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घग्घर के कहर से बचने की तैयारी
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Wed, 01 Jun 2016 11:48 PM IST
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घ्ाग्घ्ार नदी
- फोटो : Bureau
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घग्घर नदी ने सिरसा में छह बार कहर बरसाया है। इस बार ऐसा न हो इसके लिए प्रशासन ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। वर्ष 2010 में जिले में घग्घर की बाढ़ से भारी नुकसान हुआ था। इससे पूर्व भी पांच बार बाढ़ का भंयकर रूप लोग देख चुके हैं। अब नदी के तटबंधों के सहारे ही बाढ़ से बचा जा सकता है। जिले के तटबंधों में 419 प्वांइट खतरे में हैं जहां से बांध टूट सकता है।
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घग्घर नदी की बाढ़ से आसपास के लोगों का बचाव करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा 90 के दशक में तटबंध बनाया गया। उसके बाद कई वर्षों तक बाढ़ की स्थिति नहीं बनी हालांकि पानी आता रहा पर तटबंध उसे रोकते रहे जिससे बाढ़ भयानक नहीं हुई। परंतु 2010 में बांध के नीचे से निकाली गई पाइपों के प्वांइटों से रिसाव होने के कारण कई स्थानों से बांध टूट गया जिस कारण कई गांव बाढ़ की चपेट में आए गए। फसलें तबाह हो गई। कई गांव डूब गए। उसके बाद प्रशासन बांध के नीचे से पाइप लाइन निकालने पर पाबंदी लगा दी।
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घग्घर जल सेवा मंडल विभाग द्वारा सभी प्वाइंटों का निरीक्षण किया गया। इस समय जिले की सीमा में 419 ऐसे प्वांइट हैं जहां पर बांध के नीचे से पाइप लाइन निकाली हुई है। विभाग का इन्हीं प्वाइंटों पर खास ध्यान हैं क्योंकि यहीं से पानी का रिसाव होने से तबाही मचती है। इस बार बरसात अच्छी बताई जा रही है जिस कारण बाढ़ का खतरा भी अधिक है। गौरतलब हो कि घग्घर नदी की बाढ़ से जिले के 50 से अधिक गांव प्रभावित होते हैं। 60 के दशक के बाद 1988, 1989, 1994 व 1996 में भी बाढ़ आई थी। पर 2010 की बाढ़ में डूबने वाले गांवों की संख्या सबसे अधिक थी। इस मामले में घग्घर जल सेवा मंडल के कार्यकारी अभियंता एनके भोला ने बताया कि बाढ़ के मद्देनजर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। तटबंध की मजबूती के लिए कार्य शुरू कर दिया गया है। सभी प्वाइंटों का निरीक्षण किया गया है। डीसी शरणदीप कौर ने स्वयं भी कई स्थानों पर तटबंध का निरीक्षण किया है।
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बांध के नीचे से निकाल ली अवैध पाइप लाइन
घग्घर नदी के किनारे के आसपास कुछ किसानों ने ट्यूबवेल लगा कर दूर के खेतों में पाइप लाइन अवैध रूप से डाली हुई हैं। लोगों ने विभाग से मंजूरी लिए बिना ही बांध के नीचे से पाइप लाइन डाली है जिससे तटबंध कमजोर हो गए हैं। हालांकि विभाग ने अब पाइप लाइन निकालने पर पाबंदी लगाई हुई है पर हर वर्ष अब भी अवैध रूप से पाइप लाइन निकालने का सिलसिला जारी है। बांध ही नहीं उसके बाद बरनाला रोड के नीचे से भी किसान पाइप लाइन को निकालते हैं पर कोई भी विभाग कार्रवाई के लिए आगे नहीं आ रहा।
60 किलो मीटर से अधिक लंबाई है बांध की
घग्घर के दोनों और बनाया गया बांध जिले की सीमा में 60 किलो मीटर से भी अधिक लंबा है। विभाग के अनुसार ओटू से राजस्थान सीमा तक करीब 30 किलो मीटर की लंबाई इस बांध की है जबकि ओटू से पंजाब सीमा की ओर फरवाईं कलां तक 26.70 किलो मीटर बांध की लंबाई है। फरवाईं कलां से मुसाहिबवाला (पंजाब सीमा) तक दूसरे विभागों के तहत बांध बनाया गया है। बता दें कि बांध की मजबूती के लिए हर वर्ष कार्य किया जाता है।
कंट्रोल रूम किया स्थापित
बाढ़ के मद्देनजर कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है। विभिन्न विभागों से कर्मचारी व अधिकारी एक जुलाई से 30 सितंबर तक (बाढ़ सीजन) इस ड्यूटी से जुड़े रहेंगे। इस दौरान 24 घंटे शिफ्टों में कर्मचारियों व अधिकारियों की तैनाती रहेगी। इसी प्रकार मिट्टी भरने के लिए खाली थैले, मोटर वोट, किश्तियां, लाइफ जैकेट आदि का प्रबंध भी कर लिया गया है। जरूरत पड़ने पर अनुबंधित गोताखोर भी सेवाओं के लिए तत्पर रहेंगे।
लोगों में भय
घग्घर नदी की बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों के लोगों में जुलाई से सितंबर माह तक भय बना रहता है। लोगों को इस बात का भी डर है कि फसलों के बरबाद होने से उन्हें दोहरा नुकसान हो सकता है। कई बार चपेट में आ चुके लोगों का कहना है कि उन्हें तो बाढ़ नाम से ही डर लगने लगता है।
नहरें करेंगी मदद
घग्घर नदी में खतरे से अधिक पानी आता है तो काफी हद तक नदी से निकाली गई नहरें मदद करेंगी। घग्घर नदी से जिले की सीमा में 14 नहरें निकली हुई हैं। जब नदी में पानी आता है तो इन नहरों के माध्यम से दूर-दराज के गांवों के खेतों तक पानी सिंचाई के लिए छोड़ा जाता है। इससे नदी के उफान में काफी कमी आती है। करीब पांच हजार क्यूसेक पानी इन नहरों में छोड़ा जा सकता है। बाढ़ के खतरे से निपटने में कुछ हद तक ये नहरें मदद कर सकती हैं। इससे दूर के खेतों में नदी के पानी की सिंचाई भी हो जाती है। किसानों का मानना है कि नदी का पानी खेतों में लगने से भूमि उपजाऊ हो जाती है।