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22 मई को चुनी जाएगी शहर की सरकार
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Fri, 29 Apr 2016 01:31 AM IST
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नगर परिष्ाद डबवाली
- फोटो : Bureau
निकाय चुनाव का बिगुल बज गया है। 22 मई को होने वाले चुनाव में 35 हजार 850 मतदाता शहर की सरकार चुनेंगे। चुनाव में पहली बार ईवीएम का प्रयोग होगा। डबवाली में पिछले दो साल से प्रशासक राज चल रहा था। जैसे ही चुनाव की तारीख घोषित हुई, ठीक वैसे ही राजनीतिक सरगर्मियां चढ़ गई हैं। एकाएक कांग्रेस ने आपातकालीन बैठक कॉल कर ली है।
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राज्य चुनाव आयुक्त राजीव शर्मा ने चंडीगढ़ में जैसे ही शहरी स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा की तो गर्मी के पारे के बीच राजनीति का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। सूने पड़े राजनीतिक पार्टियों के कार्यालयों में टिकट के चाहवानों ने रौनक बढ़ा दी। डबवाली में चुनाव इसलिए भी खास हैं कि इतिहास में पहली बार नगर परिषद सदस्यों के चुनाव होने जा रहे हैं।
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जिसमें कुल 35 हजार 850 मतदाता भाग लेंगे। उपरोक्त मतदाताओं में से 18773 पुरूष तथा 17077 महिला मतदाता शामिल हैं। ये मतदाता 21 वार्ड पार्षद चुनेंगे। अब तक डबवाली में नगर पालिका चली आ रही थी। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जैसे ही शहर की आबादी पचास हजार पार हुई तो इसे नगर परिषद का दर्जा मिल गया। नई वार्डबंदी के अनुसार वार्डों में काफी फेरबदल हुआ है।
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लाईन के एक ओर यहां पांच वार्डों की जगह संख्या चार हो गई है। दूसरी ओर 17 वार्ड हैं। सबसे अधिक मतदाता वार्ड नंबर तीन में हैं। जिसमें कुल 2413 मतदाता हैं। पुरूषों की संख्या 1268 तथा महिलाओं की संख्या 1145 है। जबकि वार्ड नंबर छह में सबसे कम 1179 मतदाता हैं। जिसमें 614 पुरूष तथा 565 महिला मतदाता शामिल हैं। दिसंबर 2008 में डबवाली नगरपालिका का चुनाव इतिहास में दर्ज हो गया है। चूंकि आखिरी बार लोगों ने नगरपालिका के लिए मतदान किया था। 20 मार्च 2009 को सदस्यों ने शपथ ग्रहण करके कार्यभार संभाला था। यह कार्यालय 19 मई 2014 को समाप्त हो गया था। इसी बीच नगर परिषद की नोटिफिकेशन जारी हो गई। पिछले करीब दो साल से निकाय चुनाव की प्रतीक्षा हो रही थी।
कांग्रेस के लिए सरप्राइज रहा 2008 का चुनाव
वर्ष 2008 का चुनाव कांग्रेस के लिए सरप्राइज ही रहा। चुनाव के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आए। कुल 19 सीटों में से 10 सीटें कांग्रेस के पाले में आई। जबकि इनेलो को अपने गढ़ में नौ सीटों पर संतोष करना पड़ा। कांग्रेस की ओर से सिंपा जैन नगर परिषद की चेयरमैन बनी। हरनेक सिंह उपचेयरमैन बने। कांग्रेस के चार पार्षदों ने इनेलो समर्थित पार्षदों के साथ मिलकर अविश्वास प्रस्ताव पारित करवा दिया। करीब सवा साल में ही तख्तापलट हो गया। सत्ता इनेलो के हाथ में आ गई। करीब दस साल बाद हाथ में आई बाजी कांग्रेस से कुछ ही समय में छिन गई। वर्ष 1998-99 में इनेलो समर्थित सुखवंत कौर, 2004 में इनेलो समर्थित आशा वाल्मीकि के सिर चेयरमैन का ताज सजा था।
नई पिच पर तीनों पार्टियों में होगा धुआंधार मुकाबला
नई वार्ड बंदी से चुनाव की पिच नई है। ऐसे में इनेलो के गढ़ में कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा भी धुआंधार मुकाबला करने की आस जमाए बैठे होगी। पिछले तीन चुनावों पर गौर किया जाए तो भाजपा केवल 2008 के चुनाव में महज एक वार्ड पार्षद बना पाई थी, जो बाद में इनेलो में जा मिला था। ऐसे में भाजपा के लिए निकाय चुनाव टेढ़ी खीर साबित हो सकते हैं।
सरकार के साथ चलते हैं शहरी मतदाता
वर्ष 1999 से 2008 तक हुए तीन चुनाव पर गौर करें तो शहरी लोग सरकार के साथ गए हैं। 1999, 2004 में इनेलो की सत्ता के दौरान इनेलो समर्थित प्रत्याशी विजयी हुए थे। 2004 में तो 19 के 19 वार्डों पर इनेलो परचम फहरा था। 2008 में कांग्रेस की सत्ता के दौरान कांग्रेस को विजयी मिली। अब प्रदेश की बागडोर भाजपा के हाथ में है। ऐसे में भाजपा मौके को भुनाने का प्रयास करेगी।
चुनाव की घोषणा के साथ राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने आपातकालीन बैठक कॉल की है। शुक्रवार शाम को आयोजित होनी वाली बैठक की अध्यक्षता डॉ. केवी सिंह करेंगे।