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Sirsa News: खारा व लवणीय मत्स्य झींगा तालाबों के निर्माण पर दिया जाता है अनुदान
Tue, 26 May 2026 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Tue, 26 May 2026 11:27 PM IST
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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत तालाब बनाने पर मिलेगी सहायता राशि
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। झींगा मछली के उत्पादन को लेकर प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अनुदान दिया जाता है ताकि खेती के अतिरिक्त अन्य कार्य करने के इच्छुक किसान नए खारे और लवणीय पानी के तालाब बनाकर झींगा का उत्पादन ले पाएं। योजना का उद्देश्य ग्रामीण, शहरी व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मत्स्य पालन का विस्तार करना तथा किसानों और लाभार्थियों की आय में वृद्धि करना है।
जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने बताया कि योजना के तहत केवल नवनिर्मित खारा व लवणीय मत्स्य अथवा झींगा तालाबों के निर्माण पर ही केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाएगी। पहले से बने तालाबों या पुराने तालाबों के जीर्णोद्धार पर राज्य प्रायोजित योजना के तहत लाभ मिलेगा। वहीं, दीर्घ अवधि की परियोजनाओं के लिए पंजीकृत पट्टानामे की न्यूनतम अवधि सात वर्ष निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि संरचनात्मक कार्यों जैसे फीड मिल, कोल्ड स्टोर निर्माण, आइस फैक्टरी, बीओफलोक व अन्य परियोजनाओं के लिए पंजीकृत पट्टानामे की न्यूनतम अवधि दस वर्ष निर्धारित की गई है।
जिला मत्स्य अधिकारी ने बताया कि योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों के पास परिवार पहचान पत्र होना अनिवार्य है। लाभार्थी के पास अपनी भूमि होने की स्थिति में उसे राज्य रिकॉर्ड के अनुसार भूमि स्वामित्व दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। योजना में खारे पानी में सफेद झींगा पालन हेतु प्रति हेक्टेयर इकाई लागत 14 लाख रुपये निर्धारित की गई है। सामान्य वर्ग के पुरुष लिए 40 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति एवं महिला लाभार्थियों के लिए 60 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।
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जिला मत्स्य अधिकारी ने बताया कि आवेदन के साथ जन्म प्रमाण पत्र, मतदाता कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड प्रस्तुत करना होगा। इसके अलावा, जाति प्रमाण पत्र, मत्स्य प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, भूमि रिकॉर्ड, बिल/रसीद/वाउचर, तालाब या परियोजना स्थल के फोटो, बैंक खाते व पैन कार्ड का विवरण भी आवश्यक होगा। इसके साथ ही लाभार्थी को विभाग एवं स्वयं के बीच अनुबंध पत्र, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) अथवा स्वनिहित प्रस्ताव (एससीपी) भी जमा करवाना होगा।
अनुसूचित जाति के लिए पंचायती तालाब मिलते हैं पट्टे पर
इसके अतिरिक्त विभाग की ओर राज्य प्रायोजित स्कीम भी जन कल्याण के लिए चलाई जा रही है। इसमें अनुसूचित जाति के लिए पंचायती तालाबों को पट्टे पर लेने के लिए प्रथम वर्ष से लेकर पांच वर्षों तक पट्टा राशि पर अनुदान, जाल खरीद पर अनुदान जैसी योजना शामिल है। इस वर्ष 2 जुलाई से लेकर 30 जुलाई तक ई-टेंडरिंग के माध्यम से घग्गर नदी व अन्य सरकारी नदी नालों व नहरों कि मत्स्य शिकार के लिए बोली की जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। झींगा मछली के उत्पादन को लेकर प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अनुदान दिया जाता है ताकि खेती के अतिरिक्त अन्य कार्य करने के इच्छुक किसान नए खारे और लवणीय पानी के तालाब बनाकर झींगा का उत्पादन ले पाएं। योजना का उद्देश्य ग्रामीण, शहरी व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मत्स्य पालन का विस्तार करना तथा किसानों और लाभार्थियों की आय में वृद्धि करना है।
जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने बताया कि योजना के तहत केवल नवनिर्मित खारा व लवणीय मत्स्य अथवा झींगा तालाबों के निर्माण पर ही केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाएगी। पहले से बने तालाबों या पुराने तालाबों के जीर्णोद्धार पर राज्य प्रायोजित योजना के तहत लाभ मिलेगा। वहीं, दीर्घ अवधि की परियोजनाओं के लिए पंजीकृत पट्टानामे की न्यूनतम अवधि सात वर्ष निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि संरचनात्मक कार्यों जैसे फीड मिल, कोल्ड स्टोर निर्माण, आइस फैक्टरी, बीओफलोक व अन्य परियोजनाओं के लिए पंजीकृत पट्टानामे की न्यूनतम अवधि दस वर्ष निर्धारित की गई है।
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जिला मत्स्य अधिकारी ने बताया कि योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों के पास परिवार पहचान पत्र होना अनिवार्य है। लाभार्थी के पास अपनी भूमि होने की स्थिति में उसे राज्य रिकॉर्ड के अनुसार भूमि स्वामित्व दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। योजना में खारे पानी में सफेद झींगा पालन हेतु प्रति हेक्टेयर इकाई लागत 14 लाख रुपये निर्धारित की गई है। सामान्य वर्ग के पुरुष लिए 40 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति एवं महिला लाभार्थियों के लिए 60 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।
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जिला मत्स्य अधिकारी ने बताया कि आवेदन के साथ जन्म प्रमाण पत्र, मतदाता कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड प्रस्तुत करना होगा। इसके अलावा, जाति प्रमाण पत्र, मत्स्य प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, भूमि रिकॉर्ड, बिल/रसीद/वाउचर, तालाब या परियोजना स्थल के फोटो, बैंक खाते व पैन कार्ड का विवरण भी आवश्यक होगा। इसके साथ ही लाभार्थी को विभाग एवं स्वयं के बीच अनुबंध पत्र, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) अथवा स्वनिहित प्रस्ताव (एससीपी) भी जमा करवाना होगा।
अनुसूचित जाति के लिए पंचायती तालाब मिलते हैं पट्टे पर
इसके अतिरिक्त विभाग की ओर राज्य प्रायोजित स्कीम भी जन कल्याण के लिए चलाई जा रही है। इसमें अनुसूचित जाति के लिए पंचायती तालाबों को पट्टे पर लेने के लिए प्रथम वर्ष से लेकर पांच वर्षों तक पट्टा राशि पर अनुदान, जाल खरीद पर अनुदान जैसी योजना शामिल है। इस वर्ष 2 जुलाई से लेकर 30 जुलाई तक ई-टेंडरिंग के माध्यम से घग्गर नदी व अन्य सरकारी नदी नालों व नहरों कि मत्स्य शिकार के लिए बोली की जाएगी।