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सरकार ने नहीं भेजा बजट, अध्यापक जेब खर्च से करेंगे कार्यक्रम

Tue, 26 Jan 2016 01:33 AM IST
ब्ययूराो/अमर उजाला /सिरसा/डबवाली
ब्ययूराो/अमर उजाला /सिरसा/डबवाली Updated Tue, 26 Jan 2016 01:33 AM IST
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स्कूल शिक्षा विभाग गणतंत्र दिवस को बेटियों के त्योहार के रूप में मना रहा है। विभाग ने 22 जनवरी 2015 से लेकर 22 जनवरी 2016 तक जन्म लेने वाली सभी प्यारी लाडो को स्कूलों में आमंत्रित किया है।

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गणतंत्र दिवस पर होने वाले समारोह में उन्हें पहली पंक्ति में बैठाया जाएगा। उन्हें सम्मानित किया जाएगा। सवाल है कि कैसे? विभाग ने कार्यक्रम बनाकर भेज दिया, लेकिन बजट नहीं भेजा। पिछले वर्ष आजादी पर्व मनाया था, उसका खर्च भी अब तक विद्यालयों को नहीं मिला है।
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पीएम नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरूआत की थी। अभियान की वर्षगांठ मनाते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने एक वर्ष की सभी बेटियों को सम्मानित करने का निर्णय लेते हुए उन्हें स्कूल मुखिया की ओर से निमंत्रण तक भिजवाए हैं।
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निमंत्रण पत्र प्यारी लाडो.......के नाम है, जिसमें लिखा है कि आप अपने जीवन के प्रथम वर्ष में हैं। आपकी किलकारियों से आपका घर-आंगन गूंज रहा होगा। आपकी मुस्कराहट और मनमोहक गतिविधियों से पूरा परिवार प्रसन्न हो रहा होगा। आपके होने से आपके परिवार के सभी सदस्य धन्य हैं और आपका परिवार में होना सौभाग्य एवं खुशहाली का प्रतीक है।

लाडो को आमंत्रित करने के साथ उसके परिवार को बेटियों को शिक्षित करने की भी सीख दी है। विभाग ने अपने निमंत्रण पत्र में आगे लिखा है कि आपके घर के पास ही एक विद्यालय है, जिसमें आने वाले वर्षों में आपके नन्हें कदम पड़ेंगे और आप यहां कई वर्ष शिक्षा ग्रहण करने वाली हो। सर्दी बहुत है अपना ख्याल रखना, आशा है अब 26 जनवरी को मुलाकात अवश्य होगी।

सरकारी विद्यालय विभाग की ओर से आए निमंत्रण पत्रों को बांट रहे हैं, लेकिन शिक्षा विभाग ने इन पत्रों के साथ बजट नहीं भेजा है। स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि आजादी पर्व की तरह इस बार भी पढ़ी-लिखी बेटी तिरंगा फहराएंगी। वह मुख्यातिथि होगी। साथ में बेटियों को भी आमंत्रित किया गया है।

ऐसे में खर्च बढ़ेगा। मासूम बेटियों को खिलौने दिए जाएंगे। लड्डू भी बांटे जाएंगे। इतना ही नहीं प्रबंध पर भी खर्च होगा। पिछले वर्ष करीब पंद्रह हजार रुपये खर्च आए थे, इस वर्ष खर्च ज्यादा बढ़ने का अनुमान है। लेकिन सरकार ने अभी तक बजट नहीं भेजा है। यहां तक 15 अगस्त 2015 के लिए 1000 रुपये भेजे जाने थे। करीब पांच माह बीतने के बाद भी सरकार ने एक पाई तक नहीं भेजी है।

अध्यापक जेब से खर्च करेंगे

विभाग की योजना को सिरे चढ़ाने के लिए अध्यापक खूब मेहनत कर रहे हैं। इस बार भी उन्हें अपनी जेब से पैसे खर्च करके योजना को सिरे चढ़ाना होगा। विद्यालय प्रबंधकों के अनुसार कार्य जनहित में है। इसके लिए वे तैयार हैं, लेकिन ऐसा कब तक चलेगा, सरकार को यह सोचना चाहिए। ऐसे कार्यक्रमों के लिए बजट जारी करके अध्यापकों पर अनावश्यक बोझ बंद करना चाहिए।

ठंड का कहर जारी

विभाग एक वर्ष की बेटियों से 26 जनवरी को मुलाकात करने जा रहा है, लेकिन ठंड को नजरअंदाज करके। सोमवार सुबह डबवाली का अधिकतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस था। धूप खिलने के बाद कुछ राहत मिली, लेकिन शाम को ठंडी हवा के झोंकों ने फिर तापमान नीचे गिरा दिया।


सवाल उठता है कि निमंत्रण के बाद कितने परिवार अपनी बेटियों को लेकर स्कूलों में पहुंचेंगे? ठंड से बेटियों को बचाने के लिए विद्यालय में क्या प्रबंध होंगे?

सरकार ने बजट के संबंध में कोई पत्र जारी नहीं किया है। स्कूल को कम्युनिटी के साथ मिलकर प्रबंध करने होंगे।
-बलजिंद्र सिंह भंगू, बीईओ, डबवाली

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