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Sirsa News: दो सप्ताह बाद भी जांच करने नहीं पहुंची एसआईटी
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ओढां। द सिरसा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक की ओढां शाखा के प्रबंधक पर लोगों की पेंशन राशि में गड़बड़ी कर रुपये के गबन का आरोप लगा। बैंक के महाप्रबंधक ने शिकायतकर्ता पक्ष को एक सप्ताह में एसआईटी जांच का आश्वासन दिया था लेकिन तब से दो सप्ताह का समय गुजरने के बाद भी जांच शुरू नहीं हो सकी। इससे शिकायतकर्ता पक्ष में रोष है।
शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी शाखा प्रबंधक को बचाकर मामले को रफा-दफा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी शिकायत करेंगे। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पीड़ितों की संख्या बढ़ सकती है। इसलिए आरोप की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
इधर, जनता अधिकार मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष जसविंदर सिंह बब्बू ने बताया कि बैंक के अधिकारियों ने आरोप की जांच शीघ्र करवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ नहीं किया गया। उधर, महाप्रबंधक ऋषिपाल ने कहा कि आरोप की जांच शीघ्र होगी। इसके लिए एसआईटी गठित की गई है।
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अलीकां पैक्स में 1.14 करोड़ के घोटाले की जांच भी लंबित
अलीकां पैक्स में वर्ष 2017 में हुए करीब 1.14 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच भी लंबित है। इस मामले में कुल 13 कर्मचारी और अधिकारी शामिल थे। इस मामले में अकेले पैक्स प्रबंधक को जिम्मेदार बताकर अन्य आरोपियों को बचा लिया गया। इसी कारण सात साल बाद भी न तो किसी पर कार्रवाई हुई और न ही वसूली। इस मामले के दोषी कर्मचारी सुभाष चंद्र ने निदेशक मंडल को बताया कि उसे अकेले फंसाया गया है। निदेशक मंडल ने करीब डेढ़ माह पहले मामले की जांच दोबारा करवाने का आश्वासन दिया था लेकिन हुआ कुछ नहीं।
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शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी शाखा प्रबंधक को बचाकर मामले को रफा-दफा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी शिकायत करेंगे। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पीड़ितों की संख्या बढ़ सकती है। इसलिए आरोप की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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इधर, जनता अधिकार मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष जसविंदर सिंह बब्बू ने बताया कि बैंक के अधिकारियों ने आरोप की जांच शीघ्र करवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ नहीं किया गया। उधर, महाप्रबंधक ऋषिपाल ने कहा कि आरोप की जांच शीघ्र होगी। इसके लिए एसआईटी गठित की गई है।
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अलीकां पैक्स में 1.14 करोड़ के घोटाले की जांच भी लंबित
अलीकां पैक्स में वर्ष 2017 में हुए करीब 1.14 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच भी लंबित है। इस मामले में कुल 13 कर्मचारी और अधिकारी शामिल थे। इस मामले में अकेले पैक्स प्रबंधक को जिम्मेदार बताकर अन्य आरोपियों को बचा लिया गया। इसी कारण सात साल बाद भी न तो किसी पर कार्रवाई हुई और न ही वसूली। इस मामले के दोषी कर्मचारी सुभाष चंद्र ने निदेशक मंडल को बताया कि उसे अकेले फंसाया गया है। निदेशक मंडल ने करीब डेढ़ माह पहले मामले की जांच दोबारा करवाने का आश्वासन दिया था लेकिन हुआ कुछ नहीं।