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रूस-यूक्रेन युद्ध: खारकीव में बेसमेंट में फंसे विद्यार्थी वीडियो वायरल कर मांग रहे है सरकार से सहायता

Sat, 26 Feb 2022 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 26 Feb 2022 11:59 PM IST
सार

कई छात्र सामान उठाकर लवीब से पैदल ही पोलैंड व दूसरे देशों की सीमा की तरफ रवाना हो रहे हैं। पोलैंड देश का बॉर्डर लवीब से 80 किलोमीटर दूर है। सिरसा के कई छात्र बॉर्डर पर फंसे हैं।

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Students trapped in the basement of hostels in Kharkiv, many students left for Poland on foot from Lviv
खारकीव में बाजार से सामान लेने के लिए लाइन में लोग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

यूक्रेन के अलग-अलग शहरों में अभी भी सिरसा के करीब 40 छात्र फंसे हुए है। यूक्रेन के खारकीव में सिरसा के सबसे अधिक छात्र फंसे है। यहां पर बम बारी होने के कारण एंबेसी की ओर से भी सभी विद्यार्थियों को बंकरों और हॉस्टलों में ही रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं लवीब में फंसे कई छात्र डर के कारण स्वदेश लौटने के लिए हॉस्टल छोड़ पैदल ही यूक्रेन से पोलैंड की तरफ रवाना हो रहे हैं। पोलैंड के बॉर्डर बंद होने और भारतीय को प्रवेश नहीं करने देने के भी मामले सामने आ रहे हैं। जिसके कारण विद्यार्थियों की परेशानी पहले से और अधिक बढ़ गई है।

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बीते तीन दिनों से रूस का यूक्रेन पर हमला जारी है। यूक्रेन में एयरपोर्ट खत्म करने और रोड भी कई स्थानों से खत्म होने के कारण विद्यार्थियों की वापसी की चिंता पहले से अधिक बढ़ गई है। खारकीव में सबसे अधिक विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खारकीव में सिरसा से सात विद्यार्थी अभी भी हैं। सभी विद्यार्थी अपने परिजनों के साथ संपर्क साधे हुए है।
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वहीं खारकीव में फंसे छात्र के पिता राजेश अरोड़ा ने बताया कि उनके बेटे अविश के साथ सिरसा के साथ अन्य विद्यार्थी भी हैं। हालांकि एंबेसी की ओर से उन्हें वहीं पर रहने को बोला गया है। खाने, पीने और नकदी को लेकर उन्हें कुछ परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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लेकिन दिन के समय कई स्टोर खुलने से उन्हें खाने पीने का सामान मुश्किल से मिल पाया है। लेकिन अभी स्थिति पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाई हैै। जिसके कारण उनकी चिंता भी पहले से अधिक बढ़ी हुई है।

लवीब से पैदल ही पोलैंड की लिए रवाना हुए दोस्त, लेकिन अभी नहीं पहुंचे
यूक्रेन से सिरसा लौटी खुशी ने अपने दोस्तों के साथ बातचीत की, तो उसने बताया कि लवीब से करीब 82 किलोमीटर दूर पोलैंड के लिए उनके कई साथी रवाना हुए थे। वह कुछ सामान भी लेकर साथ गए। रास्ते में कैब ली लेकिन उसने भी उन्हें पोलैंड के बॉर्डर से दूर उतार दिया। जिसके बाद वे किसी तरह पोलैंड के बॉर्डर पर पहुंचे, लेकिन वह बंद मिला। करीब 6 से 7 घंटे का पैदल ही रास्ता तय कर वे दूसरे बॉर्डर पर पहुंचे तो भारतीय होने के डॉक्यूमेंट पूरे न होने की जानकारी देकर उन्हें पोलैंड में एंट्री नहीं दी गई। अंतिम बार जब उनकी बात हुई तो वह पोलैंड और यूक्रेन के बॉर्डर पर ही थी। उन्हें दूसरे क्षेत्र से बुलाया जा रहा है। हालांकि पोलैंड के बॉर्डर पर अभी गोली बारी जैसी कोई भी स्थिति नहीं है।

वीडियो वायरल कर सरकार से मांग रहे है मदद
यूक्रेन के खारकीव में बीते दो दिन गोली बारी जारी है। तीसरे दिन दोपहर तक स्थिति सामान्य रही। खारकीव में फंसे छात्र अविश अरोड़ा, बेगू रोड निवासी योगेश शर्मा, अभोली निवासी सौरव कंबोज, पुलिस लाइन निवासी आशीष वर्मा, गांधी कॉलोनी निवासी महक, नाथूसरी चोपटा निवासी प्रीति, रानियां निवासी प्रीत की ओर से भी वीडियो वायरल कर स्थिति की जानकारी दी जा रही है। सभी विद्यार्थियों को खारकीव के अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन पर रखा गया है। वायरल वीडियो में सभी छात्र मदद की गुहार लगा रहे हैं। वे खाने, पीने व नकदी संबंधित समस्या की जानकारी दे रहे हैं। वहीं उनका कहना है कि भारतीय एंबेसी की ओर से अभी तक उनके पास कोई भी सहायता नहीं भेजी गई है। वहां से उन्हें किस तरह से बाहर निकाला जाएगा इसके बारे में भी उन्हें अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है। एंबेसी के कहने पर वे अभी भी वहीं पर ही ठहरे हुए हैं।


इवानो से पोलैंड लेकर पहुंची है एंबेसी, वापसी का नहीं कोई पता
शहर के गुरुनानक नगर निवासी हरजीत कौर का बेटा अरमान भी इवानो में एमबीबीएस कर रहा था। लेकिन युद्ध शुरू होने के कारण स्थिति खराब हो चुकी है। उनकी मां ने बताया कि बेटे से संपर्क हुआ था। जिसके बाद उसने बताया कि उन्हें वहां से निकालकर पोलैंड की तरफ ले जाया जा रहा है। लेकिन अभी इसके बाद वापसी की कोई जानकारी नहीं है। सरकार की ओर से सहायता तो दी जा रही है। लेकिन जब तक बेटा घर नहीं पहुंचता चिंता बढ़ती जा रही है।

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