद डीएमसी के आदेश पर तत्काल प्रभाव से श्रवण कुमार को निलंबित कर दिया है। आगामी जांच प्रक्रिया जारी है। - सुरेंद्र कुमार, कार्यकारी अधिकारी, डबवाली