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शिक्षकों ने बदली राजकीय स्कूल की तस्वीर, तीन साल में बढ़े 300 दाखिले
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राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल, चत्तरगढ़पट्टी में बच्चों को पढ़ाती शिक्षिका। संवाद
- फोटो : Sirsa
सिरसा। शहर के चत्तरगढ़पट्टी स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय अनुशासन, सफाई और पढ़ाई के मामले में नंबर एक पर है। शिक्षकों ने मिलकर स्कूल का ऐसा कैंपस तैयार कर दिया, जिसकी आज शिक्षा विभाग प्रशंसा कर रहा है। शिक्षकों ने सामूहिक प्रयास की पिछले में तीन वर्ष में 300 से ज्यादा दाखिला बढ़े हैं। इसके अलावा स्कूल में आधुनिक शौचालय बनाया गया है, जो जल्द ही शुरू होगा। एक ही कैंपस में राजकीय प्राथमिक विद्यालय और सीनियर सेकेंडरी स्कूल संचालित किया जा रहा है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय की दशा शिक्षकों ने मिलकर सुधार दी है। शिक्षकों ने स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए भी प्रयास किए। नतीजा यह है कि तीन वर्ष के दौरान दाखिला संख्या 300 से ज्यादा हो गई। वर्ष 2019 में प्राथमिक विद्यालय में दाखिला संख्या 363 थी, जो कि 31 अगस्त 2022 तक 685 तक पहुंच चुकी है। यहां पहली कक्षा के दो सेक्शन, दूसरी कक्षा के तीन सेक्शन, तीसरी कक्षा के पांच सेक्शन और चौथी कक्षा के दो सेक्शन हैं। इसके अलावा पांचवीं कक्षा के भी तीन सेक्शन बनाने पड़े, क्योंकि बच्चों की संख्या ज्यादा हो गई है।
सुंदर बना दिया पार्क, झूलों का आनंद लेते हैं बच्चे
शहर में ऐसा शायद ही कोई अन्य राजकीय स्कूल हो, जहां पर बच्चों के खेलने के लिए सुंदर पार्क हो। यहां स्कूल मैदान के बीच पार्क तैयार करवा दिया गया है। नियमित रूप से सफाई भी करवाई जाती है। डी-प्लान के तहत फंड मिलने से झूले लगवा दिए गए हैं। बच्चे आधी छुट्टी में झूलों का आनंद लेते हैं। इसके अलावा स्कूल में वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम लगा है, जिससे बारिश का पानी बर्बाद होने के बजाय भूमिगत हो जाता है।
हर क्लासरूम में फ्लैक्स लगाकर किया तैयार
स्कूल में पढ़ाई का माहौल बने, इसके लिए भी खास व्यवस्था की गई है। छोटे बच्चों के लिए दरी पर बैठने की व्यवस्था है। इतना ही नहीं बच्चों के लिए दीवार के निचले हिस्से में ब्लैक बोर्ड बनाए गए हैं, ताकि खेल-खेल में दीवार पर चॉक से लिखकर अभ्यास करते रहें। प्रत्येक कक्षा में फ्लैक्स बोर्ड लगाए गए हैं। इन पर सिलेबस से संबंधित चित्रकारी है। हर कमरे में एक्टिविटी बोर्ड भी स्थापित किया गया है, ताकि बच्चों द्वारा विशेष दिवस पर की गई एक्टिविटी के दौरान बनाए गए ग्रीटिंग कार्ड, चित्रकारी और अन्य पेंटिंग यहां चस्पा की जा सके।
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शिक्षकों ने दिया सहयोग
स्कूल के शौचालय पुराने और खस्ताहाल हो चुके थे। ऐसे में विभाग की ओर से बजट आया तो शिक्षकों ने मिलकर आधुनिक शौचालय तैयार करवाया। सरकार की ओर से मिले फंड से शौचालय का काम मन मुताबिक नहीं हो रहा था। ऐसे में शिक्षकों ने अपने निजी सहयोग से शौचालय निर्माण में सहयोग दिया। अब शौचालय बनकर तैयार है।
इन कमियों पर देना होगा ध्यान
स्कूल में आधारभूत सुविधाओं का अभाव है। 685 विद्यार्थियों के लिए केवल 9 कमरे हैं। एक कक्षा के कई सेक्शन बनाने पड़े हैं। बच्चों की संख्या का हिसाब से स्कूल में 15 कमरों की जरूरत है। कमरों के कम होने की वजह से बच्चों को बरामदे में बैठाकर कक्षाएं लगानी पड़ रही है। बरामदों में प्लाई लगाकर क्लासरूम का रूप दिया गया है। इसके अलावा लाइब्रेरी में नीचे बैठकर भी बच्चों को पढ़ाना पढ़ रहा है।
हमारा प्रयास है कि सभी बच्चों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा दें। बच्चों की संख्या बढ़ रही है और परिणाम भी सुधरा है। कैंपस को स्वच्छ और सुरक्षित भी बनाने के लिए पूरा स्कूल स्टाफ प्रयासरत रहता है।
- बंसी लाल झोरड़, स्कूल हेड।
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सुंदर बना दिया पार्क, झूलों का आनंद लेते हैं बच्चे
शहर में ऐसा शायद ही कोई अन्य राजकीय स्कूल हो, जहां पर बच्चों के खेलने के लिए सुंदर पार्क हो। यहां स्कूल मैदान के बीच पार्क तैयार करवा दिया गया है। नियमित रूप से सफाई भी करवाई जाती है। डी-प्लान के तहत फंड मिलने से झूले लगवा दिए गए हैं। बच्चे आधी छुट्टी में झूलों का आनंद लेते हैं। इसके अलावा स्कूल में वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम लगा है, जिससे बारिश का पानी बर्बाद होने के बजाय भूमिगत हो जाता है।
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हर क्लासरूम में फ्लैक्स लगाकर किया तैयार
स्कूल में पढ़ाई का माहौल बने, इसके लिए भी खास व्यवस्था की गई है। छोटे बच्चों के लिए दरी पर बैठने की व्यवस्था है। इतना ही नहीं बच्चों के लिए दीवार के निचले हिस्से में ब्लैक बोर्ड बनाए गए हैं, ताकि खेल-खेल में दीवार पर चॉक से लिखकर अभ्यास करते रहें। प्रत्येक कक्षा में फ्लैक्स बोर्ड लगाए गए हैं। इन पर सिलेबस से संबंधित चित्रकारी है। हर कमरे में एक्टिविटी बोर्ड भी स्थापित किया गया है, ताकि बच्चों द्वारा विशेष दिवस पर की गई एक्टिविटी के दौरान बनाए गए ग्रीटिंग कार्ड, चित्रकारी और अन्य पेंटिंग यहां चस्पा की जा सके।
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शिक्षकों ने दिया सहयोग
स्कूल के शौचालय पुराने और खस्ताहाल हो चुके थे। ऐसे में विभाग की ओर से बजट आया तो शिक्षकों ने मिलकर आधुनिक शौचालय तैयार करवाया। सरकार की ओर से मिले फंड से शौचालय का काम मन मुताबिक नहीं हो रहा था। ऐसे में शिक्षकों ने अपने निजी सहयोग से शौचालय निर्माण में सहयोग दिया। अब शौचालय बनकर तैयार है।
इन कमियों पर देना होगा ध्यान
स्कूल में आधारभूत सुविधाओं का अभाव है। 685 विद्यार्थियों के लिए केवल 9 कमरे हैं। एक कक्षा के कई सेक्शन बनाने पड़े हैं। बच्चों की संख्या का हिसाब से स्कूल में 15 कमरों की जरूरत है। कमरों के कम होने की वजह से बच्चों को बरामदे में बैठाकर कक्षाएं लगानी पड़ रही है। बरामदों में प्लाई लगाकर क्लासरूम का रूप दिया गया है। इसके अलावा लाइब्रेरी में नीचे बैठकर भी बच्चों को पढ़ाना पढ़ रहा है।
हमारा प्रयास है कि सभी बच्चों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा दें। बच्चों की संख्या बढ़ रही है और परिणाम भी सुधरा है। कैंपस को स्वच्छ और सुरक्षित भी बनाने के लिए पूरा स्कूल स्टाफ प्रयासरत रहता है।
- बंसी लाल झोरड़, स्कूल हेड।

राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल, चत्तरगढ़पट्टी में ब्लैक बोर्ड पर अभ्यास करती छात्रा। संवाद- फोटो : Sirsa

राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल, चत्तरगढ़पट्टी में पानी बचत के लिए लगाया गया हारवेस्टिंग सिस्टम । सं?- फोटो : Sirsa