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वतन लौटने वालों के चेहरों पर मुस्कान, जो अभी भी फंसे हैं उनके अभिभावक अब भी परेशान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Mar 2022 11:59 PM IST
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Smile on the faces of the returnees, the parents of those who are still trapped are still upset
घर पहुंचने पर शुभम को मिठाई खिलाते उनके अभिभावक । शुभम के सहयोग से - फोटो : Sirsa
सिरसा, बड़ागुढ़ा। यूक्रेन से अब काफी संख्या में भारतीय नागरिक अपने वतन वापस लौट रहे हैं। इसी के साथ सिरसा के भी करीब 25 विद्यार्थी वतन वापसी कर चुके हैं। जिन अभिभावकों के बच्चे वापस लौट आए उनके चेहरों पर खुशी साफ झलकती हुई दिखाई दे रही है। लेकिन जिन अभिभावकों के बच्चे अभी यूक्रेन में फंसे हैं उनकी चिंता अब पहले से बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को सिरसा में करीब पांच विद्यार्थियों ने वतन में वापसी की है। जिसके बाद उनके परिजनों को राहत की सांस मिली है।
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अरमान बोला: बॉर्डर पार करने के दौरान खड़े रहने से पैरों में आ गई थी सुजन
वहीं गुरुनानक नगर निवासी हरजीत कौर का बेटा अरमान भी यूक्रेन में फंसे हुआ था। वह शुक्रवार को अरमान ने वतन वापसी की है। अरमान ने बताया कि इवानों में एमबीबीएस की पढ़ाई करता है। 24 मार्च को उसकी वापसी की फ्लाइट थी। लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद उसकी 24 की फ्लाइट भी रद्द हो गई। जिसके बाद वह वहां पर फंस गया। यूक्रेन सरकार की ओर से उन्हें बंकरों और हॉस्टल के बेसमेंट में रखा गया। यूक्रेन में स्थिति खराब होने के कारण उन्होंने वहां से निकलना ही उचित समझा। उन्होंने वहां से निजी बस कर रोमानिया जाने का फैसला लिया। रोमानिया बॉर्डर पर वह चार घंटे में पहुंच गए। जाम होने के कारण बस की ओर से भी उन्हें आठ किलोमीटर दूर उतार दिया गया। रोमानिया बॉर्डर पर भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें 24 घंटे खड़े होकर इंतजार करना पड़ा। इस दौरान उनके पांव पर सुजन भी आ गई। तीन दिन रोमानिया में रहने के बाद वह वापस वतन लौट पाए हैं।
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हॉस्टल में रूकने के थे आदेश, बाद में रह गया था अकेला तो निकला बाहर: परनीत
विष्णु कॉलोनी निवासी सुरेश कुमार का बेटा परनीत तीन माह पहले ही यूक्रेन के चरणवत्सी शहर में पढ़ाई के लिए गया था। वहीं परनीत ने बताया कि हमला होने के बाद उन्हें यूनिवर्सिटी की ओर से हॉस्टल में ही रुकने को कहा गया था। उसके अन्य साथी पहले ही वहां से निकल आए। इसके बाद वह अकेला रह गया तो उसने में भी वहां से निकलने का फैसला लिया। जब वह वहां से निकला तो स्थिति सामान्य थी। लेकिन बाद में उसे वहां की स्थिति खराब होने की जानकारी मिली। उन्हें दो दिन तक यूक्रेन से रोमानिया में एंट्री करने का समय लग गया। रोमानिया में दो दिन बाद उन्हें फ्लाइट मिल पाई। अब वह वतन वापस लौट चुका है। जिससे परिजनों को भी राहत की सांस ली है।
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हर रोज होते थे धमाके, लगता था जैसे जिंदा लौट पाऊंगा या नहीं : शुभम कंबोज
बड़ागुढ़ा क्षेत्र के गांव बप्पा में यूक्रेन से सकुशल वापस लौटने पर छात्र शुभम कंबोज का परिवार व गांव के लोगों द्वारा स्वागत करते हुए बधाई दी। शुभम के माता-पिता ने भावुक होकर कहा कि परमात्मा का शुक्र है कि उनका बेटा सही सलामत मौत के साए से वापस घर लौट आया है। शुभम ने बताया कि उन्हें भी यकीन नहीं हो रहा कि वह अपने देश वापस लौट आया है। उसे हर पल मौत का डर सताता रहता था। शुभम यूक्रेन के शहर खारकीव में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए गया था। 5 वर्ष उसके बीत चुके थे, लेकिन अंतिम वर्ष की डिग्री समाप्त होने से पहले ही रूस और यूक्रेन की जंग छिड़ गई। शुभम ने बताया कि चारों तरफ हो रहे धमाकों के चलते शहर के बीच रह रहे छात्रों को बॉर्डर तक पहुंचने के लिए बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। वह भी खारकीव से 1500 किलोमीटर दूर बड़ी मुश्किल से मौत का सफर तय कर पोलैंड बॉर्डर तक पहुंचा। वहां से उन्हें भारतीय दूतावास के माध्यम से भारत लाया गया। शुभम के पिता श्यामलाल ने बताया कि दिन में कई कई बार वीडियो कॉल कर शुभम व उसके साथियों का हालचाल पूछते थे लेकिन अब उनका बेटा सही सलामत घर वापस आ गया है इसके लिए परमात्मा का शुक्रिया अदा करते हैं। उन्होंने कहा कि वहां जो अन्य छात्र फंसे हुए हैं उन्हें भी वहां से निकालकर सकुशल लाया जाए।

विष्णु कॉलोनी निवासी परनीत अपने पिता सुरेश कुमार व माता के साथ।  परनीत के सहयोग से ।

विष्णु कॉलोनी निवासी परनीत अपने पिता सुरेश कुमार व माता के साथ। परनीत के सहयोग से ।- फोटो : Sirsa

गुरुनानक नगर निवासी अरमान अपने पिता मलकीत सिंह व माता हरजीत कौर के साथ। अरमान के सौजन्य से

गुरुनानक नगर निवासी अरमान अपने पिता मलकीत सिंह व माता हरजीत कौर के साथ। अरमान के सौजन्य से- फोटो : Sirsa

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