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Sirsa News: अभियान ठप... सड़कों पर पशु बेलगाम
Sun, 01 Jun 2025 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 01 Jun 2025 12:03 AM IST
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शिव पार्क के पास गली में घूमते बेसहारा पशु।
सिरसा। गोशलाओं में शेड का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं होने के कारण पशुओं को लेना बंद कर दिया गया है। ऐसे में बेसहारा पशु पकड़ो अभियान ठप पड़ा है।
45 डिग्री तापमान में बेसहारा पशु सड़कों पर घूमते नजर आते है। वहीं, बड़े स्तर पर पशु मौसम की मार झेल रहे हैं और काल का ग्रास बन रहे हैं। कुछ पशु सड़क हादसों को न्योता दे रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार गर्मी के मौसम में प्रतिदिन 10 से 15 बेसहारा पशुओं की मौत होती है।
नगर परिषद के चुनाव के बाद से ही कई अभियान बंद हो गए हैं। इनमें बेसहारा पशुओं का अभियान भी शामिल है और इस दिशा में कोई काम भी होता नजर नहीं आ रहा है।
बता दें कि नगर परिषद प्रशासन पहले गोशालाओं को छोड़े गए पशुओं को लेकर प्रति पशु के हिसाब से तीन से चार लाख रुपये की अदायगी करता था। ताकि गोशलाएं व नंदीशालाएं इन पशुओं की देखभाल कर पाए। जहां जिले की सभी गोशालाओं को गोसेवा आयोग ने पैसा जारी कर दिया है।
वहीं, नंदीशाला केलनियां को पांच माह से कोई पैसा जारी नहीं हुआ है। नगर परिषद और गोसेवा आयोग दोनों तरफ से पैसा बंद हो गया है। आपसी तालमेल की कमी के कारण यह नौबत आई है। ऐसे में नंदीशालाओं को दानी सज्जनों के भरोसे चलाया जा रहा है।
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चार माह से काम पड़ा बंद
रामनगरिया गोशाला में चार माह पहले शेड का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। हिसार की एजेंसी को यह टेंडर दिया गया था और ठेकेदार सिर्फ फाउंडेशन भरकर चला गया। गोशाला के सदस्य संजय कुमार ने बताया कि फाउंडेशन भरने के बाद ठेकेदार आज तक नहीं आया है। इस संबंध में कई बार नगर परिषद अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ है। जब ठेकेदार से बात की गई तो उसने कहा कि उसकी पेमेंट नहीं हुई है। हैरानी की बात है कि फाउंडेशन भरने में कितना पैसा उसका खर्च हो गया है। जितने लाख रुपये का टेंडर एजेंसी को दिया गया है। उसका 70 प्रतिशत गोशाला को दिया गया होता है अब तक शेड लग जाता।
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पशुओं के हिसाब से इस प्रकार देता था नगर परिषद खर्च
जानकारी के अनुसार, गोशालाओं और नंदीशाला अपने खर्च पर पशुओं का नहीं रखती हैं। इन पशुओं के लिए नगर परिषद प्रशासन की ओर से पैसा जारी किया जाता था। प्रति पशु के हिसाब से नगर परिषद पैसा देता था। ऐसे में प्रतिमाह तीन लाख से चार लाख रुपये के बीच पैसा नगर परिषद प्रशासन की ओर से इन नंदीशालाओं व गोशालाओं को पैसा जारी होता था। वहीं, दूसरी ओर पशुओं को पकड़ने वाली टीम को प्रति पशु के हिसाब से नगर परिषद पैसा देता है। सही मायने में नगर परिषद की ओर से लाखों रुपये बेसहारा पशुओं पर खर्च करता है।
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बेसहारा पशुओं को लेकर गोशालाओं के पास व्यवस्था नहीं है। शेड व अन्य व्यवस्था गोशालाओं में बनाई जा रही है। उसके बाद अभियान को दोबारा शुरू किया जाएगा। गोसेवा आयोग की ओर से पैसा जारी करने पर परिषद ने पैसा बंद कर दिया है। ठेकेदार के काम नहीं करने को लेकर इंजीनियरिंग शाखा को अवगत करवाया गया है।
- जयवीर सिंह, सीएसआई, नगर परिषद।
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45 डिग्री तापमान में बेसहारा पशु सड़कों पर घूमते नजर आते है। वहीं, बड़े स्तर पर पशु मौसम की मार झेल रहे हैं और काल का ग्रास बन रहे हैं। कुछ पशु सड़क हादसों को न्योता दे रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार गर्मी के मौसम में प्रतिदिन 10 से 15 बेसहारा पशुओं की मौत होती है।
नगर परिषद के चुनाव के बाद से ही कई अभियान बंद हो गए हैं। इनमें बेसहारा पशुओं का अभियान भी शामिल है और इस दिशा में कोई काम भी होता नजर नहीं आ रहा है।
बता दें कि नगर परिषद प्रशासन पहले गोशालाओं को छोड़े गए पशुओं को लेकर प्रति पशु के हिसाब से तीन से चार लाख रुपये की अदायगी करता था। ताकि गोशलाएं व नंदीशालाएं इन पशुओं की देखभाल कर पाए। जहां जिले की सभी गोशालाओं को गोसेवा आयोग ने पैसा जारी कर दिया है।
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वहीं, नंदीशाला केलनियां को पांच माह से कोई पैसा जारी नहीं हुआ है। नगर परिषद और गोसेवा आयोग दोनों तरफ से पैसा बंद हो गया है। आपसी तालमेल की कमी के कारण यह नौबत आई है। ऐसे में नंदीशालाओं को दानी सज्जनों के भरोसे चलाया जा रहा है।
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चार माह से काम पड़ा बंद
रामनगरिया गोशाला में चार माह पहले शेड का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। हिसार की एजेंसी को यह टेंडर दिया गया था और ठेकेदार सिर्फ फाउंडेशन भरकर चला गया। गोशाला के सदस्य संजय कुमार ने बताया कि फाउंडेशन भरने के बाद ठेकेदार आज तक नहीं आया है। इस संबंध में कई बार नगर परिषद अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ है। जब ठेकेदार से बात की गई तो उसने कहा कि उसकी पेमेंट नहीं हुई है। हैरानी की बात है कि फाउंडेशन भरने में कितना पैसा उसका खर्च हो गया है। जितने लाख रुपये का टेंडर एजेंसी को दिया गया है। उसका 70 प्रतिशत गोशाला को दिया गया होता है अब तक शेड लग जाता।
पशुओं के हिसाब से इस प्रकार देता था नगर परिषद खर्च
जानकारी के अनुसार, गोशालाओं और नंदीशाला अपने खर्च पर पशुओं का नहीं रखती हैं। इन पशुओं के लिए नगर परिषद प्रशासन की ओर से पैसा जारी किया जाता था। प्रति पशु के हिसाब से नगर परिषद पैसा देता था। ऐसे में प्रतिमाह तीन लाख से चार लाख रुपये के बीच पैसा नगर परिषद प्रशासन की ओर से इन नंदीशालाओं व गोशालाओं को पैसा जारी होता था। वहीं, दूसरी ओर पशुओं को पकड़ने वाली टीम को प्रति पशु के हिसाब से नगर परिषद पैसा देता है। सही मायने में नगर परिषद की ओर से लाखों रुपये बेसहारा पशुओं पर खर्च करता है।
बेसहारा पशुओं को लेकर गोशालाओं के पास व्यवस्था नहीं है। शेड व अन्य व्यवस्था गोशालाओं में बनाई जा रही है। उसके बाद अभियान को दोबारा शुरू किया जाएगा। गोसेवा आयोग की ओर से पैसा जारी करने पर परिषद ने पैसा बंद कर दिया है। ठेकेदार के काम नहीं करने को लेकर इंजीनियरिंग शाखा को अवगत करवाया गया है।
- जयवीर सिंह, सीएसआई, नगर परिषद।