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Sirsa News: शहीद कृष्ण कुमार के परिजनों को सेना ने दिया स्मृति चिह्न
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शहीद कृष्ण कुमार के परिजनों को सेना की ओर से सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न प्रदान करते हुए।
चोपटा। कारगिल की लड़ाई में शहीद हुए 17वीं जाट रेजिमेंट के सिपाही कृष्ण कुमार को याद करते हुए भारतीय सेना ने घर-घर शौर्य सम्मान के तहत उनके परिजनों से मुलाकात कर सम्मान पत्र व स्मृति चिह्न भेंट किया है। सेना की ओर से हवलदार कमलेश बिश्नोई व सिपाही सुनील ने गांव तरकांवाली में उनके आवास पर पहुंचकर शहीद की पत्नी संतोष देवी, पुत्र मनोज व मुकेश से मुलाकात की और उनकी समस्याएं भी जानी।
सेना की ओर से आए प्रतिनिधियों ने बताया कि भारतीय सेना 26वां कारगिल विजय दिवस समारोह 26 जुलाई को आयोजित कर रही है और इसी उपलक्ष्य में घर-घर शौर्य सम्मान के तहत शहीदों के परिजनों को सम्मान पत्र व स्मृति चिह्न घर पर पहुंचकर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि परिजनों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं के बारे में भी जानकारी ली जा रही है ताकि उनका निवारण किया जा सके।
उन्होंने कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों का देश सदैव ऋणी रहेगा। कारगिल युद्ध के दौरान सिपाही कृष्ण कुमार दुश्मन से लोहा लेते हुए 20 वर्ष की आयु में 30 मई 1999 को शहीद हो गए। शहीद कृष्ण कुमार के भाई बलजीत ने बताया कि कृष्ण कुमार 25 दिनों की छुट्टी के बाद 25 मई 1999 को कारगिल पहुंचे थे।
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सेना की ओर से आए प्रतिनिधियों ने बताया कि भारतीय सेना 26वां कारगिल विजय दिवस समारोह 26 जुलाई को आयोजित कर रही है और इसी उपलक्ष्य में घर-घर शौर्य सम्मान के तहत शहीदों के परिजनों को सम्मान पत्र व स्मृति चिह्न घर पर पहुंचकर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि परिजनों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं के बारे में भी जानकारी ली जा रही है ताकि उनका निवारण किया जा सके।
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उन्होंने कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों का देश सदैव ऋणी रहेगा। कारगिल युद्ध के दौरान सिपाही कृष्ण कुमार दुश्मन से लोहा लेते हुए 20 वर्ष की आयु में 30 मई 1999 को शहीद हो गए। शहीद कृष्ण कुमार के भाई बलजीत ने बताया कि कृष्ण कुमार 25 दिनों की छुट्टी के बाद 25 मई 1999 को कारगिल पहुंचे थे।
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