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Sirsa News: चंद्र ग्रहण से मंदिरों के पट रहे बंद, शाम सात बजे खुले द्वार

Wed, 04 Mar 2026 12:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Wed, 04 Mar 2026 12:11 AM IST
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temples closed due to lunar eclipse
प्राचीन श्री हनुमान मंदिर पर लगा ताला। संवाद
- सूतक काल में रुके दर्शन, संध्या आरती के बाद फिर शुरू हुई पूजा-अर्चना
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फोटो- 24, 25
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जिलेभर में मंगलवार को चंद्र ग्रहण का प्रभाव धार्मिक स्थलों पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। ग्रहण के चलते सुबह से ही मंदिरों के पट बंद कर दिए गए और श्रद्धालुओं के लिए दर्शन अस्थायी रूप से रोक दिए गए।
सूतक काल सुबह 6 बजकर 47 मिनट पर प्रारंभ हुआ और शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहा। सूतक लगते ही शहर के प्रमुख मंदिरों में नियमित पूजा-पाठ और दर्शन की गतिविधियां स्थगित कर दी गईं।
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सालासर धाम मंदिर, गीता भवन मंदिर, ब्रह्म मंदिर, शिवालय सहित अन्य कई प्रमुख मंदिरों में पट बंद रहे। मंदिर प्रबंधन समितियों ने पहले ही श्रद्धालुओं को ग्रहण और सूतक के समय की जानकारी दे दी थी, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो। सुबह के समय कुछ श्रद्धालु मंदिर पहुंचे, लेकिन उन्हें सूतक काल की जानकारी देकर वापस भेज दिया गया।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल में पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और अन्य शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। इसी परंपरा का पालन करते हुए मंदिरों में नियमित आरती और भोग की व्यवस्था स्थगित रखी गई।
कई मंदिरों में हुए भजन-कीर्तन
शहर के कई स्थानों पर मंदिर के बाहर या सभा कक्ष में भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। भक्तों ने ग्रहण काल में भगवान का स्मरण करते हुए भक्ति गीत गाए, लेकिन गर्भगृह के पट बंद ही रहे। इस दौरान महिलाओं की भजन मंडलियों ने आस-पास की महिलाओं सहित भजन संकीर्तन किया।
शाम 7 बजे खोले गए मंदिर
मंगलवार शाम 6 बजकर 47 मिनट पर सूतक समाप्त हुआ। इसके बाद मंदिरों में शुद्धिकरण की प्रक्रिया शुरू की गई। मंदिर परिसर की साफ-सफाई की गई और देवी-देवताओं की प्रतिमाओं काे विधि-विधान से स्नान करवाया गया। इसके बाद नए वस्त्र धारण करवाए गए और आकर्षक शृंगार किया गया। संध्या आरती के साथ पुनः मंदिरों के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। शाम करीब सात बजे जैसे ही पट खुले, श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। लोगों ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। कई श्रद्धालुओं ने ग्रहण समाप्ति के बाद दान-पुण्य भी किया और प्रसाद वितरित किया।

वर्जन
चंद्र ग्रहण के दौरान मंत्र जाप और ध्यान करना शुभ माना जाता है, जबकि मूर्ति पूजा और भोजन ग्रहण करने से परहेज रखा जाता है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करना और घरों में भी साफ-सफाई करना परंपरा का हिस्सा है। कई परिवारों ने घरों में भी पूजा स्थल की सफाई कर दीप प्रज्ज्वलित किए।
- पंडित अरुण कौशिक, गीता भवन मंदिर सिरसा।
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